Simrishamn, स्कॉने लैन, स्वीडन का पंचांग गुरु 27 जून 2030
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय CEST में
व्रत
प्रदोष व्रत
प्रदोष व्रत गुरु 27 जून को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं। गुरु 27 जून क्यों?
प्रदोष व्रत: Simrishamn में हर तारीख़व्रत का पारण
योगिनी एकादशी
27 जून का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, गुरु 27 जून
- 03:28–03:54ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 04:20 से
- 04:20–06:32शुभ चौघड़ियायमगण्ड में
- 12:30–13:40अभिजीत मुहूर्त
- 13:05–15:16लाभ चौघड़िया
- 15:16–17:27अमृत चौघड़ियाराहु काल में
- 19:38–21:49शुभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 21:49 के बाद
- 21:49–22:38अमृत चौघड़िया
-
22:34–00:22 शुक्रअमृत कालकृत्तिका में
- 01:05–01:54 शुक्रलाभ चौघड़िया
- 02:43–03:32 शुक्रशुभ चौघड़िया
- 03:32–04:21 शुक्रअमृत चौघड़िया
- 03:29–03:55 शुक्रअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 04:20–06:32शुभयमगण्ड में
- 06:32–08:43रोगअशुभ
- 08:43–10:54उद्वेगअशुभ
- 10:54–13:05चरसामान्य
- 13:05–15:16लाभशुभ
- 15:16–17:27अमृतराहु काल में
- 17:27–19:38कालअशुभ
- 19:38–21:49शुभ
रात का चौघड़िया
- 21:49–22:38अमृतशुभ
- 22:38–23:27चरसामान्य
- 23:27–00:16 शुक्ररोगअशुभ
- 00:16–01:05 शुक्रकालअशुभ
- 01:05–01:54 शुक्रलाभशुभ
- 01:54–02:43 शुक्रउद्वेगअशुभ
- 02:43–03:32 शुक्रशुभ
- 03:32–04:21 शुक्रअमृतशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, गुरु 27 जून: ब्रह्म मुहूर्त, 03:28–03:54, शुभ
- शुभ, 04:20–06:32
- रोग, अशुभ, 06:32–08:43
- उद्वेग, अशुभ, 08:43–10:54
- चर, सामान्य, 10:54–13:05
- लाभ, शुभ, 13:05–15:16
- अमृत, शुभ, 15:16–17:27
- काल, अशुभ, 17:27–19:38
- शुभ, 19:38–21:49
- अमृत, शुभ, 21:49–22:38
- चर, सामान्य, 22:38–23:27
- रोग, अशुभ, 23:27–00:16 शुक्र
- काल, अशुभ, 00:16–01:05 शुक्र
- लाभ, शुभ, 01:05–01:54 शुक्र
- उद्वेग, अशुभ, 01:54–02:43 शुक्र
- शुभ, 02:43–03:32 शुक्र
- अमृत, शुभ, 03:32–04:21 शुक्र
- यमगण्ड, 04:20–06:32, अशुभ
- गुलिक काल, 08:43–10:54, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 10:10–11:20, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 12:30–13:40, शुभ
- राहु काल, 15:16–17:27, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 17:10–18:20, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 03:29–03:55 शुक्र
हर मान कैसे निकलता है
Simrishamn में प्रदोष व्रत गुरु 27 जून को क्यों है?
