Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया का पंचांग शनि 18 मई 2069
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC+4 में
व्रत
प्रदोष व्रत
प्रदोष व्रत शनि 18 मई को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं। शनि 18 मई क्यों?
प्रदोष व्रत: Sevan में हर तारीख़व्रत का पारण
अपरा एकादशी
18 मई का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, शनि 18 मई
- 04:24–05:02ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 05:40 से
- 07:36–09:18शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
-
11:07–12:27अमृत कालराहु काल छोड़कर · रेवती में
- 12:27–13:25अभिजीत मुहूर्त
- 14:45–16:34लाभ चौघड़ियायमगण्ड में
- 16:34–18:23अमृत चौघड़िया
- सूर्यास्त 20:13 के बाद
- 20:13–21:23लाभ चौघड़िया
- 22:34–23:45शुभ चौघड़िया
- 23:45–00:56 रविअमृत चौघड़िया
-
04:09–05:35 रविअमृत कालअश्विनी में
- 04:28–05:39 रविलाभ चौघड़िया
- 04:24–05:02 रविअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 05:40–07:29कालअशुभ
- 07:29–09:18शुभ
- 09:18–11:07रोगअशुभ
- 11:07–12:56उद्वेगअशुभ
- 12:56–14:45चरसामान्य
- 14:45–16:34लाभयमगण्ड में
- 16:34–18:23अमृतशुभ
- 18:23–20:13कालअशुभ
रात का चौघड़िया
- 20:13–21:23लाभशुभ
- 21:23–22:34उद्वेगअशुभ
- 22:34–23:45शुभ
- 23:45–00:56 रविअमृतशुभ
- 00:56–02:07 रविचरसामान्य
- 02:07–03:18 रविरोगअशुभ
- 03:18–04:28 रविकालअशुभ
- 04:28–05:39 रविलाभशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, शनि 18 मई: ब्रह्म मुहूर्त, 04:24–05:02, शुभ
- काल, अशुभ, 05:40–07:29
- शुभ, 07:29–09:18
- रोग, अशुभ, 09:18–11:07
- उद्वेग, अशुभ, 11:07–12:56
- चर, सामान्य, 12:56–14:45
- लाभ, शुभ, 14:45–16:34
- अमृत, शुभ, 16:34–18:23
- काल, अशुभ, 18:23–20:13
- लाभ, शुभ, 20:13–21:23
- उद्वेग, अशुभ, 21:23–22:34
- शुभ, 22:34–23:45
- अमृत, शुभ, 23:45–00:56 रवि
- चर, सामान्य, 00:56–02:07 रवि
- रोग, अशुभ, 02:07–03:18 रवि
- काल, अशुभ, 03:18–04:28 रवि
- लाभ, शुभ, 04:28–05:39 रवि
- गुलिक काल, 05:40–07:29, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 05:40–06:38, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 06:38–07:36, अशुभ
- राहु काल, 09:18–11:07, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 12:27–13:25, शुभ
- यमगण्ड, 14:45–16:34, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:24–05:02 रवि
हर मान कैसे निकलता है
Sevan में प्रदोष व्रत शनि 18 मई को क्यों है?
प्रदोष व्रत शनि 18 मई को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं।
प्रदोष की शिव पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। त्रयोदशी शनि 18 मई को 08:21 से रवि 19 मई को 04:59 तक है, इसलिए केवल शनिवार का प्रदोष काल (20:13–22:06) उसके भीतर है। प्रदोष व्रत का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; प्रदोष काल Tithika की परिपाटी है।
शनि 18 मई को कौन सी तिथि है? कृष्ण द्वादशी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 322.4° आगे था: कृष्ण द्वादशी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 312°–324° सत्ताईसवीं है, कृष्ण द्वादशी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 05:40। एकादशी उससे पहले 11:30 शुक्र पर समाप्त हुई। द्वादशी 08:21 को समाप्त होगी, जब बढ़त 324° होगी। बढ़त 6 मई की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
त्रयोदशी क्षय क्यों है?
