tithika
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Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया का पंचांग गुरु 4 मार्च 2088

सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC+4 में

द्वादशी

शुक्ल पक्ष · 18:27 तक

फिर त्रयोदशी · 16:48 शुक्र तक

व्रत

प्रदोष व्रत

प्रदोष पूजा मुहूर्त
18:55⁠–⁠21:25
प्रदोष काल 18:55⁠–⁠21:25

प्रदोष व्रत गुरु 4 मार्च को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं। गुरु 4 मार्च क्यों?

प्रदोष व्रत: Sevan में हर तारीख़

व्रत का पारण

आमलकी एकादशी

पारण गुरु 4 मार्च, 07:27⁠–⁠18:27
आमलकी एकादशी: Sevan में हर तारीख़

सूर्योदय और सूर्यास्त

05:47 07:27 18:55अगला सूर्योदय 07:26 शुक्र

पंचांग

चौघड़िया

दिन का चौघड़िया

  • 07:27–08:53शुभयमगण्ड में
  • 08:53–10:19रोगअशुभ
  • 10:19–11:45उद्वेगअशुभ
  • 11:45–13:11चरसामान्य
  • 13:11–14:37लाभशुभ
  • 14:37–16:03अमृतराहु काल में
  • 16:03–17:29कालअशुभ
  • 17:29–18:55शुभ

रात का चौघड़िया

  • 18:55–20:29अमृतशुभ
  • 20:29–22:03चरसामान्य
  • 22:03–23:37रोगअशुभ
  • 23:37–01:10 शुक्रकालअशुभ
  • 01:10–02:44 शुक्रलाभशुभ
  • 02:44–04:18 शुक्रउद्वेगअशुभ
  • 04:18–05:52 शुक्रशुभ
  • 05:52–07:26 शुक्रअमृतशुभ

दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक

समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।

  • सूर्योदय से पहले, गुरु 4 मार्च: ब्रह्म मुहूर्त, 05:47–06:37, शुभ
  • शुभ, 07:27–08:53
  • रोग, अशुभ, 08:53–10:19
  • उद्वेग, अशुभ, 10:19–11:45
  • चर, सामान्य, 11:45–13:11
  • लाभ, शुभ, 13:11–14:37
  • अमृत, शुभ, 14:37–16:03
  • काल, अशुभ, 16:03–17:29
  • शुभ, 17:29–18:55
  • अमृत, शुभ, 18:55–20:29
  • चर, सामान्य, 20:29–22:03
  • रोग, अशुभ, 22:03–23:37
  • काल, अशुभ, 23:37–01:10 शुक्र
  • लाभ, शुभ, 01:10–02:44 शुक्र
  • उद्वेग, अशुभ, 02:44–04:18 शुक्र
  • शुभ, 04:18–05:52 शुक्र
  • अमृत, शुभ, 05:52–07:26 शुक्र
  • यमगण्ड, 07:27–08:53, अशुभ
  • गुलिक काल, 10:19–11:45, अशुभ
  • दुर्मुहूर्त, 11:17–12:02, अशुभ
  • अभिजीत मुहूर्त, 12:48–13:34, शुभ
  • राहु काल, 14:37–16:03, अशुभ
  • दुर्मुहूर्त, 15:52–16:38, अशुभ
  • अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 05:46–06:36 शुक्र

हर मान कैसे निकलता है

Sevan में प्रदोष व्रत गुरु 4 मार्च को क्यों है?

