Thazhecode, केरल का पंचांग गुरु 31 अक्टूबर 2030
केरल, भारत
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय IST में
त्योहार
छठ · संध्या अर्घ्य
छठ · संध्या अर्घ्य गुरु 31 अक्टूबर को है: उस शाम सूर्यास्त पर षष्ठी है। गुरु 31 अक्टूबर क्यों?
छठ: Thazhecode में हर तारीख़31 अक्टूबर का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, गुरु 31 अक्टूबर
- 04:39–05:28ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:17 से
- 06:17–07:45शुभ चौघड़ियायमगण्ड में
- 11:46–12:33अभिजीत मुहूर्त
- 12:09–13:37लाभ चौघड़िया
- 13:37–15:05अमृत चौघड़ियाराहु काल में
- 16:33–18:01शुभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 18:01 के बाद
- 18:01–19:33अमृत चौघड़िया
- 00:09–01:41 शुक्रलाभ चौघड़िया
- 03:13–04:45 शुक्रशुभ चौघड़िया
-
04:00–05:30 शुक्रअमृत कालपूर्वाषाढा में
- 04:45–06:17 शुक्रअमृत चौघड़िया
- 04:39–05:28 शुक्रअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:17–07:45शुभयमगण्ड में
- 07:45–09:13रोगअशुभ
- 09:13–10:41उद्वेगअशुभ
- 10:41–12:09चरसामान्य
- 12:09–13:37लाभशुभ
- 13:37–15:05अमृतराहु काल में
- 15:05–16:33कालअशुभ
- 16:33–18:01शुभ
रात का चौघड़िया
- 18:01–19:33अमृतशुभ
- 19:33–21:05चरसामान्य
- 21:05–22:37रोगअशुभ
- 22:37–00:09 शुक्रकालअशुभ
- 00:09–01:41 शुक्रलाभशुभ
- 01:41–03:13 शुक्रउद्वेगअशुभ
- 03:13–04:45 शुक्रशुभ
- 04:45–06:17 शुक्रअमृतशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, गुरु 31 अक्टूबर: ब्रह्म मुहूर्त, 04:39–05:28, शुभ
- शुभ, 06:17–07:45
- रोग, अशुभ, 07:45–09:13
- उद्वेग, अशुभ, 09:13–10:41
- चर, सामान्य, 10:41–12:09
- लाभ, शुभ, 12:09–13:37
- अमृत, शुभ, 13:37–15:05
- काल, अशुभ, 15:05–16:33
- शुभ, 16:33–18:01
- अमृत, शुभ, 18:01–19:33
- चर, सामान्य, 19:33–21:05
- रोग, अशुभ, 21:05–22:37
- काल, अशुभ, 22:37–00:09 शुक्र
- लाभ, शुभ, 00:09–01:41 शुक्र
- उद्वेग, अशुभ, 01:41–03:13 शुक्र
- शुभ, 03:13–04:45 शुक्र
- अमृत, शुभ, 04:45–06:17 शुक्र
- यमगण्ड, 06:17–07:45, अशुभ
- गुलिक काल, 09:13–10:41, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 10:12–10:59, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 11:46–12:33, शुभ
- राहु काल, 13:37–15:05, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 14:53–15:40, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:39–05:28 शुक्र
हर मान कैसे निकलता है
Thazhecode में छठ गुरु 31 अक्टूबर को क्यों है?