त्रयोदशी एक सूर्योदय के बाद शुरू हुई और अगले से पहले समाप्त, इसलिए यहाँ कोई दिन त्रयोदशी नहीं होता।
दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो। त्रयोदशी 08:21 को शुरू हुई और 04:59 रवि को समाप्त, 05:40 और 05:39 रवि के सूर्योदयों के बीच। शनिवार को द्वादशी है और रविवार को चतुर्दशी: त्रयोदशी यहाँ क्षय तिथि है।
शनि 18 मई को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:24–05:02
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:24–05:02।
शुक्र 17 मई की रात सूर्यास्त 20:12 शुक्र से सूर्योदय 05:40 तक थी, 9 घं 28 मि। इसे 37 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
शनि 18 मई को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:27–13:25
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:27–13:25।
शनि 18 मई को दुर्मुहूर्त कब है? 05:40–06:38
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से पहला और दूसरा है: 05:40–06:38 और 06:38–07:36।
शनि 18 मई को दुर्मुहूर्त कब है? 06:38–07:36
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से पहला और दूसरा है: 05:40–06:38 और 06:38–07:36।
यहाँ दिन, 05:40 से 20:13, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 58 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। शनिवार को दुर्मुहूर्त पहला और दूसरा है, 05:40–06:38 और 06:38–07:36।
शनि 18 मई का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
05:40–07:29 काल है, जिसके स्वामी शनि हैं, शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 05:40 से 20:13, 1 घं 49 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 20:13 से 05:39 रवि, 1 घं 10 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
शनि 18 मई को राहुकाल कब है? 09:18–11:07
राहु काल शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 09:18–11:07।
शनि 18 मई को यमगंड कब है? 14:45–16:34
यमगण्ड शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 14:45–16:34।
शनि 18 मई को गुलिक काल कब है? 05:40–07:29
गुलिक काल शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 05:40–07:29।
यहाँ दिन 05:40 से 20:13 तक है, 14 घं 33 मि। इसे 1 घं 49 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: शनिवार को राहु काल तीसरा भाग है, यमगण्ड छठा और गुलिक काल पहला।
सूर्योदय और सूर्यास्त
शनि 18 मई को सूर्योदय कितने बजे है? 05:40
यहाँ दिन: सूर्योदय 05:40, सूर्यास्त 20:13, 14 घं 33 मि का दिन।
शनि 18 मई को सूर्यास्त कितने बजे है? 20:13
यहाँ दिन: सूर्योदय 05:40, सूर्यास्त 20:13, 14 घं 33 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 14 घं 33 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 9 घं 26 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 14 घं 33 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 9 घं 26 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
शनि 18 मई को कौन सा नक्षत्र है? रेवती
सूर्योदय पर चंद्रमा 355.4° पर था: रेवती, पद 3।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। रेवती 346°40′–360°00′ तक है; चंद्रमा 353°20′ पर उसके पद 3 में आया। वह 13:10 को निकलेगा, अश्विनी में।
शनि 18 मई को कौन सा योग है? आयुष्मान्
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 388.3° थे, एक चक्कर और 28.3°: आयुष्मान्।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 32.9° + 355.4° = 388.3°, एक पूरा चक्कर और 28.3°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 26°40′–40°00′ तीसरा है, आयुष्मान्। यह 23:25 को समाप्त होता है, फिर सौभाग्य।
शनि 18 मई को कौन सा करण है? तैतिल
सूर्योदय पर बढ़त 322.4° थी: द्वादशी का दूसरा आधा, तैतिल।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए द्वादशी का पहला आधा कौलव है और दूसरा तैतिल। कौलव 21:58 शुक्र पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 318° हुई; तैतिल 08:21 तक है।
शनि 18 मई को कौन सा वार है, और कब से? शनिवार
यह दिन शनिवार को सूर्योदय, 05:40, पर शुरू हुआ: शनिवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 05:40 से 05:39 रवि तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी शनिवार के हैं।
शनि 18 मई को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? वैशाख
यह मास 21 अप्रैल की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य मेष में था: वैशाख।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: मेष से वैशाख। सूर्य 15 मई को, मास के भीतर, वृषभ में जाता है। अगली अमावस्या, 20 मई, उसे वृषभ में पाती है और ज्येष्ठ शुरू करती है।
शनि 18 मई को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? ज्येष्ठ
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष ज्येष्ठ का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 20 मई की अमावस्या, सूर्य वृषभ में, ज्येष्ठ शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ ज्येष्ठ है, और अमान्त गणना में वैशाख।
शनि 18 मई को कौन सा संवत है? विक्रम 2126 · शक 1991
विक्रम संवत 2126 23 मार्च 2069 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 23 मार्च 2069, 05:14 शनि। तब से सूर्य तारों के बीच 54.7° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2126 गिनता है; शक संवत 1991।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
शनि 18 मई को चंद्रोदय कितने बजे है? 04:30 रवि
चंद्रमा यहाँ 04:30 रवि पर उदय होता है।
शनि 18 मई को चंद्रास्त कितने बजे है? 17:33
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 17:33 पर अस्त हुआ; वह फिर 04:30 रवि पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 17:33 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 04:30 रवि पर उदय होगा।