Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में अपरा एकादशी 1998 गुरु 21 मई या शुक्र 22 मई
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में अपरा एकादशी 1998 कब है?
स्मार्त
गुरुवार 21 मई
वैष्णव
शुक्रवार 22 मई
ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · वैशाख कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में गुरु 21 मई का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · शुक्रवार 22 मई
वैष्णव · शनिवार 23 मई
अपरा एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- गुरुवार 21 मई
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06:32व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शुक्रवार 22 मई
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10:50–17:45पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- शुक्रवार 22 मई
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06:32व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शनिवार 23 मई
-
06:33–17:45पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में अपरा एकादशी गुरु 21 मई या शुक्र 22 मई को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में अपरा एकादशी गुरु 21 मई को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव शुक्र 22 मई को व्रत रखते हैं।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 08:27 से। एकादशी: 08:27 से 05:37 शुक्र तक।
अरुणोदय में एकादशी केवल 05:37 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 08:27 गुरु से 05:37 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह गुरु 21 मई को 08:27 पर, उस सूर्योदय (06:32) के बाद, लगती है और शुक्र 22 मई को 05:37 पर, अगले सूर्योदय (06:32 शुक्र) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: गुरु 21 मई।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। गुरु 21 मई को अरुणोदय (04:56–06:32) में दशमी है। शुक्र 22 मई को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 05:37 तक, फिर द्वादशी): शुक्र 22 मई।
व्रत का पारण
स्मार्त · शुक्र 22 मई, 10:50–17:45 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 22 मई 05:37 से शनि 23 मई 02:28 तक है; हरिवासर 10:50 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:45) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:47 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · शनि 23 मई, 06:33–17:45 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी शनि 23 मई को 02:28 पर, रात में, अरुणोदय (04:57) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:33) से सूर्यास्त (17:45) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · वैशाख कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।