Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में अपरा एकादशी 2047 पारण समय 06:32–10:37, मंगल 21 मई
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में अपरा एकादशी 2047 कब है?
सोमवार 20 मई
ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · वैशाख कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में सोम 20 मई का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
मंगलवार 21 मई
अपरा एकादशी का समय: व्रत, पारण
- सोमवार 20 मई
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06:32व्रत आरंभसूर्योदय पर
- मंगलवार 21 मई
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06:32–10:37पारण समयव्रत खोलने का समय
Ipameri में अपरा एकादशी सोम 20 मई को क्यों है?
अपरा एकादशी सोम 20 मई को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।
दशमी 05:52 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:52 से 08:10 सोम तक।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:52 रवि से 08:10 तक।
द्वादशी: 08:10 सोम से 10:37 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, रवि 19 मई को 06:31 और सोम 20 मई को 06:32। एकादशी (रवि 19 मई 05:52 से सोम 20 मई 08:10 तक) और द्वादशी (सोम 20 मई 08:10 से मंगल 21 मई 10:37 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: सोम 20 मई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: रवि 19 मई को दशमी 05:52 तक है, उसके भीतर (04:55–06:31); सोम 20 मई को पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · मंगल 21 मई, 06:32–10:37
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 20 मई 08:10 से मंगल 21 मई 10:37 तक है; हरिवासर 14:47 सोम पर पूरा होता है। इसलिए पारण मंगल 21 मई को सूर्योदय (06:32) से होता है।
नियम
ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · वैशाख कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।