tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में देवशयनी एकादशी 2075 मंगल 23 जुलाई या बुध 24 जुलाई

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में देवशयनी एकादशी 2075 कब है?

स्मार्त

मंगलवार 23 जुलाई

वैष्णव

बुधवार 24 जुलाई

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

Ipameri में मंगल 23 जुलाई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · बुधवार 24 जुलाई

पारण समय
08:53–17:56
9 घं 3 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · गुरुवार 25 जुलाई

पारण समय
06:41–17:57
11 घं 16 मि · Tithika की परिपाटी

देवशयनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • मंगलवार 23 जुलाई
  • 06:42व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 24 जुलाई
  • 08:53–17:56पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • बुधवार 24 जुलाई
  • 06:42व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • गुरुवार 25 जुलाई
  • 06:41–17:57पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंदेवशयनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में देवशयनी एकादशी मंगल 23 जुलाई या बुध 24 जुलाई को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में देवशयनी एकादशी मंगल 23 जुलाई को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव बुध 24 जुलाई को व्रत रखते हैं।

दशमी 06:25 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 06:25 से 03:40 बुध तक।

एकादशी 03:40 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 06:25 मंगल से 03:40 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 23 जुलाई को सूर्योदय पर है, 06:42: मंगल 23 जुलाई।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। मंगल 23 जुलाई को दशमी 06:25 तक है, अरुणोदय (05:06–06:42) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 03:40 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव बुध 24 जुलाई को व्रत रखते हैं: बुध 24 जुलाई।

व्रत का पारण

स्मार्त · बुध 24 जुलाई, 08:53–17:56 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 24 जुलाई 03:40 से गुरु 25 जुलाई 00:31 तक है; हरिवासर 08:53 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:56) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:57 तक, करते हैं।

वैष्णव · गुरु 25 जुलाई, 06:41–17:57 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)

द्वादशी गुरु 25 जुलाई को 00:31 पर, रात में, अरुणोदय (05:05) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:41) से सूर्यास्त (17:57) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।

नियम

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।