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Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में देवशयनी एकादशी 1921 पारण समय 04:42⁠–⁠19:29, शनि 16 जुलाई

व्रत · समय UTC+3 में

Sevan में देवशयनी एकादशी 1921 कब है?

शुक्रवार 15 जुलाई

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Sevan में शुक्र 15 जुलाई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शनिवार 16 जुलाई

पारण समय
04:42–19:29
14 घं 47 मि · Tithika की परिपाटी

देवशयनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शुक्रवार 15 जुलाई
  • 04:41व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शनिवार 16 जुलाई
  • 04:42–19:29पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंदेवशयनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Sevan में देवशयनी एकादशी शुक्र 15 जुलाई को क्यों है?

देवशयनी एकादशी शुक्र 15 जुलाई को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 19:03 गुरु से 19:58 तक।

एकादशी 19:58 शुक्र पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शुक्र 15 जुलाई को सूर्योदय पर है, 04:39: शुक्र 15 जुलाई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 19:03 गुरु पर, उससे (03:03–04:39) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शनि 16 जुलाई, 04:42–19:29 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 15 जुलाई 19:58 से शनि 16 जुलाई 21:18 तक है; हरिवासर 02:18 पर पूरा होता है। इसलिए पारण शनि 16 जुलाई को सूर्योदय (04:40) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:27) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 07:37 तक, करते हैं।

नियम

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।