tithika
English

Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया का पंचांग रवि 1 अप्रैल 2029

सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC+4 में

तृतीया

कृष्ण पक्ष · 19:14 तक

फिर चतुर्थी · 16:19 सोम तक

व्रत

संकष्टी चतुर्थी

चंद्रोदय
22:45

संकष्टी चतुर्थी रवि 1 अप्रैल को है: उस रात चंद्रोदय पर चतुर्थी है। रवि 1 अप्रैल क्यों?

संकष्टी चतुर्थी: Sevan में हर तारीख़

सूर्योदय और सूर्यास्त

05:13 06:43 19:24अगला सूर्योदय 06:42 सोम

पंचांग

चौघड़िया

दिन का चौघड़िया

  • 06:43–08:18उद्वेगअशुभ
  • 08:18–09:53चरसामान्य
  • 09:53–11:29लाभशुभ
  • 11:29–13:04अमृतशुभ
  • 13:04–14:39कालअशुभ
  • 14:39–16:14शुभ
  • 16:14–17:49रोगअशुभ
  • 17:49–19:24उद्वेगअशुभ

रात का चौघड़िया

  • 19:24–20:49शुभ
  • 20:49–22:13अमृतशुभ
  • 22:13–23:38चरसामान्य
  • 23:38–01:03 सोमरोगअशुभ
  • 01:03–02:28 सोमकालअशुभ
  • 02:28–03:52 सोमलाभशुभ
  • 03:52–05:17 सोमउद्वेगअशुभ
  • 05:17–06:42 सोमशुभ

दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक

समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।

  • सूर्योदय से पहले, रवि 1 अप्रैल: ब्रह्म मुहूर्त, 05:13–05:58, शुभ
  • उद्वेग, अशुभ, 06:43–08:18
  • चर, सामान्य, 08:18–09:53
  • लाभ, शुभ, 09:53–11:29
  • अमृत, शुभ, 11:29–13:04
  • काल, अशुभ, 13:04–14:39
  • शुभ, 14:39–16:14
  • रोग, अशुभ, 16:14–17:49
  • उद्वेग, अशुभ, 17:49–19:24
  • शुभ, 19:24–20:49
  • अमृत, शुभ, 20:49–22:13
  • चर, सामान्य, 22:13–23:38
  • रोग, अशुभ, 23:38–01:03 सोम
  • काल, अशुभ, 01:03–02:28 सोम
  • लाभ, शुभ, 02:28–03:52 सोम
  • उद्वेग, अशुभ, 03:52–05:17 सोम
  • शुभ, 05:17–06:42 सोम
  • अभिजीत मुहूर्त, 12:38–13:29, शुभ
  • यमगण्ड, 13:04–14:39, अशुभ
  • गुलिक काल, 16:14–17:49, अशुभ
  • दुर्मुहूर्त, 17:43–18:33, अशुभ
  • राहु काल, 17:49–19:24, अशुभ
  • अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 05:11–05:56 सोम

हर मान कैसे निकलता है

Sevan में संकष्टी चतुर्थी रवि 1 अप्रैल को क्यों है?

संकष्टी चतुर्थी रवि 1 अप्रैल को है: उस रात चंद्रोदय पर चतुर्थी है।

चतुर्थी 21:00 22:00 23:00 00:00 01:00 रवि 1 अप्रैल स्मार्त · वैष्णव चंद्रोदय 22:45
चतुर्थी 21:00 22:00 23:00 00:00 01:00 रवि 1 अप्रैल स्मार्त · वैष्णव चंद्रोदय 22:45
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। रेखा: चंद्रोदय। गहरी पट्टी: रात।

संकष्टी का व्रत चंद्रोदय पर खोला जाता है। चतुर्थी रवि 1 अप्रैल को 19:14 से सोम 2 अप्रैल को 16:19 तक है, इसलिए चंद्रोदय पर वह केवल रवि 1 अप्रैल को है, 22:45 पर। संकष्टी चतुर्थी का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; चंद्रोदय Tithika की परिपाटी है।

संकष्टी चतुर्थी: Sevan में हर तारीख़

रवि 1 अप्रैल को कौन सी तिथि है? कृष्ण तृतीया

सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 208.7° आगे था: कृष्ण तृतीया।

