सोफिया, बुल्गारिया का पंचांग मंगल 17 अक्टूबर 2028
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय EEST में
त्योहार
दीवाली · लक्ष्मी पूजा
दीवाली · लक्ष्मी पूजा मंगल 17 अक्टूबर को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में अमावस्या है, और किसी शाम नहीं। मंगल 17 अक्टूबर क्यों?
दीवाली: सोफिया में हर तारीख़त्योहार
नरक चतुर्दशी
नरक चतुर्दशी मंगल 17 अक्टूबर को है: उस सुबह पूरे अरुणोदय में चतुर्दशी है, और किसी सुबह नहीं। मंगल 17 अक्टूबर क्यों?
नरक चतुर्दशी: सोफिया में हर तारीख़व्रत
अमावस्या
अमावस्या मंगल 17 अक्टूबर को है: अमावस्या किसी सूर्योदय पर नहीं है, और उसी दिन मानी जाती है जिस दिन वह चलती है। मंगल 17 अक्टूबर क्यों?
अमावस्या: सोफिया में हर तारीख़17 अक्टूबर का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, मंगल 17 अक्टूबर
- 05:58–06:50ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 07:42 से
- 11:49–13:11लाभ चौघड़िया
-
12:30–13:11अमृत कालगुलिक काल छोड़कर · हस्त में
- 12:49–13:11अभिजीत मुहूर्तगुलिक काल छोड़कर
- 13:11–14:34अमृत चौघड़ियागुलिक काल में
- 15:56–17:18शुभ चौघड़ियाराहु काल में
- सूर्यास्त 18:40 के बाद
- 20:18–21:56लाभ चौघड़िया
- 23:34–23:54शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 00:46–01:12 बुधशुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 01:12–02:50 बुधअमृत चौघड़िया
- 05:59–06:51 बुधअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 07:42–09:05रोगअशुभ
- 09:05–10:27उद्वेगअशुभ
- 10:27–11:49चरसामान्य
- 11:49–13:11लाभशुभ
- 13:11–14:34अमृतगुलिक काल में
- 14:34–15:56कालअशुभ
- 15:56–17:18शुभराहु काल में
- 17:18–18:40रोगअशुभ
रात का चौघड़िया
- 18:40–20:18कालअशुभ
- 20:18–21:56लाभशुभ
- 21:56–23:34उद्वेगअशुभ
- 23:34–01:12 बुधशुभ
- 01:12–02:50 बुधअमृतशुभ
- 02:50–04:28 बुधचरसामान्य
- 04:28–06:06 बुधरोगअशुभ
- 06:06–07:43 बुधकालअशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, मंगल 17 अक्टूबर: ब्रह्म मुहूर्त, 05:58–06:50, शुभ
- रोग, अशुभ, 07:42–09:05
- उद्वेग, अशुभ, 09:05–10:27
- चर, सामान्य, 10:27–11:49
- लाभ, शुभ, 11:49–13:11
- अमृत, शुभ, 13:11–14:34
- काल, अशुभ, 14:34–15:56
- शुभ, 15:56–17:18
- रोग, अशुभ, 17:18–18:40
- काल, अशुभ, 18:40–20:18
- लाभ, शुभ, 20:18–21:56
- उद्वेग, अशुभ, 21:56–23:34
- शुभ, 23:34–01:12 बुध
- अमृत, शुभ, 01:12–02:50 बुध
- चर, सामान्य, 02:50–04:28 बुध
- रोग, अशुभ, 04:28–06:06 बुध
- काल, अशुभ, 06:06–07:43 बुध
- दुर्मुहूर्त, 09:54–10:38, अशुभ
- यमगण्ड, 10:27–11:49, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 12:49–13:33, शुभ
- गुलिक काल, 13:11–14:34, अशुभ
- राहु काल, 15:56–17:18, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 23:54–00:46 बुध, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 05:59–06:51 बुध
हर मान कैसे निकलता है
सोफिया में दीवाली मंगल 17 अक्टूबर को क्यों है?
