tithika
English

Pāthardi, महाराष्ट्र में अपरा एकादशी 2023 पारण समय 06:41⁠–⁠18:57, मंगल 16 मई

महाराष्ट्र, भारत

व्रत · समय IST में

Pāthardi में अपरा एकादशी 2023 कब है?

सोमवार 15 मई

ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · वैशाख कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Pāthardi में सोम 15 मई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

मंगलवार 16 मई

पारण समय
06:41–18:57
12 घं 16 मि · Tithika की परिपाटी

अपरा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • सोमवार 15 मई
  • 05:54व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • मंगलवार 16 मई
  • 06:41–18:57पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंअपरा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Pāthardi में अपरा एकादशी सोम 15 मई को क्यों है?

अपरा एकादशी सोम 15 मई को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 02:46 से 01:03 मंगल तक।

एकादशी 01:03 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 02:46 सोम से 01:03 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल सोम 15 मई को सूर्योदय पर है, 05:54: सोम 15 मई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 02:46 पर, उससे (04:18–05:54) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · मंगल 16 मई, 06:41–18:57 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 16 मई 01:03 से मंगल 16 मई 23:36 तक है; हरिवासर 06:41 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:57) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:30 तक, करते हैं।

नियम

ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · वैशाख कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।