tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में अपरा एकादशी 1999 पारण समय 06:29⁠–⁠17:48, बुध 12 मई

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में अपरा एकादशी 1999 कब है?

मंगलवार 11 मई

ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · वैशाख कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में मंगल 11 मई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

बुधवार 12 मई

पारण समय
06:29–17:48
11 घं 19 मि · Tithika की परिपाटी

अपरा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • मंगलवार 11 मई
  • 06:29व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 12 मई
  • 06:29–17:48पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंअपरा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में अपरा एकादशी मंगल 11 मई को क्यों है?

अपरा एकादशी मंगल 11 मई को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 00:50 से 22:47 तक।

एकादशी 22:47 मंगल पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 11 मई को सूर्योदय पर है, 06:29: मंगल 11 मई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 00:50 पर, उससे (04:53–06:29) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · बुध 12 मई, 06:29–17:48 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 11 मई 22:47 से बुध 12 मई 20:01 तक है; हरिवासर 04:05 पर पूरा होता है। इसलिए पारण बुध 12 मई को सूर्योदय (06:29) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:48) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:45 तक, करते हैं।

नियम

ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · वैशाख कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।