Pāthardi, महाराष्ट्र में अपरा एकादशी 2024 रवि 2 जून या सोम 3 जून
महाराष्ट्र, भारत
व्रत · समय IST में
Pāthardi में अपरा एकादशी 2024 कब है?
स्मार्त
रविवार 2 जून
वैष्णव
सोमवार 3 जून
ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · वैशाख कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Pāthardi में रवि 2 जून का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · सोमवार 3 जून
वैष्णव · मंगलवार 4 जून
अपरा एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- रविवार 2 जून
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05:50व्रत आरंभसूर्योदय पर
- सोमवार 3 जून
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08:06–19:04पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- सोमवार 3 जून
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05:50व्रत आरंभसूर्योदय पर
- मंगलवार 4 जून
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05:50–19:04पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Pāthardi में अपरा एकादशी रवि 2 जून या सोम 3 जून को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में अपरा एकादशी रवि 2 जून को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव सोम 3 जून को व्रत रखते हैं।
दशमी 05:05 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:05 से 02:41 सोम तक।
एकादशी 02:41 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 05:05 रवि से 02:41 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 2 जून को सूर्योदय पर है, 05:50: रवि 2 जून।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। रवि 2 जून को दशमी 05:05 तक है, अरुणोदय (04:14–05:50) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 02:41 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव सोम 3 जून को व्रत रखते हैं: सोम 3 जून।
व्रत का पारण
स्मार्त · सोम 3 जून, 08:06–19:04 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 3 जून 02:41 से मंगल 4 जून 00:19 तक है; हरिवासर 08:06 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:04) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:29 तक, करते हैं।
वैष्णव · मंगल 4 जून, 05:50–19:04 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी मंगल 4 जून को 00:19 पर, रात में, अरुणोदय (04:14) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (05:50) से सूर्यास्त (19:04) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · वैशाख कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।