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Pāthardi, महाराष्ट्र में देवशयनी एकादशी 1981 पारण समय 10:33⁠–⁠19:10, सोम 13 जुलाई

महाराष्ट्र, भारत

व्रत · समय IST में

Pāthardi में देवशयनी एकादशी 1981 कब है?

रविवार 12 जुलाई

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Pāthardi में रवि 12 जुलाई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

सोमवार 13 जुलाई

पारण समय
10:33–19:10
8 घं 37 मि · Tithika की परिपाटी

देवशयनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • रविवार 12 जुलाई
  • 05:58व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • सोमवार 13 जुलाई
  • 10:33–19:10पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंदेवशयनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Pāthardi में देवशयनी एकादशी रवि 12 जुलाई को क्यों है?

देवशयनी एकादशी रवि 12 जुलाई को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 01:42 से 04:01 सोम तक।

एकादशी 04:01 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 01:42 रवि से 04:01 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 12 जुलाई को सूर्योदय पर है, 05:58: रवि 12 जुलाई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 01:42 पर, उससे (04:22–05:58) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · सोम 13 जुलाई, 10:33–19:10 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 13 जुलाई 04:01 से मंगल 14 जुलाई 06:08 तक है; हरिवासर 10:33 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:10) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:37 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

नियम

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।