Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में देवशयनी एकादशी 2074 बुध 4 जुलाई या गुरु 5 जुलाई
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में देवशयनी एकादशी 2074 कब है?
स्मार्त
बुधवार 4 जुलाई
वैष्णव
गुरुवार 5 जुलाई
आषाढ़ शुक्ल एकादशी
Ipameri में बुध 4 जुलाई का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · गुरुवार 5 जुलाई
वैष्णव · शुक्रवार 6 जुलाई
देवशयनी एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- बुधवार 4 जुलाई
-
06:44व्रत आरंभसूर्योदय पर
- गुरुवार 5 जुलाई
-
07:46–17:50पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- गुरुवार 5 जुलाई
-
06:44व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शुक्रवार 6 जुलाई
-
06:44–17:51पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में देवशयनी एकादशी बुध 4 जुलाई या गुरु 5 जुलाई को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में देवशयनी एकादशी बुध 4 जुलाई को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव गुरु 5 जुलाई को व्रत रखते हैं।
दशमी 05:32 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:32 से 02:34 गुरु तक।
एकादशी 02:34 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल बुध 4 जुलाई को सूर्योदय पर है, 06:44: बुध 4 जुलाई।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। बुध 4 जुलाई को दशमी 05:32 तक है, अरुणोदय (05:08–06:44) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 02:34 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव गुरु 5 जुलाई को व्रत रखते हैं: गुरु 5 जुलाई।
व्रत का पारण
स्मार्त · गुरु 5 जुलाई, 07:46–17:50 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 5 जुलाई 02:34 से गुरु 5 जुलाई 23:24 तक है; हरिवासर 07:46 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:50) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:57 तक, करते हैं।
वैष्णव · शुक्र 6 जुलाई, 06:44–17:51 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी शुक्र 6 जुलाई को 23:24 गुरु पर, रात में, अरुणोदय (05:08) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:44) से सूर्यास्त (17:51) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
आषाढ़ शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।