Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में देवशयनी एकादशी 1932 बुध 13 जुलाई या गुरु 14 जुलाई
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में देवशयनी एकादशी 1932 कब है?
स्मार्त
बुधवार 13 जुलाई
वैष्णव
गुरुवार 14 जुलाई
आषाढ़ शुक्ल एकादशी
Ipameri में बुध 13 जुलाई का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · गुरुवार 14 जुलाई
वैष्णव · शुक्रवार 15 जुलाई
देवशयनी एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- बुधवार 13 जुलाई
-
06:43व्रत आरंभसूर्योदय पर
- गुरुवार 14 जुलाई
-
08:55–17:53पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- गुरुवार 14 जुलाई
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06:43व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शुक्रवार 15 जुलाई
-
06:43–17:53पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में देवशयनी एकादशी बुध 13 जुलाई या गुरु 14 जुलाई को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में देवशयनी एकादशी बुध 13 जुलाई को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव गुरु 14 जुलाई को व्रत रखते हैं।
दशमी 06:12 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 06:12 से 03:35 गुरु तक।
एकादशी 03:35 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 06:12 बुध से 03:35 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल बुध 13 जुलाई को सूर्योदय पर है, 06:43: बुध 13 जुलाई।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। बुध 13 जुलाई को दशमी 06:12 तक है, अरुणोदय (05:07–06:43) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 03:35 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव गुरु 14 जुलाई को व्रत रखते हैं: गुरु 14 जुलाई।
व्रत का पारण
स्मार्त · गुरु 14 जुलाई, 08:55–17:53 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 14 जुलाई 03:35 से शुक्र 15 जुलाई 00:56 तक है; हरिवासर 08:55 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:53) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:57 तक, करते हैं।
वैष्णव · शुक्र 15 जुलाई, 06:43–17:53 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी शुक्र 15 जुलाई को 00:56 पर, रात में, अरुणोदय (05:07) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:43) से सूर्यास्त (17:53) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
आषाढ़ शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।