प्रदोष व्रत गुरु 27 जून को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं।
प्रदोष की शिव पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। त्रयोदशी गुरु 27 जून को 16:33 से शुक्र 28 जून को 19:07 तक है, इसलिए केवल गुरुवार का प्रदोष काल (21:49–23:08) उसके भीतर है। प्रदोष व्रत का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; प्रदोष काल Tithika की परिपाटी है।
गुरु 27 जून को कौन सी तिथि है? कृष्ण द्वादशी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 318.5° आगे था: कृष्ण द्वादशी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 312°–324° सत्ताईसवीं है, कृष्ण द्वादशी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 04:20। एकादशी उससे पहले 13:58 बुध पर समाप्त हुई। द्वादशी 16:33 को समाप्त होगी, जब बढ़त 324° होगी। बढ़त 15 जून की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
गुरु 27 जून को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 03:28–03:54
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 03:28–03:54।
बुध 26 जून की रात सूर्यास्त 21:49 बुध से सूर्योदय 04:20 तक थी, 6 घं 31 मि। इसे 26 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
गुरु 27 जून को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:30–13:40
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:30–13:40।
गुरु 27 जून को दुर्मुहूर्त कब है? 10:10–11:20
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:10–11:20 और 17:10–18:20।
गुरु 27 जून को दुर्मुहूर्त कब है? 17:10–18:20
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:10–11:20 और 17:10–18:20।
यहाँ दिन, 04:20 से 21:49, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 1 घं 9 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। गुरुवार को दुर्मुहूर्त छठा और बारहवाँ है, 10:10–11:20 और 17:10–18:20।
गुरु 27 जून का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
04:20–06:32 शुभ है, जिसके स्वामी गुरु (बृहस्पति) हैं, गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 04:20 से 21:49, 2 घं 11 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 21:49 से 04:21 शुक्र, 49 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
गुरु 27 जून को राहुकाल कब है? 15:16–17:27
राहु काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 15:16–17:27।
गुरु 27 जून को यमगंड कब है? 04:20–06:32
यमगण्ड गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 04:20–06:32।
गुरु 27 जून को गुलिक काल कब है? 08:43–10:54
गुलिक काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 08:43–10:54।
यहाँ दिन 04:20 से 21:49 तक है, 17 घं 29 मि। इसे 2 घं 11 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: गुरुवार को राहु काल छठा भाग है, यमगण्ड पहला और गुलिक काल तीसरा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
गुरु 27 जून को सूर्योदय कितने बजे है? 04:20
यहाँ दिन: सूर्योदय 04:20, सूर्यास्त 21:49, 17 घं 29 मि का दिन।
गुरु 27 जून को सूर्यास्त कितने बजे है? 21:49
यहाँ दिन: सूर्योदय 04:20, सूर्यास्त 21:49, 17 घं 29 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 17 घं 29 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 6 घं 32 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 17 घं 29 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 6 घं 32 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
गुरु 27 जून को कौन सा नक्षत्र है? कृत्तिका
सूर्योदय पर चंद्रमा 29.7° पर था: कृत्तिका, पद 1।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। कृत्तिका 26°40′–40°00′ तक है; चंद्रमा 26°40′ पर उसके पद 1 में आया। वह 01:17 शुक्र को निकलेगा, रोहिणी में।
गुरु 27 जून को कौन सा योग है? धृति
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 100.9° थे: धृति।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 71.2° + 29.7° = 100.9°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 93°20′–106°40′ आठवाँ है, धृति। यह 15:06 को समाप्त होता है, फिर शूल।
गुरु 27 जून को कौन सा करण है? तैतिल
सूर्योदय पर बढ़त 318.5° थी: द्वादशी का दूसरा आधा, तैतिल।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए द्वादशी का पहला आधा कौलव है और दूसरा तैतिल। कौलव 03:15 पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 318° हुई; तैतिल 16:33 तक है।
गुरु 27 जून को कौन सा वार है, और कब से? गुरुवार
यह दिन गुरुवार को सूर्योदय, 04:20, पर शुरू हुआ: गुरुवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 04:20 से 04:21 शुक्र तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी गुरुवार के हैं।
गुरु 27 जून को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? ज्येष्ठ
यह मास 1 जून की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य वृषभ में था: ज्येष्ठ।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: वृषभ से ज्येष्ठ। सूर्य 15 जून को, मास के भीतर, मिथुन में जाता है। अगली अमावस्या, 30 जून, उसे मिथुन में पाती है और आषाढ़ शुरू करती है।
गुरु 27 जून को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? आषाढ़
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष आषाढ़ का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 30 जून की अमावस्या, सूर्य मिथुन में, आषाढ़ शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ आषाढ़ है, और अमान्त गणना में ज्येष्ठ।
गुरु 27 जून को कौन सा संवत है? विक्रम 2087 · शक 1952
विक्रम संवत 2087 3 अप्रैल 2030 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 3 अप्रैल 2030, 00:02 बुध। तब से सूर्य तारों के बीच 82.3° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2087 गिनता है; शक संवत 1952।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
गुरु 27 जून को चंद्रोदय कितने बजे है? 02:23 शुक्र
चंद्रमा यहाँ 02:23 शुक्र पर उदय होता है।
गुरु 27 जून को चंद्रास्त कितने बजे है? 18:55
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 18:55 पर अस्त हुआ; वह फिर 02:23 शुक्र पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 18:55 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 02:23 शुक्र पर उदय होगा।