Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में आमलकी एकादशी 2001 सोम 5 मार्च या मंगल 6 मार्च
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में आमलकी एकादशी 2001 कब है?
स्मार्त
सोमवार 5 मार्च
वैष्णव
मंगलवार 6 मार्च
फाल्गुन शुक्ल एकादशी
Ipameri में सोम 5 मार्च का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · मंगलवार 6 मार्च
वैष्णव · बुधवार 7 मार्च
आमलकी एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- सोमवार 5 मार्च
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06:13व्रत आरंभसूर्योदय पर
- मंगलवार 6 मार्च
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09:03–18:34पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- मंगलवार 6 मार्च
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06:13व्रत आरंभसूर्योदय पर
- बुधवार 7 मार्च
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06:13–18:33पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में आमलकी एकादशी सोम 5 मार्च या मंगल 6 मार्च को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में आमलकी एकादशी सोम 5 मार्च को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव मंगल 6 मार्च को व्रत रखते हैं।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 06:33 से। एकादशी: 06:33 से 03:50 मंगल तक।
एकादशी 03:50 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 06:33 सोम से 03:50 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह सोम 5 मार्च को 06:33 पर, उस सूर्योदय (06:13) के बाद, लगती है और मंगल 6 मार्च को 03:50 पर, अगले सूर्योदय (06:13 मंगल) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: सोम 5 मार्च।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। सोम 5 मार्च को अरुणोदय (04:37–06:13) में दशमी है। मंगल 6 मार्च को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 03:50 तक, फिर द्वादशी): मंगल 6 मार्च।
व्रत का पारण
स्मार्त · मंगल 6 मार्च, 09:03–18:34 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 6 मार्च 03:50 से बुध 7 मार्च 00:44 तक है; हरिवासर 09:03 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:34) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:41 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · बुध 7 मार्च, 06:13–18:33 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी बुध 7 मार्च को 00:44 पर, रात में, अरुणोदय (04:37) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:13) से सूर्यास्त (18:33) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
फाल्गुन शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।