Thazhecode, केरल का पंचांग गुरु 17 दिसंबर 2026
केरल, भारत
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय IST में
17 दिसंबर का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, गुरु 17 दिसंबर
- 04:57–05:47ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:37 से
- 06:37–08:03शुभ चौघड़ियायमगण्ड में
-
08:03–08:43अमृत कालयमगण्ड छोड़कर · पूर्व भाद्रपद में
- 11:59–12:44अभिजीत मुहूर्त
- 12:21–13:47लाभ चौघड़िया
- 13:47–15:14अमृत चौघड़ियाराहु काल में
- 16:40–18:06शुभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 18:06 के बाद
- 18:06–19:40अमृत चौघड़िया
- 00:22–01:56 शुक्रलाभ चौघड़िया
- 03:30–05:04 शुक्रशुभ चौघड़िया
- 05:04–06:38 शुक्रअमृत चौघड़िया
- 04:58–05:48 शुक्रअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:37–08:03शुभयमगण्ड में
- 08:03–09:29रोगअशुभ
- 09:29–10:55उद्वेगअशुभ
- 10:55–12:21चरसामान्य
- 12:21–13:47लाभशुभ
- 13:47–15:14अमृतराहु काल में
- 15:14–16:40कालअशुभ
- 16:40–18:06शुभ
रात का चौघड़िया
- 18:06–19:40अमृतशुभ
- 19:40–21:14चरसामान्य
- 21:14–22:48रोगअशुभ
- 22:48–00:22 शुक्रकालअशुभ
- 00:22–01:56 शुक्रलाभशुभ
- 01:56–03:30 शुक्रउद्वेगअशुभ
- 03:30–05:04 शुक्रशुभ
- 05:04–06:38 शुक्रअमृतशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, गुरु 17 दिसंबर: ब्रह्म मुहूर्त, 04:57–05:47, शुभ
- शुभ, 06:37–08:03
- रोग, अशुभ, 08:03–09:29
- उद्वेग, अशुभ, 09:29–10:55
- चर, सामान्य, 10:55–12:21
- लाभ, शुभ, 12:21–13:47
- अमृत, शुभ, 13:47–15:14
- काल, अशुभ, 15:14–16:40
- शुभ, 16:40–18:06
- अमृत, शुभ, 18:06–19:40
- चर, सामान्य, 19:40–21:14
- रोग, अशुभ, 21:14–22:48
- काल, अशुभ, 22:48–00:22 शुक्र
- लाभ, शुभ, 00:22–01:56 शुक्र
- उद्वेग, अशुभ, 01:56–03:30 शुक्र
- शुभ, 03:30–05:04 शुक्र
- अमृत, शुभ, 05:04–06:38 शुक्र
- यमगण्ड, 06:37–08:03, अशुभ
- गुलिक काल, 09:29–10:55, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 10:27–11:13, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 11:59–12:44, शुभ
- राहु काल, 13:47–15:14, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 15:02–15:48, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:58–05:48 शुक्र
हर मान कैसे निकलता है
गुरु 17 दिसंबर को कौन सी तिथि है? शुक्ल अष्टमी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 87.8° आगे था: शुक्ल अष्टमी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 84°–96° आठवीं है, शुक्ल अष्टमी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:37। सप्तमी उससे पहले 22:46 बुध पर समाप्त हुई। अष्टमी 23:26 को समाप्त होगी, जब बढ़त 96° होगी। बढ़त 9 दिसंबर की अमावस्या पर 0° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा बढ़ रहा है: शुक्ल पक्ष।
गुरु 17 दिसंबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:57–05:47
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:57–05:47।
बुध 16 दिसंबर की रात सूर्यास्त 18:05 बुध से सूर्योदय 06:37 तक थी, 12 घं 32 मि। इसे 50 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
गुरु 17 दिसंबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:59–12:44
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:59–12:44।
गुरु 17 दिसंबर को दुर्मुहूर्त कब है? 10:27–11:13
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:27–11:13 और 15:02–15:48।
गुरु 17 दिसंबर को दुर्मुहूर्त कब है? 15:02–15:48
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:27–11:13 और 15:02–15:48।
यहाँ दिन, 06:37 से 18:06, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 45 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। गुरुवार को दुर्मुहूर्त छठा और बारहवाँ है, 10:27–11:13 और 15:02–15:48।
गुरु 17 दिसंबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:37–08:03 शुभ है, जिसके स्वामी गुरु (बृहस्पति) हैं, गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:37 से 18:06, 1 घं 26 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 18:06 से 06:38 शुक्र, 1 घं 34 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
गुरु 17 दिसंबर को राहुकाल कब है? 13:47–15:14
