tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में अजा एकादशी 2049 पारण समय 06:25⁠–⁠18:04, मंगल 24 अगस्त

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में अजा एकादशी 2049 कब है?

सोमवार 23 अगस्त

भाद्रपद कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · श्रावण कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में सोम 23 अगस्त का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

मंगलवार 24 अगस्त

पारण समय
06:25–18:04
11 घं 39 मि · Tithika की परिपाटी

अजा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • सोमवार 23 अगस्त
  • 06:26व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • मंगलवार 24 अगस्त
  • 06:25–18:04पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंअजा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में अजा एकादशी सोम 23 अगस्त को क्यों है?

अजा एकादशी सोम 23 अगस्त को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 20:35 रवि से 23:01 तक।

एकादशी 23:01 सोम पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल सोम 23 अगस्त को सूर्योदय पर है, 06:26: सोम 23 अगस्त। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 20:35 रवि पर, उससे (04:50–06:26) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · मंगल 24 अगस्त, 06:25–18:04 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 23 अगस्त 23:01 से बुध 25 अगस्त 01:34 तक है; हरिवासर 05:39 पर पूरा होता है। इसलिए पारण मंगल 24 अगस्त को सूर्योदय (06:25) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:04) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:45 तक, करते हैं।

नियम

भाद्रपद कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · श्रावण कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।