Thazhecode, केरल का पंचांग शनि 4 जुलाई 2015
केरल, भारत
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय IST में
4 जुलाई का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, शनि 4 जुलाई
- 04:37–05:22ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:07 से
- 07:49–09:18शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 12:04–12:55अभिजीत मुहूर्त
-
13:16–14:06अमृत कालयमगण्ड छोड़कर · श्रवण में
- 14:06–15:41लाभ चौघड़ियायमगण्ड में
- 15:41–17:17अमृत चौघड़िया
- सूर्यास्त 18:53 के बाद
- 18:53–20:17लाभ चौघड़िया
- 21:41–23:06शुभ चौघड़िया
- 23:06–00:30 रविअमृत चौघड़िया
- 04:43–06:07 रविलाभ चौघड़िया
- 04:37–05:22 रविअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:07–07:42कालअशुभ
- 07:42–09:18शुभ
- 09:18–10:54रोगअशुभ
- 10:54–12:30उद्वेगअशुभ
- 12:30–14:06चरसामान्य
- 14:06–15:41लाभयमगण्ड में
- 15:41–17:17अमृतशुभ
- 17:17–18:53कालअशुभ
रात का चौघड़िया
- 18:53–20:17लाभशुभ
- 20:17–21:41उद्वेगअशुभ
- 21:41–23:06शुभ
- 23:06–00:30 रविअमृतशुभ
- 00:30–01:54 रविचरसामान्य
- 01:54–03:18 रविरोगअशुभ
- 03:18–04:43 रविकालअशुभ
- 04:43–06:07 रविलाभशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, शनि 4 जुलाई: ब्रह्म मुहूर्त, 04:37–05:22, शुभ
- काल, अशुभ, 06:07–07:42
- शुभ, 07:42–09:18
- रोग, अशुभ, 09:18–10:54
- उद्वेग, अशुभ, 10:54–12:30
- चर, सामान्य, 12:30–14:06
- लाभ, शुभ, 14:06–15:41
- अमृत, शुभ, 15:41–17:17
- काल, अशुभ, 17:17–18:53
- लाभ, शुभ, 18:53–20:17
- उद्वेग, अशुभ, 20:17–21:41
- शुभ, 21:41–23:06
- अमृत, शुभ, 23:06–00:30 रवि
- चर, सामान्य, 00:30–01:54 रवि
- रोग, अशुभ, 01:54–03:18 रवि
- काल, अशुभ, 03:18–04:43 रवि
- लाभ, शुभ, 04:43–06:07 रवि
- गुलिक काल, 06:07–07:42, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 06:07–06:58, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 06:58–07:49, अशुभ
- राहु काल, 09:18–10:54, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 12:04–12:55, शुभ
- यमगण्ड, 14:06–15:41, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:37–05:22 रवि
हर मान कैसे निकलता है
शनि 4 जुलाई को कौन सी तिथि है? कृष्ण तृतीया
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 205.6° आगे था: कृष्ण तृतीया।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 204°–216° अठारहवीं है, कृष्ण तृतीया। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:07। द्वितीया उससे पहले 03:18 पर समाप्त हुई। तृतीया 00:44 रवि को समाप्त होगी, जब बढ़त 216° होगी। बढ़त 2 जुलाई की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
शनि 4 जुलाई को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:37–05:22
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:37–05:22।
शुक्र 3 जुलाई की रात सूर्यास्त 18:53 शुक्र से सूर्योदय 06:07 तक थी, 11 घं 14 मि। इसे 44 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
शनि 4 जुलाई को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:04–12:55
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:04–12:55।
शनि 4 जुलाई को दुर्मुहूर्त कब है? 06:07–06:58
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से पहला और दूसरा है: 06:07–06:58 और 06:58–07:49।
शनि 4 जुलाई को दुर्मुहूर्त कब है? 06:58–07:49
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से पहला और दूसरा है: 06:07–06:58 और 06:58–07:49।
यहाँ दिन, 06:07 से 18:53, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 51 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। शनिवार को दुर्मुहूर्त पहला और दूसरा है, 06:07–06:58 और 06:58–07:49।
शनि 4 जुलाई का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:07–07:42 काल है, जिसके स्वामी शनि हैं, शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:07 से 18:53, 1 घं 35 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 18:53 से 06:07 रवि, 1 घं 24 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
