Thazhecode, केरल का पंचांग बुध 11 अक्टूबर 2023
केरल, भारत
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय IST में
व्रत
प्रदोष व्रत
प्रदोष व्रत बुध 11 अक्टूबर को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है। बुध 11 अक्टूबर क्यों?
प्रदोष व्रत: Thazhecode में हर तारीख़व्रत का पारण
इंदिरा एकादशी
11 अक्टूबर का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, बुध 11 अक्टूबर
- 04:38–05:26ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:14 से
- 06:14–07:44लाभ चौघड़िया
- 07:44–09:13अमृत चौघड़ियायमगण्ड में
- 10:43–12:12शुभ चौघड़ियागुलिक काल में
- 16:41–18:10लाभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 18:10 के बाद
- 19:41–21:11शुभ चौघड़िया
- 21:11–22:42अमृत चौघड़िया
- 03:13–04:44 गुरुलाभ चौघड़िया
-
04:26–06:13 गुरुअमृत कालपूर्वाफाल्गुनी में
- 04:38–05:26 गुरुअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:14–07:44लाभशुभ
- 07:44–09:13अमृतयमगण्ड में
- 09:13–10:43कालअशुभ
- 10:43–12:12शुभगुलिक काल में
- 12:12–13:42रोगअशुभ
- 13:42–15:11उद्वेगअशुभ
- 15:11–16:41चरसामान्य
- 16:41–18:10लाभशुभ
रात का चौघड़िया
- 18:10–19:41उद्वेगअशुभ
- 19:41–21:11शुभ
- 21:11–22:42अमृतशुभ
- 22:42–00:12 गुरुचरसामान्य
- 00:12–01:43 गुरुरोगअशुभ
- 01:43–03:13 गुरुकालअशुभ
- 03:13–04:44 गुरुलाभशुभ
- 04:44–06:15 गुरुउद्वेगअशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, बुध 11 अक्टूबर: ब्रह्म मुहूर्त, 04:38–05:26, शुभ
- लाभ, शुभ, 06:14–07:44
- अमृत, शुभ, 07:44–09:13
- काल, अशुभ, 09:13–10:43
- शुभ, 10:43–12:12
- रोग, अशुभ, 12:12–13:42
- उद्वेग, अशुभ, 13:42–15:11
- चर, सामान्य, 15:11–16:41
- लाभ, शुभ, 16:41–18:10
- उद्वेग, अशुभ, 18:10–19:41
- शुभ, 19:41–21:11
- अमृत, शुभ, 21:11–22:42
- चर, सामान्य, 22:42–00:12 गुरु
- रोग, अशुभ, 00:12–01:43 गुरु
- काल, अशुभ, 01:43–03:13 गुरु
- लाभ, शुभ, 03:13–04:44 गुरु
- उद्वेग, अशुभ, 04:44–06:15 गुरु
- यमगण्ड, 07:44–09:13, अशुभ
- गुलिक काल, 10:43–12:12, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 11:48–12:36, अशुभ
- राहु काल, 12:12–13:42, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:38–05:26 गुरु
हर मान कैसे निकलता है
Thazhecode में प्रदोष व्रत बुध 11 अक्टूबर को क्यों है?