छठ · संध्या अर्घ्य गुरु 31 अक्टूबर को है: उस शाम सूर्यास्त पर षष्ठी है।
संध्या अर्घ्य सूर्यास्त पर दिया जाता है। षष्ठी गुरु 31 अक्टूबर को 10:25 से शुक्र 1 नवंबर को 08:04 तक है, इसलिए सूर्यास्त पर वह केवल गुरु 31 अक्टूबर को है, 18:01 पर। छठ · संध्या अर्घ्य का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्यास्त Tithika की परिपाटी है।
गुरु 31 अक्टूबर को कौन सी तिथि है? शुक्ल पञ्चमी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 57.7° आगे था: शुक्ल पञ्चमी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 48°–60° पाँचवीं है, शुक्ल पञ्चमी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:17। चतुर्थी उससे पहले 13:08 बुध पर समाप्त हुई। पञ्चमी 10:25 को समाप्त होगी, जब बढ़त 60° होगी। बढ़त 27 अक्टूबर की अमावस्या पर 0° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा बढ़ रहा है: शुक्ल पक्ष।
गुरु 31 अक्टूबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:39–05:28
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:39–05:28।
बुध 30 अक्टूबर की रात सूर्यास्त 18:01 बुध से सूर्योदय 06:17 तक थी, 12 घं 16 मि। इसे 49 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
गुरु 31 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:46–12:33
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:46–12:33।
गुरु 31 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 10:12–10:59
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:12–10:59 और 14:53–15:40।
गुरु 31 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 14:53–15:40
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:12–10:59 और 14:53–15:40।
यहाँ दिन, 06:17 से 18:01, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 46 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। गुरुवार को दुर्मुहूर्त छठा और बारहवाँ है, 10:12–10:59 और 14:53–15:40।
गुरु 31 अक्टूबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:17–07:45 शुभ है, जिसके स्वामी गुरु (बृहस्पति) हैं, गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:17 से 18:01, 1 घं 28 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 18:01 से 06:17 शुक्र, 1 घं 32 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
गुरु 31 अक्टूबर को राहुकाल कब है? 13:37–15:05
राहु काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 13:37–15:05।
गुरु 31 अक्टूबर को यमगंड कब है? 06:17–07:45
यमगण्ड गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 06:17–07:45।
गुरु 31 अक्टूबर को गुलिक काल कब है? 09:13–10:41
गुलिक काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 09:13–10:41।
यहाँ दिन 06:17 से 18:01 तक है, 11 घं 44 मि। इसे 1 घं 28 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: गुरुवार को राहु काल छठा भाग है, यमगण्ड पहला और गुलिक काल तीसरा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
गुरु 31 अक्टूबर को सूर्योदय कितने बजे है? 06:17
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:17, सूर्यास्त 18:01, 11 घं 44 मि का दिन।
गुरु 31 अक्टूबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:01
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:17, सूर्यास्त 18:01, 11 घं 44 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 44 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 16 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 44 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 16 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
गुरु 31 अक्टूबर को कौन सा नक्षत्र है? मूल
सूर्योदय पर चंद्रमा 251° पर था: मूल, पद 4।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। मूल 240°00′–253°20′ तक है; चंद्रमा 250° पर उसके पद 4 में आया। वह 10:06 को निकलेगा, पूर्वाषाढा में।
गुरु 31 अक्टूबर को कौन सा योग है? सुकर्मा
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 444.3° थे, एक चक्कर और 84.3°: सुकर्मा।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 193.3° + 251° = 444.3°, एक पूरा चक्कर और 84.3°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 80°00′–93°20′ सातवाँ है, सुकर्मा। यह 20:14 को समाप्त होता है, फिर धृति।
गुरु 31 अक्टूबर को कौन सा करण है? बालव
सूर्योदय पर बढ़त 57.7° थी: पञ्चमी का दूसरा आधा, बालव।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए पञ्चमी का पहला आधा बव है और दूसरा बालव। बव 23:44 बुध पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 54° हुई; बालव 10:25 तक है।
गुरु 31 अक्टूबर को कौन सा वार है, और कब से? गुरुवार
यह दिन गुरुवार को सूर्योदय, 06:17, पर शुरू हुआ: गुरुवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:17 से 06:17 शुक्र तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी गुरुवार के हैं।
गुरु 31 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? कार्तिक
यह मास 27 अक्टूबर की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य तुला में था: कार्तिक।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: तुला से कार्तिक। सूर्य 16 नवंबर को, मास के भीतर, वृश्चिक में जाता है। अगली अमावस्या, 25 नवंबर, उसे वृश्चिक में पाती है और मार्गशीर्ष शुरू करती है।
गुरु 31 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? कार्तिक
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह शुक्ल पक्ष कार्तिक का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 27 अक्टूबर की अमावस्या ने, सूर्य तुला में, कार्तिक शुरू किया। यह शुक्ल पक्ष दोनों गणनाओं में कार्तिक है।
गुरु 31 अक्टूबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2087 · शक 1952
विक्रम संवत 2087 3 अप्रैल 2030 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 3 अप्रैल 2030, 03:32 बुध। तब से सूर्य तारों के बीच 204.4° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2087 गिनता है; शक संवत 1952।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
गुरु 31 अक्टूबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 10:39
चंद्रमा यहाँ 10:39 पर उदय होता है।
गुरु 31 अक्टूबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 22:32
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 10:39 पर, दिन में, उदय होता है; वह फिर 22:32 पर अस्त होगा।
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 10:39 पर उदय हुआ; वह फिर 22:32 पर अस्त होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रास्त रात में पड़ता है।