Thazhecode, केरल का पंचांग शुक्र 1 मार्च 2030
केरल, भारत
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय IST में
व्रत
प्रदोष व्रत
प्रदोष व्रत शुक्र 1 मार्च को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं। शुक्र 1 मार्च क्यों?
प्रदोष व्रत: Thazhecode में हर तारीख़व्रत का पारण
विजया एकादशी
1 मार्च का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, शुक्र 1 मार्च
- 05:04–05:52ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:41 से
- 08:10–09:39लाभ चौघड़ियागुलिक काल में
- 09:51–11:09अमृत चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 12:38–13:02अभिजीत मुहूर्तराहु काल छोड़कर
- 12:38–13:02शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 13:49–14:07शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- सूर्यास्त 18:35 के बाद
- 21:36–23:07लाभ चौघड़िया
- 00:38–02:08 शनिशुभ चौघड़िया
-
01:48–03:24 शनिअमृत कालश्रवण में
- 02:08–03:39 शनिअमृत चौघड़िया
- 05:03–05:52 शनिअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:41–08:10चरसामान्य
- 08:10–09:39लाभगुलिक काल में
- 09:39–11:09अमृतशुभ
- 11:09–12:38कालअशुभ
- 12:38–14:07शुभ
- 14:07–15:37रोगअशुभ
- 15:37–17:06उद्वेगअशुभ
- 17:06–18:35चरसामान्य
रात का चौघड़िया
- 18:35–20:06रोगअशुभ
- 20:06–21:36कालअशुभ
- 21:36–23:07लाभशुभ
- 23:07–00:38 शनिउद्वेगअशुभ
- 00:38–02:08 शनिशुभ
- 02:08–03:39 शनिअमृतशुभ
- 03:39–05:09 शनिचरसामान्य
- 05:09–06:40 शनिरोगअशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, शुक्र 1 मार्च: ब्रह्म मुहूर्त, 05:04–05:52, शुभ
- चर, सामान्य, 06:41–08:10
- लाभ, शुभ, 08:10–09:39
- अमृत, शुभ, 09:39–11:09
- काल, अशुभ, 11:09–12:38
- शुभ, 12:38–14:07
- रोग, अशुभ, 14:07–15:37
- उद्वेग, अशुभ, 15:37–17:06
- चर, सामान्य, 17:06–18:35
- रोग, अशुभ, 18:35–20:06
- काल, अशुभ, 20:06–21:36
- लाभ, शुभ, 21:36–23:07
- उद्वेग, अशुभ, 23:07–00:38 शनि
- शुभ, 00:38–02:08 शनि
- अमृत, शुभ, 02:08–03:39 शनि
- चर, सामान्य, 03:39–05:09 शनि
- रोग, अशुभ, 05:09–06:40 शनि
- गुलिक काल, 08:10–09:39, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 09:04–09:51, अशुभ
- राहु काल, 11:09–12:38, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 12:14–13:02, शुभ
- दुर्मुहूर्त, 13:02–13:49, अशुभ
- यमगण्ड, 15:37–17:06, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 05:03–05:52 शनि
हर मान कैसे निकलता है
Thazhecode में प्रदोष व्रत शुक्र 1 मार्च को क्यों है?