प्रदोष व्रत बुध 11 अक्टूबर को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है।
प्रदोष की शिव पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। त्रयोदशी बुध 11 अक्टूबर को 17:37 पर लगी, उस शाम के प्रदोष काल से पहले, और गुरु 12 अक्टूबर को 19:54 पर उतरी, अगले प्रदोष काल के बीच में। निर्णयसिंधु वह शाम लेता है जिसे त्रयोदशी पूरा भरती है: बुध 11 अक्टूबर। प्रदोष व्रत का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; प्रदोष काल Tithika की परिपाटी है।
बुध 11 अक्टूबर को कौन सी तिथि है? कृष्ण द्वादशी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 318.8° आगे था: कृष्ण द्वादशी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 312°–324° सत्ताईसवीं है, कृष्ण द्वादशी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:14। एकादशी उससे पहले 15:09 मंगल पर समाप्त हुई। द्वादशी 17:37 को समाप्त होगी, जब बढ़त 324° होगी। बढ़त 29 सितंबर की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
बुध 11 अक्टूबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:38–05:26
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:38–05:26।
मंगल 10 अक्टूबर की रात सूर्यास्त 18:11 मंगल से सूर्योदय 06:14 तक थी, 12 घं 3 मि। इसे 48 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
बुध 11 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 11:48–12:36
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है: 11:48–12:36।
यहाँ दिन, 06:14 से 18:10, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 47 मि का। बुधवार को दुर्मुहूर्त आठवाँ है, 11:48–12:36: वह आठवाँ, बीच वाला, मुहूर्त लेता है, इसलिए बुधवार को अभिजीत मुहूर्त नहीं होता।
बुध 11 अक्टूबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:14–07:44 लाभ है, जिसके स्वामी बुध हैं, बुधवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:14 से 18:10, 1 घं 29 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 18:10 से 06:15 गुरु, 1 घं 30 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
बुध 11 अक्टूबर को राहुकाल कब है? 12:12–13:42
राहु काल बुधवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पाँचवाँ है: 12:12–13:42।
बुध 11 अक्टूबर को यमगंड कब है? 07:44–09:13
यमगण्ड बुधवार के दिन के 8 बराबर भागों में से दूसरा है: 07:44–09:13।
बुध 11 अक्टूबर को गुलिक काल कब है? 10:43–12:12
गुलिक काल बुधवार के दिन के 8 बराबर भागों में से चौथा है: 10:43–12:12।
यहाँ दिन 06:14 से 18:10 तक है, 11 घं 56 मि। इसे 1 घं 29 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: बुधवार को राहु काल पाँचवाँ भाग है, यमगण्ड दूसरा और गुलिक काल चौथा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
बुध 11 अक्टूबर को सूर्योदय कितने बजे है? 06:14
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:14, सूर्यास्त 18:10, 11 घं 56 मि का दिन।
बुध 11 अक्टूबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:10
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:14, सूर्यास्त 18:10, 11 घं 56 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 56 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 5 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 56 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 5 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
बुध 11 अक्टूबर को कौन सा नक्षत्र है? मघा
सूर्योदय पर चंद्रमा 132.1° पर था: मघा, पद 4।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। मघा 120°00′–133°20′ तक है; चंद्रमा 130° पर उसके पद 4 में आया। वह 08:45 को निकलेगा, पूर्वाफाल्गुनी में।
बुध 11 अक्टूबर को कौन सा योग है? शुभ
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 305.4° थे: शुभ।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 173.3° + 132.1° = 305.4°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 293°20′–306°40′ तेईसवाँ है, शुभ। यह 08:41 को समाप्त होता है, फिर शुक्ल।
बुध 11 अक्टूबर को कौन सा करण है? तैतिल
सूर्योदय पर बढ़त 318.8° थी: द्वादशी का दूसरा आधा, तैतिल।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए द्वादशी का पहला आधा कौलव है और दूसरा तैतिल। कौलव 04:24 पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 318° हुई; तैतिल 17:37 तक है।
बुध 11 अक्टूबर को कौन सा वार है, और कब से? बुधवार
यह दिन बुधवार को सूर्योदय, 06:14, पर शुरू हुआ: बुधवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:14 से 06:15 गुरु तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी बुधवार के हैं।
बुध 11 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? भाद्रपद
यह मास 15 सितंबर की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य सिंह में था: भाद्रपद।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: सिंह से भाद्रपद। सूर्य 17 सितंबर को, मास के भीतर, कन्या में जाता है। अगली अमावस्या, 14 अक्टूबर, उसे कन्या में पाती है और आश्विन शुरू करती है।
बुध 11 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? आश्विन
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष आश्विन का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 14 अक्टूबर की अमावस्या, सूर्य कन्या में, आश्विन शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ आश्विन है, और अमान्त गणना में भाद्रपद।
बुध 11 अक्टूबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2080 · शक 1945
विक्रम संवत 2080 21 मार्च 2023 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 21 मार्च 2023, 22:53 मंगल। तब से सूर्य तारों के बीच 196.7° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2080 गिनता है; शक संवत 1945।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
बुध 11 अक्टूबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 04:16 गुरु
चंद्रमा यहाँ 04:16 गुरु पर उदय होता है।
बुध 11 अक्टूबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 16:11
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 16:11 पर अस्त हुआ; वह फिर 04:16 गुरु पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 16:11 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 04:16 गुरु पर उदय होगा।