Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया का पंचांग गुरु 18 अप्रैल 2030
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC+4 में
त्योहार
हनुमान जयंती
हनुमान जयंती गुरु 18 अप्रैल को है: उस दिन सूर्योदय पर पूर्णिमा है। गुरु 18 अप्रैल क्यों?
हनुमान जयंती: Sevan में हर तारीख़व्रत
पूर्णिमा
पूर्णिमा गुरु 18 अप्रैल को है: उस दिन सूर्योदय पर पूर्णिमा है। गुरु 18 अप्रैल क्यों?
पूर्णिमा: Sevan में हर तारीख़18 अप्रैल का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, गुरु 18 अप्रैल
- 04:52–05:34ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:17 से
- 06:17–07:57शुभ चौघड़ियायमगण्ड में
- 12:32–13:26अभिजीत मुहूर्त
- 12:59–14:40लाभ चौघड़िया
- 14:40–16:20अमृत चौघड़ियाराहु काल में
- 18:01–19:42शुभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 19:42 के बाद
- 19:42–21:01अमृत चौघड़िया
- 00:58–02:18 शुक्रलाभ चौघड़िया
-
01:11–02:36 शुक्रअमृत कालस्वाती में
- 03:37–04:56 शुक्रशुभ चौघड़िया
- 04:56–06:15 शुक्रअमृत चौघड़िया
- 04:51–05:33 शुक्रअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:17–07:57शुभयमगण्ड में
- 07:57–09:38रोगअशुभ
- 09:38–11:19उद्वेगअशुभ
- 11:19–12:59चरसामान्य
- 12:59–14:40लाभशुभ
- 14:40–16:20अमृतराहु काल में
- 16:20–18:01कालअशुभ
- 18:01–19:42शुभ
रात का चौघड़िया
- 19:42–21:01अमृतशुभ
- 21:01–22:20चरसामान्य
- 22:20–23:39रोगअशुभ
- 23:39–00:58 शुक्रकालअशुभ
- 00:58–02:18 शुक्रलाभशुभ
- 02:18–03:37 शुक्रउद्वेगअशुभ
- 03:37–04:56 शुक्रशुभ
- 04:56–06:15 शुक्रअमृतशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, गुरु 18 अप्रैल: ब्रह्म मुहूर्त, 04:52–05:34, शुभ
- शुभ, 06:17–07:57
- रोग, अशुभ, 07:57–09:38
- उद्वेग, अशुभ, 09:38–11:19
- चर, सामान्य, 11:19–12:59
- लाभ, शुभ, 12:59–14:40
- अमृत, शुभ, 14:40–16:20
- काल, अशुभ, 16:20–18:01
- शुभ, 18:01–19:42
- अमृत, शुभ, 19:42–21:01
- चर, सामान्य, 21:01–22:20
- रोग, अशुभ, 22:20–23:39
- काल, अशुभ, 23:39–00:58 शुक्र
- लाभ, शुभ, 00:58–02:18 शुक्र
- उद्वेग, अशुभ, 02:18–03:37 शुक्र
- शुभ, 03:37–04:56 शुक्र
- अमृत, शुभ, 04:56–06:15 शुक्र
- यमगण्ड, 06:17–07:57, अशुभ
- गुलिक काल, 09:38–11:19, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 10:45–11:39, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 12:32–13:26, शुभ
- राहु काल, 14:40–16:20, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 16:07–17:01, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:51–05:33 शुक्र
हर मान कैसे निकलता है
Sevan में हनुमान जयंती गुरु 18 अप्रैल को क्यों है?
हनुमान जयंती गुरु 18 अप्रैल को है: उस दिन सूर्योदय पर पूर्णिमा है।
हनुमान जयंती सूर्योदय की तिथि से मानी जाती है। पूर्णिमा बुध 17 अप्रैल को 10:48 से गुरु 18 अप्रैल को 07:20 तक है, इसलिए वह केवल गुरु 18 अप्रैल के सूर्योदय (06:17) पर है। हनुमान जयंती का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्योदय Tithika की परिपाटी है।
Sevan में पूर्णिमा गुरु 18 अप्रैल को क्यों है?
पूर्णिमा गुरु 18 अप्रैल को है: उस दिन सूर्योदय पर पूर्णिमा है।
पूर्णिमा सूर्योदय की तिथि से मानी जाती है। पूर्णिमा बुध 17 अप्रैल को 10:48 से गुरु 18 अप्रैल को 07:20 तक है, इसलिए वह केवल गुरु 18 अप्रैल के सूर्योदय (06:17) पर है। पूर्णिमा का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्योदय Tithika की परिपाटी है।
गुरु 18 अप्रैल को कौन सी तिथि है? शुक्ल पूर्णिमा
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 179.4° आगे था: शुक्ल पूर्णिमा।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 168°–180° पंद्रहवीं है, शुक्ल पूर्णिमा। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:17। चतुर्दशी उससे पहले 10:48 बुध पर समाप्त हुई। पूर्णिमा 07:20 को समाप्त होगी, जब बढ़त 180° होगी। बढ़त 3 अप्रैल की अमावस्या पर 0° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा बढ़ रहा है: शुक्ल पक्ष।
प्रतिपदा क्षय क्यों है?
