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Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में देवशयनी एकादशी 2034 पारण समय 05:53⁠–⁠08:31, शुक्र 28 जुलाई

व्रत · समय UTC+4 में

Sevan में देवशयनी एकादशी 2034 कब है?

गुरुवार 27 जुलाई

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Sevan में गुरु 27 जुलाई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शुक्रवार 28 जुलाई

पारण समय
05:53–08:31
2 घं 38 मि

देवशयनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • गुरुवार 27 जुलाई
  • 05:52व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 28 जुलाई
  • 05:53–08:31पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंदेवशयनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Sevan में देवशयनी एकादशी गुरु 27 जुलाई को क्यों है?

देवशयनी एकादशी गुरु 27 जुलाई को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।

दशमी 05:00 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:00 से 06:59 गुरु तक।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:00 बुध से 06:59 तक।

द्वादशी: 06:59 गुरु से 08:31 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, बुध 26 जुलाई को 05:51 और गुरु 27 जुलाई को 05:52। एकादशी (बुध 26 जुलाई 05:00 से गुरु 27 जुलाई 06:59 तक) और द्वादशी (गुरु 27 जुलाई 06:59 से शुक्र 28 जुलाई 08:31 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: गुरु 27 जुलाई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: बुध 26 जुलाई को दशमी 05:00 तक है, उसके भीतर (04:15–05:51); गुरु 27 जुलाई को पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 28 जुलाई, 05:53–08:31

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 27 जुलाई 06:59 से शुक्र 28 जुलाई 08:31 तक है; हरिवासर 13:22 गुरु पर पूरा होता है। इसलिए पारण शुक्र 28 जुलाई को सूर्योदय (05:53) से होता है।

नियम

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।