Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया का पंचांग शुक्र 1 अक्टूबर 2077
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC+4 में
व्रत
पूर्णिमा
पूर्णिमा शुक्र 1 अक्टूबर को है: पूर्णिमा किसी सूर्योदय पर नहीं है, और उसी दिन मानी जाती है जिस दिन वह चलती है। शुक्र 1 अक्टूबर क्यों?
पूर्णिमा: Sevan में हर तारीख़1 अक्टूबर का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, शुक्र 1 अक्टूबर
- 05:19–06:07ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:56 से
- 08:24–09:53लाभ चौघड़ियागुलिक काल में
- 10:04–11:21अमृत चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 12:49–13:12अभिजीत मुहूर्तराहु काल छोड़कर
- 12:49–13:12शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 13:59–14:17शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- सूर्यास्त 18:41 के बाद
- 21:45–23:17लाभ चौघड़िया
- 00:49–02:21 शनिशुभ चौघड़िया
- 02:21–03:53 शनिअमृत चौघड़िया
-
04:28–05:51 शनिअमृत कालउत्तर भाद्रपद में
- 05:19–06:08 शनिअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:56–08:24चरसामान्य
- 08:24–09:53लाभगुलिक काल में
- 09:53–11:21अमृतशुभ
- 11:21–12:49कालअशुभ
- 12:49–14:17शुभ
- 14:17–15:45रोगअशुभ
- 15:45–17:13उद्वेगअशुभ
- 17:13–18:41चरसामान्य
रात का चौघड़िया
- 18:41–20:13रोगअशुभ
- 20:13–21:45कालअशुभ
- 21:45–23:17लाभशुभ
- 23:17–00:49 शनिउद्वेगअशुभ
- 00:49–02:21 शनिशुभ
- 02:21–03:53 शनिअमृतशुभ
- 03:53–05:25 शनिचरसामान्य
- 05:25–06:57 शनिरोगअशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, शुक्र 1 अक्टूबर: ब्रह्म मुहूर्त, 05:19–06:07, शुभ
- चर, सामान्य, 06:56–08:24
- लाभ, शुभ, 08:24–09:53
- अमृत, शुभ, 09:53–11:21
- काल, अशुभ, 11:21–12:49
- शुभ, 12:49–14:17
- रोग, अशुभ, 14:17–15:45
- उद्वेग, अशुभ, 15:45–17:13
- चर, सामान्य, 17:13–18:41
- रोग, अशुभ, 18:41–20:13
- काल, अशुभ, 20:13–21:45
- लाभ, शुभ, 21:45–23:17
- उद्वेग, अशुभ, 23:17–00:49 शनि
- शुभ, 00:49–02:21 शनि
- अमृत, शुभ, 02:21–03:53 शनि
- चर, सामान्य, 03:53–05:25 शनि
- रोग, अशुभ, 05:25–06:57 शनि
- गुलिक काल, 08:24–09:53, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 09:17–10:04, अशुभ
- राहु काल, 11:21–12:49, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 12:25–13:12, शुभ
- दुर्मुहूर्त, 13:12–13:59, अशुभ
- यमगण्ड, 15:45–17:13, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 05:19–06:08 शनि
हर मान कैसे निकलता है
Sevan में पूर्णिमा शुक्र 1 अक्टूबर को क्यों है?
पूर्णिमा शुक्र 1 अक्टूबर को है: पूर्णिमा किसी सूर्योदय पर नहीं है, और उसी दिन मानी जाती है जिस दिन वह चलती है।
पूर्णिमा सूर्योदय की तिथि से मानी जाती है। पूर्णिमा शुक्र 1 अक्टूबर को 09:16 पर, उस सूर्योदय के बाद, लगती है और शनि 2 अक्टूबर को 05:21 पर, अगले सूर्योदय से पहले, समाप्त होती है: वह किसी सूर्योदय पर नहीं है। ऐसी तिथि उसी दिन मानी जाती है जिस दिन वह चलती है: शुक्र 1 अक्टूबर। पूर्णिमा का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्योदय Tithika की परिपाटी है।
शुक्र 1 अक्टूबर को कौन सी तिथि है? शुक्ल चतुर्दशी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 166.6° आगे था: शुक्ल चतुर्दशी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 156°–168° चौदहवीं है, शुक्ल चतुर्दशी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:56। त्रयोदशी उससे पहले 13:03 गुरु पर समाप्त हुई। चतुर्दशी 09:16 को समाप्त होगी, जब बढ़त 168° होगी। बढ़त 17 सितंबर की अमावस्या पर 0° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा बढ़ रहा है: शुक्ल पक्ष।
पूर्णिमा क्षय क्यों है?