प्रतिपदा एक सूर्योदय के बाद शुरू हुई और अगले से पहले समाप्त, इसलिए यहाँ कोई दिन प्रतिपदा नहीं होता।
दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो। प्रतिपदा 07:20 को शुरू हुई और 03:42 शुक्र को समाप्त, 06:17 और 06:15 शुक्र के सूर्योदयों के बीच। गुरुवार को पूर्णिमा है और शुक्रवार को द्वितीया: प्रतिपदा यहाँ क्षय तिथि है।
गुरु 18 अप्रैल को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:52–05:34
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:52–05:34।
बुध 17 अप्रैल की रात सूर्यास्त 19:41 बुध से सूर्योदय 06:17 तक थी, 10 घं 36 मि। इसे 42 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
गुरु 18 अप्रैल को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:32–13:26
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:32–13:26।
गुरु 18 अप्रैल को दुर्मुहूर्त कब है? 10:45–11:39
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:45–11:39 और 16:07–17:01।
गुरु 18 अप्रैल को दुर्मुहूर्त कब है? 16:07–17:01
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:45–11:39 और 16:07–17:01।
यहाँ दिन, 06:17 से 19:42, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 53 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। गुरुवार को दुर्मुहूर्त छठा और बारहवाँ है, 10:45–11:39 और 16:07–17:01।
गुरु 18 अप्रैल का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:17–07:57 शुभ है, जिसके स्वामी गुरु (बृहस्पति) हैं, गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:17 से 19:42, 1 घं 40 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 19:42 से 06:15 शुक्र, 1 घं 19 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
गुरु 18 अप्रैल को राहुकाल कब है? 14:40–16:20
राहु काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 14:40–16:20।
गुरु 18 अप्रैल को यमगंड कब है? 06:17–07:57
यमगण्ड गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 06:17–07:57।
गुरु 18 अप्रैल को गुलिक काल कब है? 09:38–11:19
गुलिक काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 09:38–11:19।
यहाँ दिन 06:17 से 19:42 तक है, 13 घं 25 मि। इसे 1 घं 40 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: गुरुवार को राहु काल छठा भाग है, यमगण्ड पहला और गुलिक काल तीसरा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
गुरु 18 अप्रैल को सूर्योदय कितने बजे है? 06:17
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:17, सूर्यास्त 19:42, 13 घं 25 मि का दिन।
गुरु 18 अप्रैल को सूर्यास्त कितने बजे है? 19:42
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:17, सूर्यास्त 19:42, 13 घं 25 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 13 घं 25 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 10 घं 33 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 13 घं 25 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 10 घं 33 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
गुरु 18 अप्रैल को कौन सा नक्षत्र है? चित्रा
सूर्योदय पर चंद्रमा 183.2° पर था: चित्रा, पद 3।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। चित्रा 173°20′–186°40′ तक है; चंद्रमा 180° पर उसके पद 3 में आया। वह 11:47 को निकलेगा, स्वाती में।
गुरु 18 अप्रैल को कौन सा योग है? वज्र
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 187° थे: वज्र।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 3.8° + 183.2° = 187°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 186°40′–200°00′ पंद्रहवाँ है, वज्र। यह 01:37 शुक्र को समाप्त होता है, फिर सिद्धि।
गुरु 18 अप्रैल को कौन सा करण है? बव
सूर्योदय पर बढ़त 179.4° थी: पूर्णिमा का दूसरा आधा, बव।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए पूर्णिमा का पहला आधा विष्टि है और दूसरा बव। विष्टि 21:05 बुध पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 174° हुई; बव 07:20 तक है।
गुरु 18 अप्रैल को कौन सा वार है, और कब से? गुरुवार
यह दिन गुरुवार को सूर्योदय, 06:17, पर शुरू हुआ: गुरुवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:17 से 06:15 शुक्र तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी गुरुवार के हैं।
गुरु 18 अप्रैल को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? चैत्र
यह मास 3 अप्रैल की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य मीन में था: चैत्र।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: मीन से चैत्र। सूर्य 14 अप्रैल को, मास के भीतर, मेष में जाता है। अगली अमावस्या, 2 मई, उसे मेष में पाती है और वैशाख शुरू करती है।
गुरु 18 अप्रैल को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? चैत्र
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह शुक्ल पक्ष चैत्र का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 3 अप्रैल की अमावस्या ने, सूर्य मीन में, चैत्र शुरू किया। यह शुक्ल पक्ष दोनों गणनाओं में चैत्र है।
गुरु 18 अप्रैल को कौन सा संवत है? विक्रम 2087 · शक 1952
विक्रम संवत 2087 3 अप्रैल 2030 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 3 अप्रैल 2030, 02:02 बुध। तब से सूर्य तारों के बीच 14.9° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2087 गिनता है; शक संवत 1952।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
गुरु 18 अप्रैल को चंद्रोदय कितने बजे है? 20:25
चंद्रमा यहाँ 20:25 पर उदय होता है।
चंद्रमा 20:25 पर, रात में, उदय होता है और अगले सूर्योदय से पहले अस्त नहीं होता।
चंद्रमा इस सूर्योदय और अगले के बीच अस्त नहीं होता।