Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में इंदिरा एकादशी 1962 पारण समय 06:00–09:23, मंगल 25 सितंबर
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में इंदिरा एकादशी 1962 कब है?
सोमवार 24 सितंबर
आश्विन कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · भाद्रपद कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में सोम 24 सितंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
मंगलवार 25 सितंबर
इंदिरा एकादशी का समय: व्रत, पारण
- सोमवार 24 सितंबर
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06:01व्रत आरंभसूर्योदय पर
- मंगलवार 25 सितंबर
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06:00–09:23पारण समयव्रत खोलने का समय
Ipameri में इंदिरा एकादशी सोम 24 सितंबर को क्यों है?
इंदिरा एकादशी सोम 24 सितंबर को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।
दशमी 05:48 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:48 से 07:23 सोम तक।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:48 रवि से 07:23 तक।
द्वादशी: 07:23 सोम से 09:23 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, रवि 23 सितंबर को 06:01 और सोम 24 सितंबर को 06:01। एकादशी (रवि 23 सितंबर 05:48 से सोम 24 सितंबर 07:23 तक) और द्वादशी (सोम 24 सितंबर 07:23 से मंगल 25 सितंबर 09:23 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: सोम 24 सितंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: रवि 23 सितंबर को दशमी 05:48 तक है, उसके भीतर (04:25–06:01); सोम 24 सितंबर को पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · मंगल 25 सितंबर, 06:00–09:23
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 24 सितंबर 07:23 से मंगल 25 सितंबर 09:23 तक है; हरिवासर 13:53 सोम पर पूरा होता है। इसलिए पारण मंगल 25 सितंबर को सूर्योदय (06:00) से होता है।
नियम
आश्विन कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · भाद्रपद कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।