Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया का पंचांग गुरु 14 अक्टूबर 2088
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC+4 में
त्योहार
सर्व पितृ अमावस्या
सर्व पितृ अमावस्या गुरु 14 अक्टूबर को है: उस दिन पूरे अपराह्न में अमावस्या है, और किसी दिन नहीं। गुरु 14 अक्टूबर क्यों?
सर्व पितृ अमावस्या: Sevan में हर तारीख़व्रत
अमावस्या
अमावस्या गुरु 14 अक्टूबर को है: उस दिन सूर्योदय पर अमावस्या है। गुरु 14 अक्टूबर क्यों?
अमावस्या: Sevan में हर तारीख़14 अक्टूबर का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, गुरु 14 अक्टूबर
- 05:28–06:19ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 07:10 से
- 07:10–08:34शुभ चौघड़ियायमगण्ड में
- 12:23–13:07अभिजीत मुहूर्त
- 12:45–14:09लाभ चौघड़िया
- 14:09–15:32अमृत चौघड़ियाराहु काल में
- 16:56–18:20शुभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 18:20 के बाद
- 18:20–19:56अमृत चौघड़िया
- 00:46–02:22 शुक्रलाभ चौघड़िया
- 03:58–05:35 शुक्रशुभ चौघड़िया
- 05:35–07:11 शुक्रअमृत चौघड़िया
-
05:52–07:32 शुक्रअमृत कालचित्रा में
- 05:28–06:20 शुक्रअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 07:10–08:34शुभयमगण्ड में
- 08:34–09:58रोगअशुभ
- 09:58–11:21उद्वेगअशुभ
- 11:21–12:45चरसामान्य
- 12:45–14:09लाभशुभ
- 14:09–15:32अमृतराहु काल में
- 15:32–16:56कालअशुभ
- 16:56–18:20शुभ
रात का चौघड़िया
- 18:20–19:56अमृतशुभ
- 19:56–21:33चरसामान्य
- 21:33–23:09रोगअशुभ
- 23:09–00:46 शुक्रकालअशुभ
- 00:46–02:22 शुक्रलाभशुभ
- 02:22–03:58 शुक्रउद्वेगअशुभ
- 03:58–05:35 शुक्रशुभ
- 05:35–07:11 शुक्रअमृतशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, गुरु 14 अक्टूबर: ब्रह्म मुहूर्त, 05:28–06:19, शुभ
- शुभ, 07:10–08:34
- रोग, अशुभ, 08:34–09:58
- उद्वेग, अशुभ, 09:58–11:21
- चर, सामान्य, 11:21–12:45
- लाभ, शुभ, 12:45–14:09
- अमृत, शुभ, 14:09–15:32
- काल, अशुभ, 15:32–16:56
- शुभ, 16:56–18:20
- अमृत, शुभ, 18:20–19:56
- चर, सामान्य, 19:56–21:33
- रोग, अशुभ, 21:33–23:09
- काल, अशुभ, 23:09–00:46 शुक्र
- लाभ, शुभ, 00:46–02:22 शुक्र
- उद्वेग, अशुभ, 02:22–03:58 शुक्र
- शुभ, 03:58–05:35 शुक्र
- अमृत, शुभ, 05:35–07:11 शुक्र
- यमगण्ड, 07:10–08:34, अशुभ
- गुलिक काल, 09:58–11:21, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 10:53–11:38, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 12:23–13:07, शुभ
- राहु काल, 14:09–15:32, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 15:21–16:06, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 05:28–06:20 शुक्र
हर मान कैसे निकलता है
Sevan में सर्व पितृ अमावस्या गुरु 14 अक्टूबर को क्यों है?
सर्व पितृ अमावस्या गुरु 14 अक्टूबर को है: उस दिन पूरे अपराह्न में अमावस्या है, और किसी दिन नहीं।
सब पितरों का श्राद्ध अपराह्न में होता है, दिन का चौथा पाँचवाँ भाग। अमावस्या बुध 13 अक्टूबर को 18:47 से गुरु 14 अक्टूबर को 18:40 तक है, इसलिए केवल गुरुवार का अपराह्न (13:52–16:06) उसके भीतर है। सर्व पितृ अमावस्या का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; अपराह्न Tithika की परिपाटी है।
Sevan में अमावस्या गुरु 14 अक्टूबर को क्यों है?