दीवाली · लक्ष्मी पूजा मंगल 17 अक्टूबर को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में अमावस्या है, और किसी शाम नहीं।
लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। अमावस्या मंगल 17 अक्टूबर को 09:35 से बुध 18 अक्टूबर को 05:56 तक है, इसलिए केवल मंगलवार का प्रदोष काल (18:40–21:17) उसके भीतर है। हर मत यही दिन लेता है।
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: प्रदोष काल, 18:40–21:17। इसमें स्थिर लग्न वृषभ पूर्व में 19:54 से 21:17 तक उदित रहता है।
सोफिया में नरक चतुर्दशी मंगल 17 अक्टूबर को क्यों है?
नरक चतुर्दशी मंगल 17 अक्टूबर को है: उस सुबह पूरे अरुणोदय में चतुर्दशी है, और किसी सुबह नहीं।
अभ्यंग स्नान अरुणोदय में होता है, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। चतुर्दशी सोम 16 अक्टूबर को 13:15 से मंगल 17 अक्टूबर को 09:35 तक है, इसलिए केवल मंगलवार का अरुणोदय (06:06–07:42) उसके भीतर है। नरक चतुर्दशी का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; अरुणोदय Tithika की परिपाटी है।
सोफिया में अमावस्या मंगल 17 अक्टूबर को क्यों है?
अमावस्या मंगल 17 अक्टूबर को है: अमावस्या किसी सूर्योदय पर नहीं है, और उसी दिन मानी जाती है जिस दिन वह चलती है।
अमावस्या सूर्योदय की तिथि से मानी जाती है। अमावस्या मंगल 17 अक्टूबर को 09:35 पर, उस सूर्योदय के बाद, लगती है और बुध 18 अक्टूबर को 05:56 पर, अगले सूर्योदय से पहले, समाप्त होती है: वह किसी सूर्योदय पर नहीं है। ऐसी तिथि उसी दिन मानी जाती है जिस दिन वह चलती है: मंगल 17 अक्टूबर। अमावस्या का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्योदय Tithika की परिपाटी है।
मंगल 17 अक्टूबर को कौन सी तिथि है? कृष्ण चतुर्दशी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 346.9° आगे था: कृष्ण चतुर्दशी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 336°–348° उनतीसवीं है, कृष्ण चतुर्दशी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 07:42। त्रयोदशी उससे पहले 13:15 सोम पर समाप्त हुई। चतुर्दशी 09:35 को समाप्त होगी, जब बढ़त 348° होगी। बढ़त 3 अक्टूबर की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
अमावस्या क्षय क्यों है?
अमावस्या एक सूर्योदय के बाद शुरू हुई और अगले से पहले समाप्त, इसलिए यहाँ कोई दिन अमावस्या नहीं होता।
दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो। अमावस्या 09:35 को शुरू हुई और 05:56 बुध को समाप्त, 07:42 और 07:43 बुध के सूर्योदयों के बीच। मंगलवार को चतुर्दशी है और बुधवार को प्रतिपदा: अमावस्या यहाँ क्षय तिथि है।
मंगल 17 अक्टूबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 05:58–06:50
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 05:58–06:50।
सोम 16 अक्टूबर की रात सूर्यास्त 18:42 सोम से सूर्योदय 07:42 तक थी, 13 घं 0 मि। इसे 52 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
मंगल 17 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:49–13:33
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:49–13:33।
मंगल 17 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 09:54–10:38
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा है, 09:54–10:38, और रात के 15 में से सातवाँ, 23:54–00:46 बुध।
मंगल 17 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 23:54–00:46 बुध
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा है, 09:54–10:38, और रात के 15 में से सातवाँ, 23:54–00:46 बुध।
यहाँ दिन, 07:42 से 18:40, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 43 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। मंगलवार को दुर्मुहूर्त चौथा और रात का सातवाँ है, 09:54–10:38 और 23:54–00:46 बुध।
मंगल 17 अक्टूबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
07:42–09:05 रोग है, जिसके स्वामी मंगल हैं, मंगलवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 07:42 से 18:40, 1 घं 22 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 18:40 से 07:43 बुध, 1 घं 37 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
