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Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में देवशयनी एकादशी 1920 पारण समय 08:35⁠–⁠19:34, रवि 27 जून

व्रत · समय UTC+3 में

Sevan में देवशयनी एकादशी 1920 कब है?

शनिवार 26 जून

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Sevan में शनि 26 जून का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

रविवार 27 जून

पारण समय
08:35–19:34
10 घं 59 मि · Tithika की परिपाटी

देवशयनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शनिवार 26 जून
  • 04:30व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • रविवार 27 जून
  • 08:35–19:34पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंदेवशयनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Sevan में देवशयनी एकादशी शनि 26 जून को क्यों है?

देवशयनी एकादशी शनि 26 जून को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 00:03 से 01:59 रवि तक।

एकादशी 01:59 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 00:03 शनि से 01:59 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 26 जून को सूर्योदय पर है, 04:28: शनि 26 जून। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 00:03 पर, उससे (02:52–04:28) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · रवि 27 जून, 08:35–19:34 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 27 जून 01:59 से सोम 28 जून 04:15 तक है; हरिवासर 08:33 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:32) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 07:29 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

नियम

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।