Thazhecode, केरल का पंचांग शुक्र 4 जनवरी 2030
केरल, भारत
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय IST में
व्रत
अमावस्या
अमावस्या शुक्र 4 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर अमावस्या है। शुक्र 4 जनवरी क्यों?
अमावस्या: Thazhecode में हर तारीख़4 जनवरी का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, शुक्र 4 जनवरी
- 05:06–05:56ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:46 से
- 08:12–09:38लाभ चौघड़ियागुलिक काल में
- 09:50–11:04अमृत चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 12:30–12:53अभिजीत मुहूर्तराहु काल छोड़कर
- 12:30–12:53शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 13:39–13:57शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
-
16:49–17:24अमृत कालयमगण्ड छोड़कर · पूर्वाषाढा में
- सूर्यास्त 18:15 के बाद
- 21:23–22:57लाभ चौघड़िया
- 00:31–02:04 शनिशुभ चौघड़िया
- 02:04–03:38 शनिअमृत चौघड़िया
- 05:06–05:56 शनिअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:46–08:12चरसामान्य
- 08:12–09:38लाभगुलिक काल में
- 09:38–11:04अमृतशुभ
- 11:04–12:30कालअशुभ
- 12:30–13:57शुभ
- 13:57–15:23रोगअशुभ
- 15:23–16:49उद्वेगअशुभ
- 16:49–18:15चरसामान्य
रात का चौघड़िया
- 18:15–19:49रोगअशुभ
- 19:49–21:23कालअशुभ
- 21:23–22:57लाभशुभ
- 22:57–00:31 शनिउद्वेगअशुभ
- 00:31–02:04 शनिशुभ
- 02:04–03:38 शनिअमृतशुभ
- 03:38–05:12 शनिचरसामान्य
- 05:12–06:46 शनिरोगअशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, शुक्र 4 जनवरी: ब्रह्म मुहूर्त, 05:06–05:56, शुभ
- चर, सामान्य, 06:46–08:12
- लाभ, शुभ, 08:12–09:38
- अमृत, शुभ, 09:38–11:04
- काल, अशुभ, 11:04–12:30
- शुभ, 12:30–13:57
- रोग, अशुभ, 13:57–15:23
- उद्वेग, अशुभ, 15:23–16:49
- चर, सामान्य, 16:49–18:15
- रोग, अशुभ, 18:15–19:49
- काल, अशुभ, 19:49–21:23
- लाभ, शुभ, 21:23–22:57
- उद्वेग, अशुभ, 22:57–00:31 शनि
- शुभ, 00:31–02:04 शनि
- अमृत, शुभ, 02:04–03:38 शनि
- चर, सामान्य, 03:38–05:12 शनि
- रोग, अशुभ, 05:12–06:46 शनि
- गुलिक काल, 08:12–09:38, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 09:04–09:50, अशुभ
- राहु काल, 11:04–12:30, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 12:07–12:53, शुभ
- दुर्मुहूर्त, 12:53–13:39, अशुभ
- यमगण्ड, 15:23–16:49, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 05:06–05:56 शनि
हर मान कैसे निकलता है
Thazhecode में अमावस्या शुक्र 4 जनवरी को क्यों है?
अमावस्या शुक्र 4 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर अमावस्या है।
अमावस्या सूर्योदय की तिथि से मानी जाती है। अमावस्या गुरु 3 जनवरी को 10:50 से शुक्र 4 जनवरी को 08:19 तक है, इसलिए वह केवल शुक्र 4 जनवरी के सूर्योदय (06:46) पर है। अमावस्या का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्योदय Tithika की परिपाटी है।
शुक्र 4 जनवरी को कौन सी तिथि है? कृष्ण अमावस्या
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 359.1° आगे था: कृष्ण अमावस्या।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 348°–360° तीसवीं है, कृष्ण अमावस्या। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:46। चतुर्दशी उससे पहले 10:50 गुरु पर समाप्त हुई। अमावस्या 08:19 को समाप्त होगी, जब बढ़त 360° होगी। बढ़त 21 दिसंबर की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
प्रतिपदा क्षय क्यों है?