प्रदोष व्रत गुरु 4 मार्च को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं।

द्वादशी त्रयोदशी 18:27 16:00 20:00 22:00 गुरु 4 मार्च स्मार्त · वैष्णव प्रदोष काल 18:55–21:25
द्वादशी त्रयोदशी 18:27 16:00 20:00 22:00 गुरु 4 मार्च स्मार्त · वैष्णव प्रदोष काल 18:55–21:25
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: प्रदोष काल। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात।

प्रदोष की शिव पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। त्रयोदशी गुरु 4 मार्च को 18:27 से शुक्र 5 मार्च को 16:48 तक है, इसलिए केवल गुरुवार का प्रदोष काल (18:55–21:25) उसके भीतर है। प्रदोष व्रत का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; प्रदोष काल Tithika की परिपाटी है।

प्रदोष व्रत: Sevan में हर तारीख़

गुरु 4 मार्च को कौन सी तिथि है? शुक्ल द्वादशी

सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 138.1° आगे था: शुक्ल द्वादशी।

सूर्य अमावस्या 0° 138.1° चंद्रमा की बढ़त शुक्ल कृष्ण द्वादशी 132°–144° पूर्णिमा 180°
सूर्य अमावस्या 0° 138.1° चंद्रमा की बढ़त शुक्ल कृष्ण द्वादशी 132°–144° पूर्णिमा 180°
केंद्र में पृथ्वी · सूर्य ऊपर स्थिर · चंद्रमा वामावर्त चलता है · पैमाने पर नहीं

चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 132°–144° बारहवीं है, शुक्ल द्वादशी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 07:27। एकादशी उससे पहले 20:19 बुध पर समाप्त हुई। द्वादशी 18:27 को समाप्त होगी, जब बढ़त 144° होगी। बढ़त 22 फ़रवरी की अमावस्या पर 0° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा बढ़ रहा है: शुक्ल पक्ष।

गुरु 4 मार्च को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 05:47–06:37

ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 05:47–06:37।

सूर्यास्त 18:54 बुध सूर्योदय 07:27 गुरु समय, ऊँचाई नहीं बुध 3 मार्च का दिन 14 1
सूर्यास्त 18:54 बुध सूर्योदय 07:27 गुरु समय, ऊँचाई नहीं बुध 3 मार्च का दिन 1
रेखा के नीचे रात, 15 मुहूर्तों में, सूर्यास्त से दक्षिणावर्त · बुधवार का दिन धुँधला

बुध 3 मार्च की रात सूर्यास्त 18:54 बुध से सूर्योदय 07:27 तक थी, 12 घं 33 मि। इसे 50 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।

दिन के 15 मुहूर्त

गुरु 4 मार्च को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:48–13:34

अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:48–13:34।

गुरु 4 मार्च को दुर्मुहूर्त कब है? 11:17–12:02

दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 11:17–12:02 और 15:52–16:38।

गुरु 4 मार्च को दुर्मुहूर्त कब है? 15:52–16:38

दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 11:17–12:02 और 15:52–16:38।

सूर्योदय 07:27 सूर्यास्त 18:55 सूर्योदय 07:26 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं 8 6 12 1
सूर्योदय 07:27 सूर्यास्त 18:55 सूर्योदय 07:26 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं 8 6 1
रेखा के ऊपर दिन, 15 मुहूर्तों में · धारीदार: दुर्मुहूर्त 6, 12

यहाँ दिन, 07:27 से 18:55, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 45 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। गुरुवार को दुर्मुहूर्त छठा और बारहवाँ है, 11:17–12:02 और 15:52–16:38।

गुरु 4 मार्च का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?

07:27–08:53 शुभ है, जिसके स्वामी गुरु (बृहस्पति) हैं, गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।

सूर्योदय 07:27 सूर्यास्त 18:55 सूर्योदय 07:26 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं शुभ
सूर्योदय 07:27 सूर्यास्त 18:55 सूर्योदय 07:26 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं शुभ
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त

यहाँ दिन, 07:27 से 18:55, 1 घं 26 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।

यहाँ रात, 18:55 से 07:26 शुक्र, 1 घं 33 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।

दिन के 8 भाग

गुरु 4 मार्च को राहुकाल कब है? 14:37–16:03

राहु काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 14:37–16:03।

गुरु 4 मार्च को यमगंड कब है? 07:27–08:53

यमगण्ड गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 07:27–08:53।

गुरु 4 मार्च को गुलिक काल कब है? 10:19–11:45

गुलिक काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 10:19–11:45।

सूर्योदय 07:27 सूर्यास्त 18:55 सूर्योदय 07:26 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं 1 2 3 4 5 6 7 8
सूर्योदय 07:27 सूर्यास्त 18:55 सूर्योदय 07:26 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं 1 2 3 4 5 6 7 8
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त · धारीदार: यमगण्ड 1, गुलिक काल 3