राहु काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 13:47–15:14।
गुरु 17 दिसंबर को यमगंड कब है? 06:37–08:03
यमगण्ड गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 06:37–08:03।
गुरु 17 दिसंबर को गुलिक काल कब है? 09:29–10:55
गुलिक काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 09:29–10:55।
यहाँ दिन 06:37 से 18:06 तक है, 11 घं 29 मि। इसे 1 घं 26 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: गुरुवार को राहु काल छठा भाग है, यमगण्ड पहला और गुलिक काल तीसरा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
गुरु 17 दिसंबर को सूर्योदय कितने बजे है? 06:37
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:37, सूर्यास्त 18:06, 11 घं 29 मि का दिन।
गुरु 17 दिसंबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:06
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:37, सूर्यास्त 18:06, 11 घं 29 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 29 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 32 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 29 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 32 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
गुरु 17 दिसंबर को कौन सा नक्षत्र है? पूर्व भाद्रपद
सूर्योदय पर चंद्रमा 328.6° पर था: पूर्व भाद्रपद, पद 3।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। पूर्व भाद्रपद 320°00′–333°20′ तक है; चंद्रमा 326°40′ पर उसके पद 3 में आया। वह 15:30 को निकलेगा, उत्तर भाद्रपद में।
गुरु 17 दिसंबर को कौन सा योग है? सिद्धि
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 569.5° थे, एक चक्कर और 209.5°: सिद्धि।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 240.9° + 328.6° = 569.5°, एक पूरा चक्कर और 209.5°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 200°00′–213°20′ सोलहवाँ है, सिद्धि। यह 13:21 को समाप्त होता है, फिर व्यतीपात।
गुरु 17 दिसंबर को कौन सा करण है? विष्टि
सूर्योदय पर बढ़त 87.8° थी: अष्टमी का पहला आधा, विष्टि।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए अष्टमी का पहला आधा विष्टि है और दूसरा बव। विष्टि 11:12 तक है, जब बढ़त 90° होगी; बव 23:26 तक।
गुरु 17 दिसंबर को कौन सा वार है, और कब से? गुरुवार
यह दिन गुरुवार को सूर्योदय, 06:37, पर शुरू हुआ: गुरुवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:37 से 06:38 शुक्र तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी गुरुवार के हैं।
गुरु 17 दिसंबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? मार्गशीर्ष
यह मास 9 दिसंबर की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य वृश्चिक में था: मार्गशीर्ष।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: वृश्चिक से मार्गशीर्ष। सूर्य 16 दिसंबर को, मास के भीतर, धनु में जाता है। अगली अमावस्या, 8 जनवरी, उसे धनु में पाती है और पौष शुरू करती है।
गुरु 17 दिसंबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? मार्गशीर्ष
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह शुक्ल पक्ष मार्गशीर्ष का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 9 दिसंबर की अमावस्या ने, सूर्य वृश्चिक में, मार्गशीर्ष शुरू किया। यह शुक्ल पक्ष दोनों गणनाओं में मार्गशीर्ष है।
गुरु 17 दिसंबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2083 · शक 1948
विक्रम संवत 2083 19 मार्च 2026 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 19 मार्च 2026, 06:53 गुरु। तब से सूर्य तारों के बीच 266.7° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2083 गिनता है; शक संवत 1948।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
गुरु 17 दिसंबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 12:22
चंद्रमा यहाँ 12:22 पर उदय होता है।
गुरु 17 दिसंबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 00:47 शुक्र
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 12:22 पर, दिन में, उदय होता है; वह फिर 00:47 शुक्र पर अस्त होगा।
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 12:22 पर उदय हुआ; वह फिर 00:47 शुक्र पर अस्त होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रास्त रात में पड़ता है।