Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया का पंचांग रवि 24 मार्च 2030
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC+4 में
24 मार्च का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, रवि 24 मार्च
- 05:23–06:10ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:57 से
-
09:50–11:19अमृत कालअनुराधा में
- 10:01–11:34लाभ चौघड़िया
- 11:34–13:06अमृत चौघड़िया
- 12:42–13:06अभिजीत मुहूर्तयमगण्ड छोड़कर
- 14:38–16:11शुभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 19:16 के बाद
- 19:16–20:43शुभ चौघड़िया
- 20:43–22:10अमृत चौघड़िया
- 02:33–04:00 सोमलाभ चौघड़िया
- 05:28–06:55 सोमशुभ चौघड़िया
- 05:22–06:08 सोमअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:57–08:29उद्वेगअशुभ
- 08:29–10:01चरसामान्य
- 10:01–11:34लाभशुभ
- 11:34–13:06अमृतशुभ
- 13:06–14:38कालअशुभ
- 14:38–16:11शुभ
- 16:11–17:43रोगअशुभ
- 17:43–19:16उद्वेगअशुभ
रात का चौघड़िया
- 19:16–20:43शुभ
- 20:43–22:10अमृतशुभ
- 22:10–23:38चरसामान्य
- 23:38–01:05 सोमरोगअशुभ
- 01:05–02:33 सोमकालअशुभ
- 02:33–04:00 सोमलाभशुभ
- 04:00–05:28 सोमउद्वेगअशुभ
- 05:28–06:55 सोमशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, रवि 24 मार्च: ब्रह्म मुहूर्त, 05:23–06:10, शुभ
- उद्वेग, अशुभ, 06:57–08:29
- चर, सामान्य, 08:29–10:01
- लाभ, शुभ, 10:01–11:34
- अमृत, शुभ, 11:34–13:06
- काल, अशुभ, 13:06–14:38
- शुभ, 14:38–16:11
- रोग, अशुभ, 16:11–17:43
- उद्वेग, अशुभ, 17:43–19:16
- शुभ, 19:16–20:43
- अमृत, शुभ, 20:43–22:10
- चर, सामान्य, 22:10–23:38
- रोग, अशुभ, 23:38–01:05 सोम
- काल, अशुभ, 01:05–02:33 सोम
- लाभ, शुभ, 02:33–04:00 सोम
- उद्वेग, अशुभ, 04:00–05:28 सोम
- शुभ, 05:28–06:55 सोम
- अभिजीत मुहूर्त, 12:42–13:31, शुभ
- यमगण्ड, 13:06–14:38, अशुभ
- गुलिक काल, 16:11–17:43, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 17:37–18:26, अशुभ
- राहु काल, 17:43–19:16, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 05:22–06:08 सोम
हर मान कैसे निकलता है
रवि 24 मार्च को कौन सी तिथि है? कृष्ण पञ्चमी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 239.9° आगे था: कृष्ण पञ्चमी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 228°–240° बीसवीं है, कृष्ण पञ्चमी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:57। चतुर्थी उससे पहले 09:46 शनि पर समाप्त हुई। पञ्चमी 07:02 को समाप्त होगी, जब बढ़त 240° होगी। बढ़त 19 मार्च की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
षष्ठी क्षय क्यों है?