यहाँ दिन 07:27 से 18:55 तक है, 11 घं 28 मि। इसे 1 घं 26 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: गुरुवार को राहु काल छठा भाग है, यमगण्ड पहला और गुलिक काल तीसरा।

सूर्योदय और सूर्यास्त

गुरु 4 मार्च को सूर्योदय कितने बजे है? 07:27

यहाँ दिन: सूर्योदय 07:27, सूर्यास्त 18:55, 11 घं 28 मि का दिन।

गुरु 4 मार्च को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:55

यहाँ दिन: सूर्योदय 07:27, सूर्यास्त 18:55, 11 घं 28 मि का दिन।

सूर्योदय 07:27 सूर्यास्त 18:55 सूर्योदय 07:26 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 05:49 शुक्र चंद्रोदय 15:55
सूर्योदय 07:27 सूर्यास्त 18:55 सूर्योदय 07:26 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 05:49 शुक्र चंद्रोदय 15:55
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त · भीतरी चाप: क्षितिज के ऊपर चंद्रमा

सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 28 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 31 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।

सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 28 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 31 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।

गुरु 4 मार्च को कौन सा नक्षत्र है? पुष्य

सूर्योदय पर चंद्रमा 97.5° पर था: पुष्य, पद 2।

चंद्रमा सूर्य 0° पुष्य चंद्रमा 97.5° अगला: अश्लेशा पृथ्वी
चंद्रमा सूर्य 0° पुष्य चंद्रमा 97.5° अगला: अश्लेशा पृथ्वी
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · 0° ऊपर, वामावर्त

स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। पुष्य 93°20′–106°40′ तक है; चंद्रमा 96°40′ पर उसके पद 2 में आया। वह 23:12 को निकलेगा, अश्लेशा में।

गुरु 4 मार्च को कौन सा योग है? शोभन

सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 416.9° थे, एक चक्कर और 56.9°: शोभन।

सूर्य 319.4° + चंद्रमा 97.5° = 416.9° एक चक्कर + 56.9° शोभन 53°20′–66°40′ चंद्रमा सूर्य 0°
सूर्य 319.4° + चंद्रमा 97.5° = 416.9° एक चक्कर + 56.9° शोभन 53°20′–66°40′ चंद्रमा सूर्य 0°
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · 0° ऊपर, वामावर्त

तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 319.4° + 97.5° = 416.9°, एक पूरा चक्कर और 56.9°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 53°20′–66°40′ पाँचवाँ है, शोभन। यह 23:03 को समाप्त होता है, फिर अतिगण्ड।

गुरु 4 मार्च को कौन सा करण है? बालव

सूर्योदय पर बढ़त 138.1° थी: द्वादशी का दूसरा आधा, बालव।

सूर्य अमावस्या 0° 138.1° चंद्रमा की बढ़त शुक्ल कृष्ण द्वादशी 132°–144° बालव 138°–144° पूर्णिमा 180°
सूर्य अमावस्या 0° 138.1° चंद्रमा की बढ़त शुक्ल कृष्ण द्वादशी 132°–144° बालव 138°–144° पूर्णिमा 180°
केंद्र में पृथ्वी · सूर्य ऊपर स्थिर · चंद्रमा वामावर्त चलता है · हर 12° की तिथि दो करणों में · पैमाने पर नहीं

करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए द्वादशी का पहला आधा बव है और दूसरा बालव। बव 07:21 पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 138° हुई; बालव 18:27 तक है।

