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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में अपरा एकादशी 2027 पारण समय 06:52⁠–⁠17:44, मंगल 1 जून

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में अपरा एकादशी 2027 कब है?

सोमवार 31 मई

ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · वैशाख कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में सोम 31 मई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

मंगलवार 1 जून

पारण समय
06:52–17:44
10 घं 52 मि · Tithika की परिपाटी

अपरा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • सोमवार 31 मई
  • 06:36व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • मंगलवार 1 जून
  • 06:52–17:44पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंअपरा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में अपरा एकादशी सोम 31 मई को क्यों है?

अपरा एकादशी सोम 31 मई को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 01:32 से 01:10 मंगल तक।

एकादशी 01:10 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल सोम 31 मई को सूर्योदय पर है, 06:36: सोम 31 मई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 01:32 पर, उससे (05:00–06:36) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · मंगल 1 जून, 06:52–17:44 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 1 जून 01:10 से मंगल 1 जून 23:59 तक है; हरिवासर 06:52 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:44) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:50 तक, करते हैं।

नियम

ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · वैशाख कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।