Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में देवशयनी एकादशी 1933 पारण समय 06:44–17:49, मंगल 4 जुलाई
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में देवशयनी एकादशी 1933 कब है?
पारण का समय: व्रत कब खोलें?
मंगलवार 4 जुलाई
देवशयनी एकादशी का समय: व्रत, पारण
- सोमवार 3 जुलाई
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06:44व्रत आरंभसूर्योदय पर
- मंगलवार 4 जुलाई
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06:44–17:49पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में देवशयनी एकादशी सोम 3 जुलाई को क्यों है?
देवशयनी एकादशी सोम 3 जुलाई को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 02:07 से 23:14 तक।
एकादशी 23:14 सोम पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल सोम 3 जुलाई को सूर्योदय पर है, 06:44: सोम 3 जुलाई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 02:07 पर, उससे (05:08–06:44) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · मंगल 4 जुलाई, 06:44–17:49 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 3 जुलाई 23:14 से मंगल 4 जुलाई 19:54 तक है; हरिवासर 04:24 पर पूरा होता है। इसलिए पारण मंगल 4 जुलाई को सूर्योदय (06:44) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:49) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:57 तक, करते हैं।
नियम
आषाढ़ शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।