प्रतिपदा एक सूर्योदय के बाद शुरू हुई और अगले से पहले समाप्त, इसलिए यहाँ कोई दिन प्रतिपदा नहीं होता।
दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो। प्रतिपदा 08:19 को शुरू हुई और 06:09 शनि को समाप्त, 06:46 और 06:46 शनि के सूर्योदयों के बीच। शुक्रवार को अमावस्या है और शनिवार को द्वितीया: प्रतिपदा यहाँ क्षय तिथि है।
शुक्र 4 जनवरी को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 05:06–05:56
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 05:06–05:56।
गुरु 3 जनवरी की रात सूर्यास्त 18:14 गुरु से सूर्योदय 06:46 तक थी, 12 घं 32 मि। इसे 50 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
शुक्र 4 जनवरी को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:07–12:53
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:07–12:53।
शुक्र 4 जनवरी को दुर्मुहूर्त कब है? 09:04–09:50
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा और नौवाँ है: 09:04–09:50 और 12:53–13:39।
शुक्र 4 जनवरी को दुर्मुहूर्त कब है? 12:53–13:39
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा और नौवाँ है: 09:04–09:50 और 12:53–13:39।
यहाँ दिन, 06:46 से 18:15, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 45 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। शुक्रवार को दुर्मुहूर्त चौथा और नौवाँ है, 09:04–09:50 और 12:53–13:39।
शुक्र 4 जनवरी का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:46–08:12 चर है, जिसके स्वामी शुक्र हैं, शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, सामान्य माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:46 से 18:15, 1 घं 26 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 18:15 से 06:46 शनि, 1 घं 33 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
शुक्र 4 जनवरी को राहुकाल कब है? 11:04–12:30
राहु काल शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से चौथा है: 11:04–12:30।
शुक्र 4 जनवरी को यमगंड कब है? 15:23–16:49
यमगण्ड शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 15:23–16:49।
शुक्र 4 जनवरी को गुलिक काल कब है? 08:12–09:38
गुलिक काल शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से दूसरा है: 08:12–09:38।
यहाँ दिन 06:46 से 18:15 तक है, 11 घं 29 मि। इसे 1 घं 26 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: शुक्रवार को राहु काल चौथा भाग है, यमगण्ड सातवाँ और गुलिक काल दूसरा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
शुक्र 4 जनवरी को सूर्योदय कितने बजे है? 06:46
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:46, सूर्यास्त 18:15, 11 घं 29 मि का दिन।
शुक्र 4 जनवरी को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:15
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:46, सूर्यास्त 18:15, 11 घं 29 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 29 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 31 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 29 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 31 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
शुक्र 4 जनवरी को कौन सा नक्षत्र है? पूर्वाषाढा
सूर्योदय पर चंद्रमा 258.6° पर था: पूर्वाषाढा, पद 2।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। पूर्वाषाढा 253°20′–266°40′ तक है; चंद्रमा 256°40′ पर उसके पद 2 में आया। वह 20:23 को निकलेगा, उत्तराषाढा में।
शुक्र 4 जनवरी को कौन सा योग है? ध्रुव
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 518° थे, एक चक्कर और 158°: ध्रुव।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 259.4° + 258.6° = 518°, एक पूरा चक्कर और 158°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 146°40′–160°00′ बारहवाँ है, ध्रुव। यह 09:53 को समाप्त होता है, फिर व्याघात।
शुक्र 4 जनवरी को कौन सा करण है? नाग
सूर्योदय पर बढ़त 359.1° थी: अमावस्या का दूसरा आधा, नाग।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए अमावस्या का पहला आधा चतुष्पाद है और दूसरा नाग। चतुष्पाद 21:32 गुरु पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 354° हुई; नाग 08:19 तक है।
शुक्र 4 जनवरी को कौन सा वार है, और कब से? शुक्रवार
यह दिन शुक्रवार को सूर्योदय, 06:46, पर शुरू हुआ: शुक्रवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:46 से 06:46 शनि तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी शुक्रवार के हैं।
शुक्र 4 जनवरी को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? मार्गशीर्ष
यह मास 5 दिसंबर की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य वृश्चिक में था: मार्गशीर्ष।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: वृश्चिक से मार्गशीर्ष। सूर्य 16 दिसंबर को, मास के भीतर, धनु में जाता है। अगली अमावस्या, 4 जनवरी, उसे धनु में पाती है और पौष शुरू करती है।
शुक्र 4 जनवरी को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? पौष
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष पौष का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 4 जनवरी की अमावस्या, सूर्य धनु में, पौष शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ पौष है, और अमान्त गणना में मार्गशीर्ष।
शुक्र 4 जनवरी को कौन सा संवत है? विक्रम 2086 · शक 1951
विक्रम संवत 2086 15 मार्च 2029 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 15 मार्च 2029, 09:49 गुरु। तब से सूर्य तारों के बीच 288.8° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2086 गिनता है; शक संवत 1951।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
शुक्र 4 जनवरी को चंद्रास्त कितने बजे है? 18:36
चंद्रमा यहाँ 18:36 पर अस्त होता है।
चंद्रमा इस सूर्योदय और अगले के बीच उदय नहीं होता।
चंद्रमा 18:36 पर, रात में, अस्त होता है और अगले सूर्योदय से पहले उदय नहीं होता।