Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया का पंचांग रवि 12 मई 2075
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC+4 में
व्रत
प्रदोष व्रत
प्रदोष व्रत रवि 12 मई को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं। रवि 12 मई क्यों?
प्रदोष व्रत: Sevan में हर तारीख़12 मई का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, रवि 12 मई
- 04:29–05:07ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 05:46 से
- 09:21–11:09लाभ चौघड़िया
- 11:09–12:56अमृत चौघड़िया
- 12:28–12:56अभिजीत मुहूर्तयमगण्ड छोड़कर
- 14:44–16:31शुभ चौघड़िया
-
15:40–16:31अमृत कालगुलिक काल छोड़कर · रेवती में
- सूर्यास्त 20:06 के बाद
- 20:06–21:19शुभ चौघड़िया
- 21:19–22:31अमृत चौघड़िया
- 02:08–03:20 सोमलाभ चौघड़िया
- 04:33–05:45 सोमशुभ चौघड़िया
- 04:28–05:07 सोमअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 05:46–07:34उद्वेगअशुभ
- 07:34–09:21चरसामान्य
- 09:21–11:09लाभशुभ
- 11:09–12:56अमृतशुभ
- 12:56–14:44कालअशुभ
- 14:44–16:31शुभ
- 16:31–18:19रोगअशुभ
- 18:19–20:06उद्वेगअशुभ
रात का चौघड़िया
- 20:06–21:19शुभ
- 21:19–22:31अमृतशुभ
- 22:31–23:43चरसामान्य
- 23:43–00:56 सोमरोगअशुभ
- 00:56–02:08 सोमकालअशुभ
- 02:08–03:20 सोमलाभशुभ
- 03:20–04:33 सोमउद्वेगअशुभ
- 04:33–05:45 सोमशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, रवि 12 मई: ब्रह्म मुहूर्त, 04:29–05:07, शुभ
- उद्वेग, अशुभ, 05:46–07:34
- चर, सामान्य, 07:34–09:21
- लाभ, शुभ, 09:21–11:09
- अमृत, शुभ, 11:09–12:56
- काल, अशुभ, 12:56–14:44
- शुभ, 14:44–16:31
- रोग, अशुभ, 16:31–18:19
- उद्वेग, अशुभ, 18:19–20:06
- शुभ, 20:06–21:19
- अमृत, शुभ, 21:19–22:31
- चर, सामान्य, 22:31–23:43
- रोग, अशुभ, 23:43–00:56 सोम
- काल, अशुभ, 00:56–02:08 सोम
- लाभ, शुभ, 02:08–03:20 सोम
- उद्वेग, अशुभ, 03:20–04:33 सोम
- शुभ, 04:33–05:45 सोम
- अभिजीत मुहूर्त, 12:28–13:25, शुभ
- यमगण्ड, 12:56–14:44, अशुभ
- गुलिक काल, 16:31–18:19, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 18:12–19:09, अशुभ
- राहु काल, 18:19–20:06, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:28–05:07 सोम
हर मान कैसे निकलता है
Sevan में प्रदोष व्रत रवि 12 मई को क्यों है?