अमावस्या गुरु 14 अक्टूबर को है: उस दिन सूर्योदय पर अमावस्या है।
अमावस्या सूर्योदय की तिथि से मानी जाती है। अमावस्या बुध 13 अक्टूबर को 18:47 से गुरु 14 अक्टूबर को 18:40 तक है, इसलिए वह केवल गुरु 14 अक्टूबर के सूर्योदय (07:10) पर है। अमावस्या का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्योदय Tithika की परिपाटी है।
गुरु 14 अक्टूबर को कौन सी तिथि है? कृष्ण अमावस्या
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 354.3° आगे था: कृष्ण अमावस्या।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 348°–360° तीसवीं है, कृष्ण अमावस्या। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 07:10। चतुर्दशी उससे पहले 18:47 बुध पर समाप्त हुई। अमावस्या 18:40 को समाप्त होगी, जब बढ़त 360° होगी। बढ़त 30 सितंबर की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
गुरु 14 अक्टूबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 05:28–06:19
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 05:28–06:19।
बुध 13 अक्टूबर की रात सूर्यास्त 18:21 बुध से सूर्योदय 07:10 तक थी, 12 घं 49 मि। इसे 51 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
गुरु 14 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:23–13:07
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:23–13:07।
गुरु 14 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 10:53–11:38
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:53–11:38 और 15:21–16:06।
गुरु 14 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 15:21–16:06
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:53–11:38 और 15:21–16:06।
यहाँ दिन, 07:10 से 18:20, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 44 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। गुरुवार को दुर्मुहूर्त छठा और बारहवाँ है, 10:53–11:38 और 15:21–16:06।
गुरु 14 अक्टूबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
07:10–08:34 शुभ है, जिसके स्वामी गुरु (बृहस्पति) हैं, गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 07:10 से 18:20, 1 घं 23 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 18:20 से 07:11 शुक्र, 1 घं 36 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
गुरु 14 अक्टूबर को राहुकाल कब है? 14:09–15:32
राहु काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 14:09–15:32।
गुरु 14 अक्टूबर को यमगंड कब है? 07:10–08:34
यमगण्ड गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 07:10–08:34।
गुरु 14 अक्टूबर को गुलिक काल कब है? 09:58–11:21
गुलिक काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 09:58–11:21।
यहाँ दिन 07:10 से 18:20 तक है, 11 घं 10 मि। इसे 1 घं 23 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: गुरुवार को राहु काल छठा भाग है, यमगण्ड पहला और गुलिक काल तीसरा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
गुरु 14 अक्टूबर को सूर्योदय कितने बजे है? 07:10
यहाँ दिन: सूर्योदय 07:10, सूर्यास्त 18:20, 11 घं 10 मि का दिन।
गुरु 14 अक्टूबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:20
यहाँ दिन: सूर्योदय 07:10, सूर्यास्त 18:20, 11 घं 10 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 10 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 51 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 10 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 51 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
गुरु 14 अक्टूबर को कौन सा नक्षत्र है? हस्त
सूर्योदय पर चंद्रमा 170.9° पर था: हस्त, पद 4।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। हस्त 160°00′–173°20′ तक है; चंद्रमा 170° पर उसके पद 4 में आया। वह 11:37 को निकलेगा, चित्रा में।
गुरु 14 अक्टूबर को कौन सा योग है? वैधृति
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 347.6° थे: वैधृति।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 176.7° + 170.9° = 347.6°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 346°40′–360°00′ सत्ताईसवाँ है, वैधृति। यह 04:35 शुक्र को समाप्त होता है, फिर विष्कम्भ।
गुरु 14 अक्टूबर को कौन सा करण है? नाग
सूर्योदय पर बढ़त 354.3° थी: अमावस्या का दूसरा आधा, नाग।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए अमावस्या का पहला आधा चतुष्पाद है और दूसरा नाग। चतुष्पाद 06:40 पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 354° हुई; नाग 18:40 तक है।
गुरु 14 अक्टूबर को कौन सा वार है, और कब से? गुरुवार
यह दिन गुरुवार को सूर्योदय, 07:10, पर शुरू हुआ: गुरुवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 07:10 से 07:11 शुक्र तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी गुरुवार के हैं।
गुरु 14 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? भाद्रपद
यह मास 15 सितंबर की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य सिंह में था: भाद्रपद।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: सिंह से भाद्रपद। सूर्य 17 सितंबर को, मास के भीतर, कन्या में जाता है। अगली अमावस्या, 14 अक्टूबर, उसे कन्या में पाती है और आश्विन शुरू करती है।
गुरु 14 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? आश्विन
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष आश्विन का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 14 अक्टूबर की अमावस्या, सूर्य कन्या में, आश्विन शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ आश्विन है, और अमान्त गणना में भाद्रपद।
गुरु 14 अक्टूबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2145 · शक 2010
विक्रम संवत 2145 23 मार्च 2088 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 23 मार्च 2088, 04:01 मंगल। तब से सूर्य तारों के बीच 198.5° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2145 गिनता है; शक संवत 2010।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
गुरु 14 अक्टूबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 18:12
चंद्रमा यहाँ 18:12 पर अस्त होता है।
चंद्रमा इस सूर्योदय और अगले के बीच उदय नहीं होता।
चंद्रमा 18:12 पर, दिन में, अस्त होता है और अगले सूर्योदय से पहले उदय नहीं होता।