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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में इंदिरा एकादशी 1963 पारण समय 06:09⁠–⁠16:21, शनि 14 सितंबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में इंदिरा एकादशी 1963 कब है?

शुक्रवार 13 सितंबर

आश्विन कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · भाद्रपद कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में शुक्र 13 सितंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शनिवार 14 सितंबर

पारण समय
06:09–16:21
10 घं 12 मि

इंदिरा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शुक्रवार 13 सितंबर
  • 06:10व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शनिवार 14 सितंबर
  • 06:09–16:21पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंइंदिरा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में इंदिरा एकादशी शुक्र 13 सितंबर को क्यों है?

इंदिरा एकादशी शुक्र 13 सितंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 17:18 से।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 17:18 गुरु से 16:38 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शुक्र 13 सितंबर को सूर्योदय पर है, 06:10: शुक्र 13 सितंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 17:18 गुरु पर, उससे (04:34–06:10) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शनि 14 सितंबर, 06:09–16:21

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 13 सितंबर 16:38 से शनि 14 सितंबर 16:21 तक है; हरिवासर 22:34 शुक्र पर पूरा होता है। इसलिए पारण शनि 14 सितंबर को सूर्योदय (06:09) से होता है। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:33 तक, करते हैं।

नियम

आश्विन कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · भाद्रपद कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।