प्रदोष व्रत रवि 12 मई को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं।
प्रदोष की शिव पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। त्रयोदशी शनि 11 मई को 23:53 से सोम 13 मई को 00:38 तक है, इसलिए केवल रविवार का प्रदोष काल (20:06–22:02) उसके भीतर है। प्रदोष व्रत का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; प्रदोष काल Tithika की परिपाटी है।
रवि 12 मई को कौन सी तिथि है? कृष्ण त्रयोदशी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 326.9° आगे था: कृष्ण त्रयोदशी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 324°–336° अट्ठाईसवीं है, कृष्ण त्रयोदशी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 05:46। द्वादशी उससे पहले 23:53 शनि पर समाप्त हुई। त्रयोदशी 00:38 सोम को समाप्त होगी, जब बढ़त 336° होगी। बढ़त 30 अप्रैल की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
रवि 12 मई को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:29–05:07
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:29–05:07।
शनि 11 मई की रात सूर्यास्त 20:05 शनि से सूर्योदय 05:46 तक थी, 9 घं 41 मि। इसे 38 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
रवि 12 मई को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:28–13:25
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:28–13:25।
रवि 12 मई को दुर्मुहूर्त कब है? 18:12–19:09
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 18:12–19:09।
यहाँ दिन, 05:46 से 20:06, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 57 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। रविवार को दुर्मुहूर्त चौदहवाँ है, 18:12–19:09।
रवि 12 मई का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
05:46–07:34 उद्वेग है, जिसके स्वामी सूर्य हैं, रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 05:46 से 20:06, 1 घं 47 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 20:06 से 05:45 सोम, 1 घं 12 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
रवि 12 मई को राहुकाल कब है? 18:19–20:06
राहु काल रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से आठवाँ है: 18:19–20:06।
रवि 12 मई को यमगंड कब है? 12:56–14:44
यमगण्ड रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पाँचवाँ है: 12:56–14:44।
रवि 12 मई को गुलिक काल कब है? 16:31–18:19
गुलिक काल रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 16:31–18:19।
यहाँ दिन 05:46 से 20:06 तक है, 14 घं 20 मि। इसे 1 घं 47 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: रविवार को राहु काल आठवाँ भाग है, यमगण्ड पाँचवाँ और गुलिक काल सातवाँ।
सूर्योदय और सूर्यास्त
रवि 12 मई को सूर्योदय कितने बजे है? 05:46
यहाँ दिन: सूर्योदय 05:46, सूर्यास्त 20:06, 14 घं 20 मि का दिन।
रवि 12 मई को सूर्यास्त कितने बजे है? 20:06
यहाँ दिन: सूर्योदय 05:46, सूर्यास्त 20:06, 14 घं 20 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 14 घं 20 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 9 घं 39 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 14 घं 20 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 9 घं 39 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
रवि 12 मई को कौन सा नक्षत्र है? रेवती
सूर्योदय पर चंद्रमा 353.5° पर था: रेवती, पद 3।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। रेवती 346°40′–360°00′ तक है; चंद्रमा 353°20′ पर उसके पद 3 में आया। वह 18:12 को निकलेगा, अश्विनी में।
रवि 12 मई को कौन सा योग है? प्रीति
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 380.1° थे, एक चक्कर और 20.1°: प्रीति।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 26.6° + 353.5° = 380.1°, एक पूरा चक्कर और 20.1°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 13°20′–26°40′ दूसरा है, प्रीति। यह 17:25 को समाप्त होता है, फिर आयुष्मान्।
रवि 12 मई को कौन सा करण है? गर
सूर्योदय पर बढ़त 326.9° थी: त्रयोदशी का पहला आधा, गर।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए त्रयोदशी का पहला आधा गर है और दूसरा वणिज। गर 12:13 तक है, जब बढ़त 330° होगी; वणिज 00:38 सोम तक।
रवि 12 मई को कौन सा वार है, और कब से? रविवार
यह दिन रविवार को सूर्योदय, 05:46, पर शुरू हुआ: रविवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 05:46 से 05:45 सोम तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी रविवार के हैं।
रवि 12 मई को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? वैशाख (अधिक)
15 अप्रैल और 15 मई की अमावस्याओं के बीच कोई संक्रांति नहीं: अधिक वैशाख।
सामान्यतः एक मास में एक संक्रांति होती है, सूर्य का नई राशि में प्रवेश। 15 अप्रैल 12:56 सोम से 15 मई 03:23 बुध तक सूर्य मेष में रहा; वृषभ में वह अमावस्या के बाद 15 मई 18:09 बुध को गया। बिना संक्रांति का मास अधिक वैशाख है, जो वैशाख से पहले आता है।
रवि 12 मई को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? वैशाख (अधिक)
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष वैशाख (अधिक) का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 15 मई की अमावस्या, सूर्य मेष में, वैशाख (अधिक) शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ वैशाख (अधिक) है, और अमान्त गणना में वैशाख (अधिक)।
रवि 12 मई को कौन सा संवत है? विक्रम 2132 · शक 1997
विक्रम संवत 2132 16 मार्च 2075 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 16 मार्च 2075, 23:26 शनि। तब से सूर्य तारों के बीच 55.2° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2132 गिनता है; शक संवत 1997।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
रवि 12 मई को चंद्रोदय कितने बजे है? 05:13 सोम
चंद्रमा यहाँ 05:13 सोम पर उदय होता है।
रवि 12 मई को चंद्रास्त कितने बजे है? 17:32
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 17:32 पर अस्त हुआ; वह फिर 05:13 सोम पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 17:32 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 05:13 सोम पर उदय होगा।