tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में जया एकादशी 1936 रवि 2 फ़रवरी या सोम 3 फ़रवरी

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में जया एकादशी 1936 कब है?

स्मार्त

रविवार 2 फ़रवरी

वैष्णव

सोमवार 3 फ़रवरी

माघ शुक्ल एकादशी

Ipameri में रवि 2 फ़रवरी का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · सोमवार 3 फ़रवरी

पारण समय
11:25–18:52
7 घं 27 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · मंगलवार 4 फ़रवरी

पारण समय
04:25–05:30
1 घं 5 मि · Tithika की परिपाटी

जया एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • रविवार 2 फ़रवरी
  • 06:00व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • सोमवार 3 फ़रवरी
  • 11:25–18:52पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • सोमवार 3 फ़रवरी
  • 06:00व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • मंगलवार 4 फ़रवरी
  • 04:25–05:30पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंजया एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में जया एकादशी रवि 2 फ़रवरी या सोम 3 फ़रवरी को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में जया एकादशी रवि 2 फ़रवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव सोम 3 फ़रवरी को व्रत रखते हैं।

दशमी 05:43 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:43 से 05:23 सोम तक।

अरुणोदय में एकादशी केवल 05:23 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 05:43 रवि से 05:23 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 2 फ़रवरी को सूर्योदय पर है, 06:00: रवि 2 फ़रवरी।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। रवि 2 फ़रवरी को दशमी 05:43 तक है, अरुणोदय (04:24–06:00) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 05:23 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव सोम 3 फ़रवरी को व्रत रखते हैं: सोम 3 फ़रवरी।

व्रत का पारण

स्मार्त · सोम 3 फ़रवरी, 11:25–18:52 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 3 फ़रवरी 05:23 से मंगल 4 फ़रवरी 05:30 तक है; हरिवासर 11:25 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:52) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:35 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

वैष्णव · मंगल 4 फ़रवरी, 04:25–05:30 (अरुणोदय से, Tithika की परिपाटी)

द्वादशी मंगल 4 फ़रवरी को 05:30 पर, अरुणोदय (04:25) लगने के बाद और सूर्योदय (06:01) से पहले, समाप्त होती है। द्वादशी छोटी हो तो निर्णयसिंधु, मत्स्य पुराण के अनुसार, पारण भोर में, द्वादशी समाप्त होने से पहले कराता है। Tithika इसे अरुणोदय से आरंभ करता है: Tithika की परिपाटी।

नियम

माघ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।