tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में अपरा एकादशी 1988 बुध 11 मई या गुरु 12 मई

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में अपरा एकादशी 1988 कब है?

स्मार्त

बुधवार 11 मई

वैष्णव

गुरुवार 12 मई

ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · वैशाख कृष्ण एकादशी (अमान्त)

Ipameri में बुध 11 मई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · गुरुवार 12 मई

पारण समय
08:07–17:48
9 घं 41 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · शुक्रवार 13 मई

पारण समय
06:29–17:48
11 घं 19 मि · Tithika की परिपाटी

अपरा एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • बुधवार 11 मई
  • 06:29व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • गुरुवार 12 मई
  • 08:07–17:48पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • गुरुवार 12 मई
  • 06:29व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 13 मई
  • 06:29–17:48पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंअपरा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में अपरा एकादशी बुध 11 मई या गुरु 12 मई को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में अपरा एकादशी बुध 11 मई को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव गुरु 12 मई को व्रत रखते हैं।

दशमी 04:53 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:53 से 02:40 गुरु तक।

एकादशी 02:40 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 04:53 बुध से 02:40 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल बुध 11 मई को सूर्योदय पर है, 06:29: बुध 11 मई।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। बुध 11 मई को दशमी 04:53 तक है, अरुणोदय (04:53–06:29) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 02:40 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव गुरु 12 मई को व्रत रखते हैं: गुरु 12 मई।

व्रत का पारण

स्मार्त · गुरु 12 मई, 08:07–17:48 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 12 मई 02:40 से शुक्र 13 मई 00:30 तक है; हरिवासर 08:07 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:48) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:45 तक, करते हैं।

वैष्णव · शुक्र 13 मई, 06:29–17:48 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)

द्वादशी शुक्र 13 मई को 00:30 पर, रात में, अरुणोदय (04:53) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:29) से सूर्यास्त (17:48) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।

नियम

ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · वैशाख कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।