पूर्णिमा एक सूर्योदय के बाद शुरू हुई और अगले से पहले समाप्त, इसलिए यहाँ कोई दिन पूर्णिमा नहीं होता।
दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो। पूर्णिमा 09:16 को शुरू हुई और 05:21 शनि को समाप्त, 06:56 और 06:57 शनि के सूर्योदयों के बीच। शुक्रवार को चतुर्दशी है और शनिवार को प्रतिपदा: पूर्णिमा यहाँ क्षय तिथि है।
शुक्र 1 अक्टूबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 05:19–06:07
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 05:19–06:07।
गुरु 30 सितंबर की रात सूर्यास्त 18:43 गुरु से सूर्योदय 06:56 तक थी, 12 घं 13 मि। इसे 48 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
शुक्र 1 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:25–13:12
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:25–13:12।
शुक्र 1 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 09:17–10:04
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा और नौवाँ है: 09:17–10:04 और 13:12–13:59।
शुक्र 1 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 13:12–13:59
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा और नौवाँ है: 09:17–10:04 और 13:12–13:59।
यहाँ दिन, 06:56 से 18:41, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 47 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। शुक्रवार को दुर्मुहूर्त चौथा और नौवाँ है, 09:17–10:04 और 13:12–13:59।
शुक्र 1 अक्टूबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:56–08:24 चर है, जिसके स्वामी शुक्र हैं, शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, सामान्य माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:56 से 18:41, 1 घं 28 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 18:41 से 06:57 शनि, 1 घं 32 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
शुक्र 1 अक्टूबर को राहुकाल कब है? 11:21–12:49
राहु काल शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से चौथा है: 11:21–12:49।
शुक्र 1 अक्टूबर को यमगंड कब है? 15:45–17:13
यमगण्ड शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 15:45–17:13।
शुक्र 1 अक्टूबर को गुलिक काल कब है? 08:24–09:53
गुलिक काल शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से दूसरा है: 08:24–09:53।
यहाँ दिन 06:56 से 18:41 तक है, 11 घं 45 मि। इसे 1 घं 28 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: शुक्रवार को राहु काल चौथा भाग है, यमगण्ड सातवाँ और गुलिक काल दूसरा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
शुक्र 1 अक्टूबर को सूर्योदय कितने बजे है? 06:56
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:56, सूर्यास्त 18:41, 11 घं 45 मि का दिन।
शुक्र 1 अक्टूबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:41
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:56, सूर्यास्त 18:41, 11 घं 45 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 45 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 16 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 45 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 16 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
शुक्र 1 अक्टूबर को कौन सा नक्षत्र है? पूर्व भाद्रपद
सूर्योदय पर चंद्रमा 330.3° पर था: पूर्व भाद्रपद, पद 4।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। पूर्व भाद्रपद 320°00′–333°20′ तक है; चंद्रमा 330° पर उसके पद 4 में आया। वह 11:45 को निकलेगा, उत्तर भाद्रपद में।
शुक्र 1 अक्टूबर को कौन सा योग है? वृद्धि
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 494° थे, एक चक्कर और 134°: वृद्धि।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 163.7° + 330.3° = 494°, एक पूरा चक्कर और 134°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 133°20′–146°40′ ग्यारहवाँ है, वृद्धि। यह 01:43 शनि को समाप्त होता है, फिर ध्रुव।
शुक्र 1 अक्टूबर को कौन सा करण है? वणिज
सूर्योदय पर बढ़त 166.6° थी: चतुर्दशी का दूसरा आधा, वणिज।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए चतुर्दशी का पहला आधा गर है और दूसरा वणिज। गर 23:11 गुरु पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 162° हुई; वणिज 09:16 तक है।
शुक्र 1 अक्टूबर को कौन सा वार है, और कब से? शुक्रवार
यह दिन शुक्रवार को सूर्योदय, 06:56, पर शुरू हुआ: शुक्रवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:56 से 06:57 शनि तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी शुक्रवार के हैं।
शुक्र 1 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? आश्विन (अधिक)
17 सितंबर और 17 अक्टूबर की अमावस्याओं के बीच कोई संक्रांति नहीं: अधिक आश्विन।
सामान्यतः एक मास में एक संक्रांति होती है, सूर्य का नई राशि में प्रवेश। 17 सितंबर 09:54 शुक्र से 17 अक्टूबर 03:08 रवि तक सूर्य कन्या में रहा; तुला में वह अमावस्या के बाद 17 अक्टूबर 20:15 रवि को गया। बिना संक्रांति का मास अधिक आश्विन है, जो आश्विन से पहले आता है।
शुक्र 1 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? आश्विन (अधिक)
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह शुक्ल पक्ष आश्विन (अधिक) का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 17 सितंबर की अमावस्या ने, सूर्य कन्या में, आश्विन (अधिक) शुरू किया। यह शुक्ल पक्ष दोनों गणनाओं में आश्विन (अधिक) है।
शुक्र 1 अक्टूबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2134 · शक 1999
विक्रम संवत 2134 24 मार्च 2077 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 24 मार्च 2077, 12:25 बुध। तब से सूर्य तारों के बीच 184.3° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2134 गिनता है; शक संवत 1999।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
शुक्र 1 अक्टूबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 18:43
चंद्रमा यहाँ 18:43 पर उदय होता है।
चंद्रमा 18:43 पर, रात में, उदय होता है और अगले सूर्योदय से पहले अस्त नहीं होता।
चंद्रमा इस सूर्योदय और अगले के बीच अस्त नहीं होता।