गुरु 4 मार्च को कौन सा वार है, और कब से? गुरुवार

यह दिन गुरुवार को सूर्योदय, 07:27, पर शुरू हुआ: गुरुवार।

गुरुवार सूर्योदय 07:27 सूर्यास्त 18:55 सूर्योदय 07:26 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं 00:00 शुक्र अब भी गुरुवार
गुरुवार सूर्योदय 07:27 सूर्यास्त 18:55 सूर्योदय 07:26 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं 00:00 शुक्र अब भी गुरुवार
पहिये का एक चक्कर एक वार है, सूर्योदय से सूर्योदय · दक्षिणावर्त

हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 07:27 से 07:26 शुक्र तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी गुरुवार के हैं।

गुरु 4 मार्च को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? फाल्गुन

यह मास 22 फ़रवरी की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य कुंभ में था: फाल्गुन।

1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 कुंभ मीन 0° पृथ्वी
1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 कुंभ मीन 0° पृथ्वी
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · वलय: सूर्य का वार्षिक पथ, 30° की 12 राशियाँ, 0° से गिनी · अमावस्या से अमावस्या तक सूर्य का पथ

अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: कुंभ से फाल्गुन। सूर्य 14 मार्च को, मास के भीतर, मीन में जाता है। अगली अमावस्या, 23 मार्च, उसे मीन में पाती है और चैत्र शुरू करती है।

गुरु 4 मार्च को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? फाल्गुन

पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह शुक्ल पक्ष फाल्गुन का है।

अमान्त फाल्गुन पूर्णिमान्त फाल्गुन कृष्ण शुक्ल गुरु 4 मार्च पूर्णिमा 7 फ़र॰ अमावस्या 22 फ़र॰ पूर्णिमा 7 मार्च अमावस्या 23 मार्च
अमान्त फाल्गुन पूर्णिमान्त फाल्गुन कृष्ण शुक्ल गुरु 4 मार्च पूर्णिमा 7 फ़र॰ अमावस्या 22 फ़र॰ पूर्णिमा 7 मार्च अमावस्या 23 मार्च
समय बाएँ से दाएँ · अमान्त: अमावस्या से अमावस्या · पूर्णिमान्त: पूर्णिमा से पूर्णिमा

पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 22 फ़रवरी की अमावस्या ने, सूर्य कुंभ में, फाल्गुन शुरू किया। यह शुक्ल पक्ष दोनों गणनाओं में फाल्गुन है।

गुरु 4 मार्च को कौन सा संवत है? विक्रम 2144 · शक 2009

विक्रम संवत 2144 3 अप्रैल 2087 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।

1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 मीन 0° पृथ्वी चैत्र अमावस्या 3 अप्रैल 2087 13:27 · सूर्य मीन में सूर्योदय, गुरु 4 मार्च सूर्य 319.4° पर
1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 मीन 0° पृथ्वी चैत्र अमावस्या 3 अप्रैल 2087 13:27 · सूर्य मीन में सूर्योदय, गुरु 4 मार्च सूर्य 319.4° पर
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · वलय: सूर्य का वार्षिक पथ, 30° की 12 राशियाँ, 0° से गिनी · वर्ष के आरंभ से सूर्य का पथ

संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 3 अप्रैल 2087, 13:27 गुरु। तब से सूर्य तारों के बीच 330.6° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2144 गिनता है; शक संवत 2009।

चंद्रोदय और चंद्रास्त

गुरु 4 मार्च को चंद्रोदय कितने बजे है? 15:55

चंद्रमा यहाँ 15:55 पर उदय होता है।

गुरु 4 मार्च को चंद्रास्त कितने बजे है? 05:49 शुक्र

सूर्योदय 07:27 सूर्यास्त 18:55 सूर्योदय 07:26 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 05:49 शुक्र चंद्रोदय 15:55
सूर्योदय 07:27 सूर्यास्त 18:55 सूर्योदय 07:26 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 05:49 शुक्र चंद्रोदय 15:55
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त · भीतरी चाप: क्षितिज के ऊपर चंद्रमा

चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 15:55 पर, दिन में, उदय होता है; वह फिर 05:49 शुक्र पर अस्त होगा।

चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 15:55 पर उदय हुआ; वह फिर 05:49 शुक्र पर अस्त होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रास्त रात में पड़ता है।