मंगल 17 अक्टूबर को राहुकाल कब है? 15:56–17:18
राहु काल मंगलवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 15:56–17:18।
मंगल 17 अक्टूबर को यमगंड कब है? 10:27–11:49
यमगण्ड मंगलवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 10:27–11:49।
मंगल 17 अक्टूबर को गुलिक काल कब है? 13:11–14:34
गुलिक काल मंगलवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पाँचवाँ है: 13:11–14:34।
यहाँ दिन 07:42 से 18:40 तक है, 10 घं 58 मि। इसे 1 घं 22 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: मंगलवार को राहु काल सातवाँ भाग है, यमगण्ड तीसरा और गुलिक काल पाँचवाँ।
सूर्योदय और सूर्यास्त
मंगल 17 अक्टूबर को सूर्योदय कितने बजे है? 07:42
यहाँ दिन: सूर्योदय 07:42, सूर्यास्त 18:40, 10 घं 58 मि का दिन।
मंगल 17 अक्टूबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:40
यहाँ दिन: सूर्योदय 07:42, सूर्यास्त 18:40, 10 घं 58 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 10 घं 58 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 13 घं 3 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 10 घं 58 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 13 घं 3 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
मंगल 17 अक्टूबर को कौन सा नक्षत्र है? हस्त
सूर्योदय पर चंद्रमा 167° पर था: हस्त, पद 3।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। हस्त 160°00′–173°20′ तक है; चंद्रमा 166°40′ पर उसके पद 3 में आया। वह 17:46 को निकलेगा, चित्रा में।
मंगल 17 अक्टूबर को कौन सा योग है? वैधृति
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 347.1° थे: वैधृति।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 180.1° + 167° = 347.1°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 346°40′–360°00′ सत्ताईसवाँ है, वैधृति। यह 02:57 बुध को समाप्त होता है, फिर विष्कम्भ।
मंगल 17 अक्टूबर को कौन सा करण है? शकुनि
सूर्योदय पर बढ़त 346.9° थी: चतुर्दशी का दूसरा आधा, शकुनि।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए चतुर्दशी का पहला आधा विष्टि है और दूसरा शकुनि। विष्टि 23:26 सोम पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 342° हुई; शकुनि 09:35 तक है।
मंगल 17 अक्टूबर को कौन सा वार है, और कब से? मंगलवार
यह दिन मंगलवार को सूर्योदय, 07:42, पर शुरू हुआ: मंगलवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 07:42 से 07:43 बुध तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी मंगलवार के हैं।
मंगल 17 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? आश्विन
यह मास 18 सितंबर की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य कन्या में था: आश्विन।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: कन्या से आश्विन। सूर्य 17 अक्टूबर को, मास के भीतर, तुला में जाता है। अगली अमावस्या, 18 अक्टूबर, उसे तुला में पाती है और कार्तिक शुरू करती है।
मंगल 17 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? कार्तिक
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष कार्तिक का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 18 अक्टूबर की अमावस्या, सूर्य तुला में, कार्तिक शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ कार्तिक है, और अमान्त गणना में आश्विन।
मंगल 17 अक्टूबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2085 · शक 1950
विक्रम संवत 2085 26 मार्च 2028 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 26 मार्च 2028, 07:31 रवि। तब से सूर्य तारों के बीच 198.3° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2085 गिनता है; शक संवत 1950।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
मंगल 17 अक्टूबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 17:53
चंद्रमा यहाँ 17:53 पर अस्त होता है।
चंद्रमा इस सूर्योदय और अगले के बीच उदय नहीं होता।
चंद्रमा 17:53 पर, दिन में, अस्त होता है और अगले सूर्योदय से पहले उदय नहीं होता।