tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में जया एकादशी 1908 पारण समय 06:05⁠–⁠18:48, गुरु 13 फ़रवरी

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में जया एकादशी 1908 कब है?

बुधवार 12 फ़रवरी

माघ शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में बुध 12 फ़रवरी का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

गुरुवार 13 फ़रवरी

पारण समय
06:05–18:48
12 घं 43 मि · Tithika की परिपाटी

जया एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • बुधवार 12 फ़रवरी
  • 06:05व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • गुरुवार 13 फ़रवरी
  • 06:05–18:48पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंजया एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में जया एकादशी बुध 12 फ़रवरी को क्यों है?

जया एकादशी बुध 12 फ़रवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 17:02 मंगल से 19:28 तक।

एकादशी 19:28 बुध पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल बुध 12 फ़रवरी को सूर्योदय पर है, 05:58: बुध 12 फ़रवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 17:02 मंगल पर, उससे (04:22–05:58) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · गुरु 13 फ़रवरी, 06:05–18:48 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 12 फ़रवरी 19:28 से गुरु 13 फ़रवरी 22:08 तक है; हरिवासर 02:08 पर पूरा होता है। इसलिए पारण गुरु 13 फ़रवरी को सूर्योदय (05:59) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:42) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:31 तक, करते हैं।

नियम

माघ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।