प्रदोष व्रत शुक्र 1 मार्च को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं।
प्रदोष की शिव पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। त्रयोदशी शुक्र 1 मार्च को 13:05 से शनि 2 मार्च को 12:23 तक है, इसलिए केवल शुक्रवार का प्रदोष काल (18:35–21:00) उसके भीतर है। प्रदोष व्रत का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; प्रदोष काल Tithika की परिपाटी है।
शुक्र 1 मार्च को कौन सी तिथि है? कृष्ण द्वादशी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 320.7° आगे था: कृष्ण द्वादशी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 312°–324° सत्ताईसवीं है, कृष्ण द्वादशी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:41। एकादशी उससे पहले 14:05 गुरु पर समाप्त हुई। द्वादशी 13:05 को समाप्त होगी, जब बढ़त 324° होगी। बढ़त 18 फ़रवरी की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
शुक्र 1 मार्च को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 05:04–05:52
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 05:04–05:52।
गुरु 28 फ़रवरी की रात सूर्यास्त 18:35 गुरु से सूर्योदय 06:41 तक थी, 12 घं 6 मि। इसे 48 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
शुक्र 1 मार्च को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:14–13:02
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:14–13:02।
शुक्र 1 मार्च को दुर्मुहूर्त कब है? 09:04–09:51
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा और नौवाँ है: 09:04–09:51 और 13:02–13:49।
शुक्र 1 मार्च को दुर्मुहूर्त कब है? 13:02–13:49
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा और नौवाँ है: 09:04–09:51 और 13:02–13:49।
यहाँ दिन, 06:41 से 18:35, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 47 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। शुक्रवार को दुर्मुहूर्त चौथा और नौवाँ है, 09:04–09:51 और 13:02–13:49।
शुक्र 1 मार्च का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:41–08:10 चर है, जिसके स्वामी शुक्र हैं, शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, सामान्य माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:41 से 18:35, 1 घं 29 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 18:35 से 06:40 शनि, 1 घं 30 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
शुक्र 1 मार्च को राहुकाल कब है? 11:09–12:38
राहु काल शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से चौथा है: 11:09–12:38।
शुक्र 1 मार्च को यमगंड कब है? 15:37–17:06
यमगण्ड शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 15:37–17:06।
शुक्र 1 मार्च को गुलिक काल कब है? 08:10–09:39
गुलिक काल शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से दूसरा है: 08:10–09:39।
यहाँ दिन 06:41 से 18:35 तक है, 11 घं 54 मि। इसे 1 घं 29 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: शुक्रवार को राहु काल चौथा भाग है, यमगण्ड सातवाँ और गुलिक काल दूसरा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
शुक्र 1 मार्च को सूर्योदय कितने बजे है? 06:41
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:41, सूर्यास्त 18:35, 11 घं 54 मि का दिन।
शुक्र 1 मार्च को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:35
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:41, सूर्यास्त 18:35, 11 घं 54 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 54 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 5 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 54 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 5 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
शुक्र 1 मार्च को कौन सा नक्षत्र है? उत्तराषाढा
सूर्योदय पर चंद्रमा 276.9° पर था: उत्तराषाढा, पद 4।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। उत्तराषाढा 266°40′–280°00′ तक है; चंद्रमा 276°40′ पर उसके पद 4 में आया। वह 12:14 को निकलेगा, श्रवण में।
शुक्र 1 मार्च को कौन सा योग है? वरीयान्
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 593.1° थे, एक चक्कर और 233.1°: वरीयान्।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 316.2° + 276.9° = 593.1°, एक पूरा चक्कर और 233.1°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 226°40′–240°00′ अठारहवाँ है, वरीयान्। यह 18:09 को समाप्त होता है, फिर परिघ।
शुक्र 1 मार्च को कौन सा करण है? तैतिल
सूर्योदय पर बढ़त 320.7° थी: द्वादशी का दूसरा आधा, तैतिल।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए द्वादशी का पहला आधा कौलव है और दूसरा तैतिल। कौलव 01:33 पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 318° हुई; तैतिल 13:05 तक है।
शुक्र 1 मार्च को कौन सा वार है, और कब से? शुक्रवार
यह दिन शुक्रवार को सूर्योदय, 06:41, पर शुरू हुआ: शुक्रवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:41 से 06:40 शनि तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी शुक्रवार के हैं।
शुक्र 1 मार्च को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? माघ
यह मास 2 फ़रवरी की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य मकर में था: माघ।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: मकर से माघ। सूर्य 13 फ़रवरी को, मास के भीतर, कुंभ में जाता है। अगली अमावस्या, 4 मार्च, उसे कुंभ में पाती है और फाल्गुन शुरू करती है।
शुक्र 1 मार्च को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? फाल्गुन
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष फाल्गुन का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 4 मार्च की अमावस्या, सूर्य कुंभ में, फाल्गुन शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ फाल्गुन है, और अमान्त गणना में माघ।
शुक्र 1 मार्च को कौन सा संवत है? विक्रम 2086 · शक 1951
विक्रम संवत 2086 15 मार्च 2029 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 15 मार्च 2029, 09:49 गुरु। तब से सूर्य तारों के बीच 345.6° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2086 गिनता है; शक संवत 1951।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
शुक्र 1 मार्च को चंद्रोदय कितने बजे है? 04:57 शनि
चंद्रमा यहाँ 04:57 शनि पर उदय होता है।
शुक्र 1 मार्च को चंद्रास्त कितने बजे है? 16:07
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 16:07 पर अस्त हुआ; वह फिर 04:57 शनि पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 16:07 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 04:57 शनि पर उदय होगा।