शनि 4 जुलाई को राहुकाल कब है? 09:18–10:54
राहु काल शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 09:18–10:54।
शनि 4 जुलाई को यमगंड कब है? 14:06–15:41
यमगण्ड शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 14:06–15:41।
शनि 4 जुलाई को गुलिक काल कब है? 06:07–07:42
गुलिक काल शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 06:07–07:42।
यहाँ दिन 06:07 से 18:53 तक है, 12 घं 46 मि। इसे 1 घं 35 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: शनिवार को राहु काल तीसरा भाग है, यमगण्ड छठा और गुलिक काल पहला।
सूर्योदय और सूर्यास्त
शनि 4 जुलाई को सूर्योदय कितने बजे है? 06:07
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:07, सूर्यास्त 18:53, 12 घं 46 मि का दिन।
शनि 4 जुलाई को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:53
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:07, सूर्यास्त 18:53, 12 घं 46 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 46 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 14 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 46 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 14 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
शनि 4 जुलाई को कौन सा नक्षत्र है? श्रवण
सूर्योदय पर चंद्रमा 283.3° पर था: श्रवण, पद 1।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। श्रवण 280°00′–293°20′ तक है; चंद्रमा 280° पर उसके पद 1 में आया। वह 22:55 को निकलेगा, धनिष्ठा में।
शनि 4 जुलाई को कौन सा योग है? विष्कम्भ
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 361° थे, एक चक्कर और 1°: विष्कम्भ।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 77.7° + 283.3° = 361°, एक पूरा चक्कर और 1°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 0°00′–13°20′ पहला है, विष्कम्भ। यह 01:29 रवि को समाप्त होता है, फिर प्रीति।
शनि 4 जुलाई को कौन सा करण है? वणिज
सूर्योदय पर बढ़त 205.6° थी: तृतीया का पहला आधा, वणिज।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए तृतीया का पहला आधा वणिज है और दूसरा विष्टि। वणिज 14:02 तक है, जब बढ़त 210° होगी; विष्टि 00:44 रवि तक।
शनि 4 जुलाई को कौन सा वार है, और कब से? शनिवार
यह दिन शनिवार को सूर्योदय, 06:07, पर शुरू हुआ: शनिवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:07 से 06:07 रवि तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी शनिवार के हैं।
शनि 4 जुलाई को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? आषाढ़ (अधिक)
16 जून और 16 जुलाई की अमावस्याओं के बीच कोई संक्रांति नहीं: अधिक आषाढ़।
सामान्यतः एक मास में एक संक्रांति होती है, सूर्य का नई राशि में प्रवेश। 16 जून 19:35 मंगल से 16 जुलाई 06:54 गुरु तक सूर्य मिथुन में रहा; कर्क में वह अमावस्या के बाद 17 जुलाई 04:02 शुक्र को गया। बिना संक्रांति का मास अधिक आषाढ़ है, जो आषाढ़ से पहले आता है।
शनि 4 जुलाई को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? आषाढ़ (अधिक)
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष आषाढ़ (अधिक) का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 16 जुलाई की अमावस्या, सूर्य मिथुन में, आषाढ़ (अधिक) शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ आषाढ़ (अधिक) है, और अमान्त गणना में आषाढ़ (अधिक)।
शनि 4 जुलाई को कौन सा संवत है? विक्रम 2072 · शक 1937
विक्रम संवत 2072 20 मार्च 2015 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 20 मार्च 2015, 15:06 शुक्र। तब से सूर्य तारों के बीच 102.3° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2072 गिनता है; शक संवत 1937।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
शनि 4 जुलाई को चंद्रोदय कितने बजे है? 20:57
चंद्रमा यहाँ 20:57 पर उदय होता है।
शनि 4 जुलाई को चंद्रास्त कितने बजे है? 08:05
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 08:05 पर अस्त हुआ; वह फिर 20:57 पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 08:05 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 20:57 पर उदय होगा।