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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में देवशयनी एकादशी 1903 पारण समय 06:44⁠–⁠08:40, सोम 6 जुलाई

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में देवशयनी एकादशी 1903 कब है?

रविवार 5 जुलाई

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में रवि 5 जुलाई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

सोमवार 6 जुलाई

पारण समय
06:44–08:40
1 घं 56 मि

देवशयनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • रविवार 5 जुलाई
  • 06:44व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • सोमवार 6 जुलाई
  • 06:44–08:40पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंदेवशयनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में देवशयनी एकादशी रवि 5 जुलाई को क्यों है?

देवशयनी एकादशी रवि 5 जुलाई को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।

दशमी 06:04 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 06:04 से 07:07 रवि तक।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 06:04 शनि से 07:07 तक।

द्वादशी: 07:07 रवि से 08:34 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, शनि 4 जुलाई को 06:37 और रवि 5 जुलाई को 06:37। एकादशी (शनि 4 जुलाई 06:04 से रवि 5 जुलाई 07:07 तक) और द्वादशी (रवि 5 जुलाई 07:07 से सोम 6 जुलाई 08:34 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: रवि 5 जुलाई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: शनि 4 जुलाई को दशमी 06:04 तक है, उसके भीतर (05:01–06:37); रवि 5 जुलाई को पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · सोम 6 जुलाई, 06:44–08:40

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 5 जुलाई 07:07 से सोम 6 जुलाई 08:34 तक है; हरिवासर 13:28 रवि पर पूरा होता है। इसलिए पारण सोम 6 जुलाई को सूर्योदय (06:37) से होता है।

नियम

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।