षष्ठी एक सूर्योदय के बाद शुरू हुई और अगले से पहले समाप्त, इसलिए यहाँ कोई दिन षष्ठी नहीं होता।
दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो। षष्ठी 07:02 को शुरू हुई और 04:39 सोम को समाप्त, 06:57 और 06:55 सोम के सूर्योदयों के बीच। रविवार को पञ्चमी है और सोमवार को सप्तमी: षष्ठी यहाँ क्षय तिथि है।
रवि 24 मार्च को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 05:23–06:10
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 05:23–06:10।
शनि 23 मार्च की रात सूर्यास्त 19:15 शनि से सूर्योदय 06:57 तक थी, 11 घं 42 मि। इसे 46 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
रवि 24 मार्च को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:42–13:31
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:42–13:31।
रवि 24 मार्च को दुर्मुहूर्त कब है? 17:37–18:26
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 17:37–18:26।
यहाँ दिन, 06:57 से 19:16, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 49 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। रविवार को दुर्मुहूर्त चौदहवाँ है, 17:37–18:26।
रवि 24 मार्च का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:57–08:29 उद्वेग है, जिसके स्वामी सूर्य हैं, रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:57 से 19:16, 1 घं 32 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 19:16 से 06:55 सोम, 1 घं 27 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
रवि 24 मार्च को राहुकाल कब है? 17:43–19:16
राहु काल रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से आठवाँ है: 17:43–19:16।
रवि 24 मार्च को यमगंड कब है? 13:06–14:38
यमगण्ड रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पाँचवाँ है: 13:06–14:38।
रवि 24 मार्च को गुलिक काल कब है? 16:11–17:43
गुलिक काल रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 16:11–17:43।
यहाँ दिन 06:57 से 19:16 तक है, 12 घं 19 मि। इसे 1 घं 32 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: रविवार को राहु काल आठवाँ भाग है, यमगण्ड पाँचवाँ और गुलिक काल सातवाँ।
सूर्योदय और सूर्यास्त
रवि 24 मार्च को सूर्योदय कितने बजे है? 06:57
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:57, सूर्यास्त 19:16, 12 घं 19 मि का दिन।
रवि 24 मार्च को सूर्यास्त कितने बजे है? 19:16
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:57, सूर्यास्त 19:16, 12 घं 19 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 19 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 39 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 19 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 39 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
रवि 24 मार्च को कौन सा नक्षत्र है? अनुराधा
सूर्योदय पर चंद्रमा 219.2° पर था: अनुराधा, पद 2।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। अनुराधा 213°20′–226°40′ तक है; चंद्रमा 216°40′ पर उसके पद 2 में आया। वह 19:27 को निकलेगा, ज्येष्ठा में।
रवि 24 मार्च को कौन सा योग है? वज्र
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 558.4° थे, एक चक्कर और 198.4°: वज्र।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 339.2° + 219.2° = 558.4°, एक पूरा चक्कर और 198.4°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 186°40′–200°00′ पंद्रहवाँ है, वज्र। यह 09:25 को समाप्त होता है, फिर सिद्धि।
रवि 24 मार्च को कौन सा करण है? तैतिल
सूर्योदय पर बढ़त 239.9° थी: पञ्चमी का दूसरा आधा, तैतिल।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए पञ्चमी का पहला आधा कौलव है और दूसरा तैतिल। कौलव 20:22 शनि पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 234° हुई; तैतिल 07:02 तक है।
रवि 24 मार्च को कौन सा वार है, और कब से? रविवार
यह दिन रविवार को सूर्योदय, 06:57, पर शुरू हुआ: रविवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:57 से 06:55 सोम तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी रविवार के हैं।
रवि 24 मार्च को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? फाल्गुन
यह मास 4 मार्च की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य कुंभ में था: फाल्गुन।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: कुंभ से फाल्गुन। सूर्य 14 मार्च को, मास के भीतर, मीन में जाता है। अगली अमावस्या, 3 अप्रैल, उसे मीन में पाती है और चैत्र शुरू करती है।
रवि 24 मार्च को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? चैत्र
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष चैत्र का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 3 अप्रैल की अमावस्या, सूर्य मीन में, चैत्र शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ चैत्र है, और अमान्त गणना में फाल्गुन।
रवि 24 मार्च को कौन सा संवत है? विक्रम 2086 · शक 1951
विक्रम संवत 2086 15 मार्च 2029 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 15 मार्च 2029, 08:19 गुरु। तब से सूर्य तारों के बीच 368.6° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2086 गिनता है; शक संवत 1951।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
रवि 24 मार्च को चंद्रोदय कितने बजे है? 01:08 सोम
चंद्रमा यहाँ 01:08 सोम पर उदय होता है।
रवि 24 मार्च को चंद्रास्त कितने बजे है? 09:41
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 09:41 पर अस्त हुआ; वह फिर 01:08 सोम पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 09:41 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 01:08 सोम पर उदय होगा।