सोफिया, बुल्गारिया का पंचांग रवि 19 अप्रैल 2026
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय EEST में
त्योहार
अक्षय तृतीया
अक्षय तृतीया रवि 19 अप्रैल को है: उस सुबह तृतीया पूर्वाह्न को छूती है, और किसी सुबह नहीं। रवि 19 अप्रैल क्यों?
अक्षय तृतीया: सोफिया में हर तारीख़19 अप्रैल का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, रवि 19 अप्रैल
- 05:15–05:57ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:39 से
- 10:02–11:44लाभ चौघड़िया
- 11:44–13:26अमृत चौघड़िया
- 12:59–13:26अभिजीत मुहूर्तयमगण्ड छोड़कर
- 15:08–16:49शुभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 20:13 के बाद
- 20:13–21:31शुभ चौघड़िया
- 21:31–22:49अमृत चौघड़िया
-
23:56–01:22 सोमअमृत कालकृत्तिका में
- 02:43–04:01 सोमलाभ चौघड़िया
- 05:19–06:37 सोमशुभ चौघड़िया
- 05:14–05:56 सोमअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:39–08:21उद्वेगअशुभ
- 08:21–10:02चरसामान्य
- 10:02–11:44लाभशुभ
- 11:44–13:26अमृतशुभ
- 13:26–15:08कालअशुभ
- 15:08–16:49शुभ
- 16:49–18:31रोगअशुभ
- 18:31–20:13उद्वेगअशुभ
रात का चौघड़िया
- 20:13–21:31शुभ
- 21:31–22:49अमृतशुभ
- 22:49–00:07 सोमचरसामान्य
- 00:07–01:25 सोमरोगअशुभ
- 01:25–02:43 सोमकालअशुभ
- 02:43–04:01 सोमलाभशुभ
- 04:01–05:19 सोमउद्वेगअशुभ
- 05:19–06:37 सोमशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, रवि 19 अप्रैल: ब्रह्म मुहूर्त, 05:15–05:57, शुभ
- उद्वेग, अशुभ, 06:39–08:21
- चर, सामान्य, 08:21–10:02
- लाभ, शुभ, 10:02–11:44
- अमृत, शुभ, 11:44–13:26
- काल, अशुभ, 13:26–15:08
- शुभ, 15:08–16:49
- रोग, अशुभ, 16:49–18:31
- उद्वेग, अशुभ, 18:31–20:13
- शुभ, 20:13–21:31
- अमृत, शुभ, 21:31–22:49
- चर, सामान्य, 22:49–00:07 सोम
- रोग, अशुभ, 00:07–01:25 सोम
- काल, अशुभ, 01:25–02:43 सोम
- लाभ, शुभ, 02:43–04:01 सोम
- उद्वेग, अशुभ, 04:01–05:19 सोम
- शुभ, 05:19–06:37 सोम
- अभिजीत मुहूर्त, 12:59–13:53, शुभ
- यमगण्ड, 13:26–15:08, अशुभ
- गुलिक काल, 16:49–18:31, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 18:24–19:19, अशुभ
- राहु काल, 18:31–20:13, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 05:14–05:56 सोम
हर मान कैसे निकलता है
सोफिया में अक्षय तृतीया रवि 19 अप्रैल को क्यों है?
अक्षय तृतीया रवि 19 अप्रैल को है: उस सुबह तृतीया पूर्वाह्न को छूती है, और किसी सुबह नहीं।
अक्षय तृतीया की पूजा पूर्वाह्न में होती है, दिन का पहला आधा भाग। तृतीया रवि 19 अप्रैल को 08:19 से सोम 20 अप्रैल को 04:58 तक है, इसलिए वह केवल रविवार के पूर्वाह्न (06:39–13:26) को छूती है।
रवि 19 अप्रैल को कौन सी तिथि है? शुक्ल द्वितीया
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 23° आगे था: शुक्ल द्वितीया।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 12°–24° दूसरी है, शुक्ल द्वितीया। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:39। प्रतिपदा उससे पहले 11:41 शनि पर समाप्त हुई। द्वितीया 08:19 को समाप्त होगी, जब बढ़त 24° होगी। बढ़त 17 अप्रैल की अमावस्या पर 0° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा बढ़ रहा है: शुक्ल पक्ष।
तृतीया क्षय क्यों है?
