वापी, गुजरात का पंचांग गुरु 5 अक्टूबर 2017
गुजरात, भारत
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय IST में
त्योहार
शरद पूर्णिमा
शरद पूर्णिमा गुरु 5 अक्टूबर को है: उस रात पूर्णिमा निशीथ काल को छूती है, और किसी रात नहीं। गुरु 5 अक्टूबर क्यों?
शरद पूर्णिमा: वापी में हर तारीख़व्रत
पूर्णिमा
पूर्णिमा गुरु 5 अक्टूबर को है: उस दिन सूर्योदय पर पूर्णिमा है। गुरु 5 अक्टूबर क्यों?
पूर्णिमा: वापी में हर तारीख़5 अक्टूबर का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, गुरु 5 अक्टूबर
- 04:53–05:41ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:30 से
- 06:30–07:59शुभ चौघड़ियायमगण्ड में
- 12:02–12:50अभिजीत मुहूर्त
- 12:26–13:55लाभ चौघड़िया
- 13:55–15:24अमृत चौघड़ियाराहु काल में
-
16:11–17:44अमृत कालउत्तर भाद्रपद में
- 16:53–18:22शुभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 18:22 के बाद
- 18:22–19:53अमृत चौघड़िया
- 00:26–01:57 शुक्रलाभ चौघड़िया
- 03:28–04:59 शुक्रशुभ चौघड़िया
- 04:59–06:30 शुक्रअमृत चौघड़िया
- 04:53–05:42 शुक्रअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:30–07:59शुभयमगण्ड में
- 07:59–09:28रोगअशुभ
- 09:28–10:57उद्वेगअशुभ
- 10:57–12:26चरसामान्य
- 12:26–13:55लाभशुभ
- 13:55–15:24अमृतराहु काल में
- 15:24–16:53कालअशुभ
- 16:53–18:22शुभ
रात का चौघड़िया
- 18:22–19:53अमृतशुभ
- 19:53–21:24चरसामान्य
- 21:24–22:55रोगअशुभ
- 22:55–00:26 शुक्रकालअशुभ
- 00:26–01:57 शुक्रलाभशुभ
- 01:57–03:28 शुक्रउद्वेगअशुभ
- 03:28–04:59 शुक्रशुभ
- 04:59–06:30 शुक्रअमृतशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, गुरु 5 अक्टूबर: ब्रह्म मुहूर्त, 04:53–05:41, शुभ
- शुभ, 06:30–07:59
- रोग, अशुभ, 07:59–09:28
- उद्वेग, अशुभ, 09:28–10:57
- चर, सामान्य, 10:57–12:26
- लाभ, शुभ, 12:26–13:55
- अमृत, शुभ, 13:55–15:24
- काल, अशुभ, 15:24–16:53
- शुभ, 16:53–18:22
- अमृत, शुभ, 18:22–19:53
- चर, सामान्य, 19:53–21:24
- रोग, अशुभ, 21:24–22:55
- काल, अशुभ, 22:55–00:26 शुक्र
- लाभ, शुभ, 00:26–01:57 शुक्र
- उद्वेग, अशुभ, 01:57–03:28 शुक्र
- शुभ, 03:28–04:59 शुक्र
- अमृत, शुभ, 04:59–06:30 शुक्र
- यमगण्ड, 06:30–07:59, अशुभ
- गुलिक काल, 09:28–10:57, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 10:27–11:15, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 12:02–12:50, शुभ
- राहु काल, 13:55–15:24, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 15:12–16:00, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:53–05:42 शुक्र
हर मान कैसे निकलता है
वापी में शरद पूर्णिमा गुरु 5 अक्टूबर को क्यों है?
शरद पूर्णिमा गुरु 5 अक्टूबर को है: उस रात पूर्णिमा निशीथ काल को छूती है, और किसी रात नहीं।
शरद पूर्णिमा की रात की पूजा निशीथ काल में होती है, आधी रात का मुहूर्त। पूर्णिमा गुरु 5 अक्टूबर को 01:47 से शुक्र 6 अक्टूबर को 00:10 तक है, इसलिए वह केवल गुरुवार की रात के निशीथ काल (00:02 शुक्र–00:51 शुक्र) को छूती है। शरद पूर्णिमा का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; निशीथ काल Tithika की परिपाटी है।
वापी में पूर्णिमा गुरु 5 अक्टूबर को क्यों है?
