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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में अजा एकादशी 2048 पारण समय 07:26⁠–⁠18:06, शुक्र 4 सितंबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में अजा एकादशी 2048 कब है?

गुरुवार 3 सितंबर

भाद्रपद कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · श्रावण कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में गुरु 3 सितंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शुक्रवार 4 सितंबर

पारण समय
07:26–18:06
10 घं 40 मि · Tithika की परिपाटी

अजा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • गुरुवार 3 सितंबर
  • 06:17व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 4 सितंबर
  • 07:26–18:06पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंअजा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में अजा एकादशी गुरु 3 सितंबर को क्यों है?

अजा एकादशी गुरु 3 सितंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 22:59 बुध से 01:03 शुक्र तक।

एकादशी 01:03 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 3 सितंबर को सूर्योदय पर है, 06:17: गुरु 3 सितंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 22:59 बुध पर, उससे (04:41–06:17) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 4 सितंबर, 07:26–18:06 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 4 सितंबर 01:03 से शनि 5 सितंबर 02:34 तक है; हरिवासर 07:26 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:06) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:38 तक, करते हैं।

नियम

भाद्रपद कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · श्रावण कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।