तृतीया एक सूर्योदय के बाद शुरू हुई और अगले से पहले समाप्त, इसलिए यहाँ कोई दिन तृतीया नहीं होता।
दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो। तृतीया 08:19 को शुरू हुई और 04:58 सोम को समाप्त, 06:39 और 06:37 सोम के सूर्योदयों के बीच। रविवार को द्वितीया है और सोमवार को चतुर्थी: तृतीया यहाँ क्षय तिथि है।
रवि 19 अप्रैल को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 05:15–05:57
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 05:15–05:57।
शनि 18 अप्रैल की रात सूर्यास्त 20:12 शनि से सूर्योदय 06:39 तक थी, 10 घं 27 मि। इसे 41 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
रवि 19 अप्रैल को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:59–13:53
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:59–13:53।
रवि 19 अप्रैल को दुर्मुहूर्त कब है? 18:24–19:19
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 18:24–19:19।
यहाँ दिन, 06:39 से 20:13, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 54 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। रविवार को दुर्मुहूर्त चौदहवाँ है, 18:24–19:19।
रवि 19 अप्रैल का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:39–08:21 उद्वेग है, जिसके स्वामी सूर्य हैं, रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:39 से 20:13, 1 घं 41 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 20:13 से 06:37 सोम, 1 घं 18 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
रवि 19 अप्रैल को राहुकाल कब है? 18:31–20:13
राहु काल रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से आठवाँ है: 18:31–20:13।
रवि 19 अप्रैल को यमगंड कब है? 13:26–15:08
यमगण्ड रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पाँचवाँ है: 13:26–15:08।
रवि 19 अप्रैल को गुलिक काल कब है? 16:49–18:31
गुलिक काल रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 16:49–18:31।
यहाँ दिन 06:39 से 20:13 तक है, 13 घं 34 मि। इसे 1 घं 41 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: रविवार को राहु काल आठवाँ भाग है, यमगण्ड पाँचवाँ और गुलिक काल सातवाँ।
सूर्योदय और सूर्यास्त
रवि 19 अप्रैल को सूर्योदय कितने बजे है? 06:39
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:39, सूर्यास्त 20:13, 13 घं 34 मि का दिन।
रवि 19 अप्रैल को सूर्यास्त कितने बजे है? 20:13
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:39, सूर्यास्त 20:13, 13 घं 34 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 13 घं 34 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 10 घं 24 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 13 घं 34 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 10 घं 24 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
रवि 19 अप्रैल को कौन सा नक्षत्र है? कृत्तिका
सूर्योदय पर चंद्रमा 27.9° पर था: कृत्तिका, पद 1।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। कृत्तिका 26°40′–40°00′ तक है; चंद्रमा 26°40′ पर उसके पद 1 में आया। वह 02:05 सोम को निकलेगा, रोहिणी में।
रवि 19 अप्रैल को कौन सा योग है? आयुष्मान्
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 32.8° थे: आयुष्मान्।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 4.9° + 27.9° = 32.8°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 26°40′–40°00′ तीसरा है, आयुष्मान्। यह 17:32 को समाप्त होता है, फिर सौभाग्य।
रवि 19 अप्रैल को कौन सा करण है? कौलव
सूर्योदय पर बढ़त 23° थी: द्वितीया का दूसरा आधा, कौलव।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए द्वितीया का पहला आधा बालव है और दूसरा कौलव। बालव 22:01 शनि पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 18° हुई; कौलव 08:19 तक है।
रवि 19 अप्रैल को कौन सा वार है, और कब से? रविवार
यह दिन रविवार को सूर्योदय, 06:39, पर शुरू हुआ: रविवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:39 से 06:37 सोम तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी रविवार के हैं।
रवि 19 अप्रैल को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? वैशाख
यह मास 17 अप्रैल की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य मेष में था: वैशाख।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: मेष से वैशाख। सूर्य 15 मई को, मास के भीतर, वृषभ में जाता है। अगली अमावस्या, 16 मई, उसे वृषभ में पाती है और ज्येष्ठ शुरू करती है।
रवि 19 अप्रैल को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? वैशाख
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह शुक्ल पक्ष वैशाख का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 17 अप्रैल की अमावस्या ने, सूर्य मेष में, वैशाख शुरू किया। यह शुक्ल पक्ष दोनों गणनाओं में वैशाख है।
रवि 19 अप्रैल को कौन सा संवत है? विक्रम 2083 · शक 1948
विक्रम संवत 2083 19 मार्च 2026 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 19 मार्च 2026, 03:23 गुरु। तब से सूर्य तारों के बीच 30.7° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2083 गिनता है; शक संवत 1948।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
रवि 19 अप्रैल को चंद्रोदय कितने बजे है? 07:20
चंद्रमा यहाँ 07:20 पर उदय होता है।
रवि 19 अप्रैल को चंद्रास्त कितने बजे है? 23:16
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 07:20 पर, दिन में, उदय होता है; वह फिर 23:16 पर अस्त होगा।
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 07:20 पर उदय हुआ; वह फिर 23:16 पर अस्त होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रास्त रात में पड़ता है।