tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में आमलकी एकादशी 2002 रवि 24 मार्च या सोम 25 मार्च

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में आमलकी एकादशी 2002 कब है?

स्मार्त

रविवार 24 मार्च

वैष्णव

सोमवार 25 मार्च

फाल्गुन शुक्ल एकादशी

Ipameri में रवि 24 मार्च का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · सोमवार 25 मार्च

पारण समय
11:05–18:19
7 घं 14 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · मंगलवार 26 मार्च

पारण समय
06:17–18:18
12 घं 1 मि · Tithika की परिपाटी

आमलकी एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • रविवार 24 मार्च
  • 06:17व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • सोमवार 25 मार्च
  • 11:05–18:19पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • सोमवार 25 मार्च
  • 06:17व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • मंगलवार 26 मार्च
  • 06:17–18:18पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंआमलकी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में आमलकी एकादशी रवि 24 मार्च या सोम 25 मार्च को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में आमलकी एकादशी रवि 24 मार्च को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव सोम 25 मार्च को व्रत रखते हैं।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 08:23 से। एकादशी: 08:23 से 05:52 सोम तक।

अरुणोदय में एकादशी केवल 05:52 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 08:23 रवि से 05:52 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह रवि 24 मार्च को 08:23 पर, उस सूर्योदय (06:17) के बाद, लगती है और सोम 25 मार्च को 05:52 पर, अगले सूर्योदय (06:17 सोम) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: रवि 24 मार्च।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। रवि 24 मार्च को अरुणोदय (04:41–06:17) में दशमी है। सोम 25 मार्च को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 05:52 तक, फिर द्वादशी): सोम 25 मार्च।

व्रत का पारण

स्मार्त · सोम 25 मार्च, 11:05–18:19 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 25 मार्च 05:52 से मंगल 26 मार्च 02:45 तक है; हरिवासर 11:05 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:19) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:42 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

वैष्णव · मंगल 26 मार्च, 06:17–18:18 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)

द्वादशी मंगल 26 मार्च को 02:45 पर, रात में, अरुणोदय (04:41) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:17) से सूर्यास्त (18:18) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।

नियम

फाल्गुन शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।