tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में अपरा एकादशी 1989 मंगल 30 मई या बुध 31 मई

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में अपरा एकादशी 1989 कब है?

स्मार्त

मंगलवार 30 मई

वैष्णव

बुधवार 31 मई

ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · वैशाख कृष्ण एकादशी (अमान्त)

Ipameri में मंगल 30 मई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · बुधवार 31 मई

पारण समय
09:51–17:44
7 घं 53 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · गुरुवार 1 जून

पारण समय
06:36–17:44
11 घं 8 मि · Tithika की परिपाटी

अपरा एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • मंगलवार 30 मई
  • 06:35व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 31 मई
  • 09:51–17:44पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • बुधवार 31 मई
  • 06:36व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • गुरुवार 1 जून
  • 06:36–17:44पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंअपरा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में अपरा एकादशी मंगल 30 मई या बुध 31 मई को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में अपरा एकादशी मंगल 30 मई को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव बुध 31 मई को व्रत रखते हैं।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 07:24 से। एकादशी: 07:24 से 04:36 बुध तक।

एकादशी 04:36 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 07:24 मंगल से 04:36 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह मंगल 30 मई को 07:24 पर, उस सूर्योदय (06:35) के बाद, लगती है और बुध 31 मई को 04:36 पर, अगले सूर्योदय (06:36 बुध) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: मंगल 30 मई।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। मंगल 30 मई को अरुणोदय (04:59–06:35) में दशमी है। बुध 31 मई को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 04:36 तक, फिर द्वादशी): बुध 31 मई।

व्रत का पारण

स्मार्त · बुध 31 मई, 09:51–17:44 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 31 मई 04:36 से गुरु 1 जून 01:37 तक है; हरिवासर 09:51 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:44) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:49 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

वैष्णव · गुरु 1 जून, 06:36–17:44 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)

द्वादशी गुरु 1 जून को 01:37 पर, रात में, अरुणोदय (05:00) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:36) से सूर्यास्त (17:44) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।

नियम

ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · वैशाख कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।