tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में अपरा एकादशी 2026 मंगल 12 मई या बुध 13 मई

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में अपरा एकादशी 2026 कब है?

स्मार्त

मंगलवार 12 मई

वैष्णव

बुधवार 13 मई

ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · वैशाख कृष्ण एकादशी (अमान्त)

Ipameri में मंगल 12 मई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · बुधवार 13 मई

पारण समय
10:28–17:48
7 घं 20 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · गुरुवार 14 मई

पारण समय
06:30–17:47
11 घं 17 मि · Tithika की परिपाटी

अपरा एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • मंगलवार 12 मई
  • 06:29व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 13 मई
  • 10:28–17:48पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • बुधवार 13 मई
  • 06:29व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • गुरुवार 14 मई
  • 06:30–17:47पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंअपरा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में अपरा एकादशी मंगल 12 मई या बुध 13 मई को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में अपरा एकादशी मंगल 12 मई को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव बुध 13 मई को व्रत रखते हैं।

दशमी 06:22 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 06:22 से 05:00 बुध तक।

अरुणोदय में एकादशी केवल 05:00 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 06:22 मंगल से 05:00 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 12 मई को सूर्योदय पर है, 06:29: मंगल 12 मई।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। मंगल 12 मई को दशमी 06:22 तक है, अरुणोदय (04:53–06:29) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 05:00 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव बुध 13 मई को व्रत रखते हैं: बुध 13 मई।

व्रत का पारण

स्मार्त · बुध 13 मई, 10:28–17:48 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 13 मई 05:00 से गुरु 14 मई 02:51 तक है; हरिवासर 10:28 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:48) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:45 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

वैष्णव · गुरु 14 मई, 06:30–17:47 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)

द्वादशी गुरु 14 मई को 02:51 पर, रात में, अरुणोदय (04:54) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:30) से सूर्यास्त (17:47) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।

नियम

ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · वैशाख कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।