tithika
English

Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में देवशयनी एकादशी 2035 पारण समय 11:57⁠–⁠20:28, सोम 16 जुलाई

व्रत · समय UTC+4 में

Sevan में देवशयनी एकादशी 2035 कब है?

रविवार 15 जुलाई

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Sevan में रवि 15 जुलाई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

सोमवार 16 जुलाई

पारण समय
11:57–20:28
8 घं 31 मि · Tithika की परिपाटी

देवशयनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • रविवार 15 जुलाई
  • 05:42व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • सोमवार 16 जुलाई
  • 11:57–20:28पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंदेवशयनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Sevan में देवशयनी एकादशी रवि 15 जुलाई को क्यों है?

देवशयनी एकादशी रवि 15 जुलाई को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 03:12 से 05:22 सोम तक।

अरुणोदय में एकादशी केवल 05:22 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 03:12 रवि से 05:22 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 15 जुलाई को सूर्योदय पर है, 05:42: रवि 15 जुलाई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 03:12 पर, उससे (04:06–05:42) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · सोम 16 जुलाई, 11:57–20:28 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 16 जुलाई 05:22 से मंगल 17 जुलाई 07:43 तक है; हरिवासर 11:57 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (20:28) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:40 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

नियम

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।