पूर्णिमा गुरु 5 अक्टूबर को है: उस दिन सूर्योदय पर पूर्णिमा है।
पूर्णिमा सूर्योदय की तिथि से मानी जाती है। पूर्णिमा गुरु 5 अक्टूबर को 01:47 से शुक्र 6 अक्टूबर को 00:10 तक है, इसलिए वह केवल गुरु 5 अक्टूबर के सूर्योदय (06:30) पर है। पूर्णिमा का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्योदय Tithika की परिपाटी है।
गुरु 5 अक्टूबर को कौन सी तिथि है? शुक्ल पूर्णिमा
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 170.5° आगे था: शुक्ल पूर्णिमा।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 168°–180° पंद्रहवीं है, शुक्ल पूर्णिमा। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:30। चतुर्दशी उससे पहले 01:47 पर समाप्त हुई। पूर्णिमा 00:10 शुक्र को समाप्त होगी, जब बढ़त 180° होगी। बढ़त 20 सितंबर की अमावस्या पर 0° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा बढ़ रहा है: शुक्ल पक्ष।
गुरु 5 अक्टूबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:53–05:41
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:53–05:41।
बुध 4 अक्टूबर की रात सूर्यास्त 18:23 बुध से सूर्योदय 06:30 तक थी, 12 घं 7 मि। इसे 48 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
गुरु 5 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:02–12:50
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:02–12:50।
गुरु 5 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 10:27–11:15
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:27–11:15 और 15:12–16:00।
गुरु 5 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 15:12–16:00
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:27–11:15 और 15:12–16:00।
यहाँ दिन, 06:30 से 18:22, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 47 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। गुरुवार को दुर्मुहूर्त छठा और बारहवाँ है, 10:27–11:15 और 15:12–16:00।
गुरु 5 अक्टूबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:30–07:59 शुभ है, जिसके स्वामी गुरु (बृहस्पति) हैं, गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:30 से 18:22, 1 घं 29 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 18:22 से 06:30 शुक्र, 1 घं 31 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
गुरु 5 अक्टूबर को राहुकाल कब है? 13:55–15:24
राहु काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 13:55–15:24।
गुरु 5 अक्टूबर को यमगंड कब है? 06:30–07:59
यमगण्ड गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 06:30–07:59।
गुरु 5 अक्टूबर को गुलिक काल कब है? 09:28–10:57
गुलिक काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 09:28–10:57।
यहाँ दिन 06:30 से 18:22 तक है, 11 घं 52 मि। इसे 1 घं 29 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: गुरुवार को राहु काल छठा भाग है, यमगण्ड पहला और गुलिक काल तीसरा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
गुरु 5 अक्टूबर को सूर्योदय कितने बजे है? 06:30
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:30, सूर्यास्त 18:22, 11 घं 52 मि का दिन।
गुरु 5 अक्टूबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:22
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:30, सूर्यास्त 18:22, 11 घं 52 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 52 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 8 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 52 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 8 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
गुरु 5 अक्टूबर को कौन सा नक्षत्र है? उत्तर भाद्रपद
सूर्योदय पर चंद्रमा 338.4° पर था: उत्तर भाद्रपद, पद 2।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। उत्तर भाद्रपद 333°20′–346°40′ तक है; चंद्रमा 336°40′ पर उसके पद 2 में आया। वह 20:50 को निकलेगा, रेवती में।
गुरु 5 अक्टूबर को कौन सा योग है? वृद्धि
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 506.3° थे, एक चक्कर और 146.3°: वृद्धि।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 167.9° + 338.4° = 506.3°, एक पूरा चक्कर और 146.3°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 133°20′–146°40′ ग्यारहवाँ है, वृद्धि। यह 07:09 को समाप्त होता है, फिर ध्रुव।
गुरु 5 अक्टूबर को कौन सा करण है? विष्टि
सूर्योदय पर बढ़त 170.5° थी: पूर्णिमा का पहला आधा, विष्टि।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए पूर्णिमा का पहला आधा विष्टि है और दूसरा बव। विष्टि 13:03 तक है, जब बढ़त 174° होगी; बव 00:10 शुक्र तक।
गुरु 5 अक्टूबर को कौन सा वार है, और कब से? गुरुवार
यह दिन गुरुवार को सूर्योदय, 06:30, पर शुरू हुआ: गुरुवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:30 से 06:30 शुक्र तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी गुरुवार के हैं।
गुरु 5 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? आश्विन
यह मास 20 सितंबर की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य कन्या में था: आश्विन।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: कन्या से आश्विन। सूर्य 17 अक्टूबर को, मास के भीतर, तुला में जाता है। अगली अमावस्या, 20 अक्टूबर, उसे तुला में पाती है और कार्तिक शुरू करती है।
गुरु 5 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? आश्विन
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह शुक्ल पक्ष आश्विन का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 20 सितंबर की अमावस्या ने, सूर्य कन्या में, आश्विन शुरू किया। यह शुक्ल पक्ष दोनों गणनाओं में आश्विन है।
गुरु 5 अक्टूबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2074 · शक 1939
विक्रम संवत 2074 28 मार्च 2017 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 28 मार्च 2017, 08:27 मंगल। तब से सूर्य तारों के बीच 184.4° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2074 गिनता है; शक संवत 1939।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
गुरु 5 अक्टूबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 18:21
चंद्रमा यहाँ 18:21 पर उदय होता है।
चंद्रमा 18:21 पर, दिन में, उदय होता है और अगले सूर्योदय से पहले अस्त नहीं होता।
चंद्रमा इस सूर्योदय और अगले के बीच अस्त नहीं होता।