सूर्य अमावस्या 0° 208.7° चंद्रमा की बढ़त कृष्ण शुक्ल तृतीया 204°–216° पूर्णिमा 180°
सूर्य अमावस्या 0° 208.7° चंद्रमा की बढ़त कृष्ण शुक्ल तृतीया 204°–216° पूर्णिमा 180°
केंद्र में पृथ्वी · सूर्य ऊपर स्थिर · चंद्रमा वामावर्त चलता है · पैमाने पर नहीं

चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 204°–216° अठारहवीं है, कृष्ण तृतीया। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:43। द्वितीया उससे पहले 22:41 शनि पर समाप्त हुई। तृतीया 19:14 को समाप्त होगी, जब बढ़त 216° होगी। बढ़त 30 मार्च की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।

रवि 1 अप्रैल को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 05:13–05:58

ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 05:13–05:58।

सूर्यास्त 19:23 शनि सूर्योदय 06:43 रवि समय, ऊँचाई नहीं शनि 31 मार्च का दिन 14 1
सूर्यास्त 19:23 शनि सूर्योदय 06:43 रवि समय, ऊँचाई नहीं शनि 31 मार्च का दिन 1
रेखा के नीचे रात, 15 मुहूर्तों में, सूर्यास्त से दक्षिणावर्त · शनिवार का दिन धुँधला

शनि 31 मार्च की रात सूर्यास्त 19:23 शनि से सूर्योदय 06:43 तक थी, 11 घं 20 मि। इसे 45 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।

दिन के 15 मुहूर्त

रवि 1 अप्रैल को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:38–13:29

अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:38–13:29।

रवि 1 अप्रैल को दुर्मुहूर्त कब है? 17:43–18:33

दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 17:43–18:33।

सूर्योदय 06:43 सूर्यास्त 19:24 सूर्योदय 06:42 सोम समय, ऊँचाई नहीं 8 14 1
सूर्योदय 06:43 सूर्यास्त 19:24 सूर्योदय 06:42 सोम समय, ऊँचाई नहीं 8 1
रेखा के ऊपर दिन, 15 मुहूर्तों में · धारीदार: दुर्मुहूर्त 14

यहाँ दिन, 06:43 से 19:24, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 50 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। रविवार को दुर्मुहूर्त चौदहवाँ है, 17:43–18:33।

रवि 1 अप्रैल का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?

06:43–08:18 उद्वेग है, जिसके स्वामी सूर्य हैं, रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।

सूर्योदय 06:43 सूर्यास्त 19:24 सूर्योदय 06:42 सोम समय, ऊँचाई नहीं उद्वेग
सूर्योदय 06:43 सूर्यास्त 19:24 सूर्योदय 06:42 सोम समय, ऊँचाई नहीं उद्वेग
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त

यहाँ दिन, 06:43 से 19:24, 1 घं 35 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।

यहाँ रात, 19:24 से 06:42 सोम, 1 घं 24 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।

दिन के 8 भाग

रवि 1 अप्रैल को राहुकाल कब है? 17:49–19:24

राहु काल रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से आठवाँ है: 17:49–19:24।

रवि 1 अप्रैल को यमगंड कब है? 13:04–14:39

यमगण्ड रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पाँचवाँ है: 13:04–14:39।

रवि 1 अप्रैल को गुलिक काल कब है? 16:14–17:49

गुलिक काल रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 16:14–17:49।

सूर्योदय 06:43 सूर्यास्त 19:24 सूर्योदय 06:42 सोम समय, ऊँचाई नहीं 1 2 3 4 5 6 7 8
सूर्योदय 06:43 सूर्यास्त 19:24 सूर्योदय 06:42 सोम समय, ऊँचाई नहीं 1 2 3 4 5 6 7 8
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त · धारीदार: यमगण्ड 5, गुलिक काल 7

यहाँ दिन 06:43 से 19:24 तक है, 12 घं 41 मि। इसे 1 घं 35 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: रविवार को राहु काल आठवाँ भाग है, यमगण्ड पाँचवाँ और गुलिक काल सातवाँ।

सूर्योदय और सूर्यास्त

रवि 1 अप्रैल को सूर्योदय कितने बजे है? 06:43

यहाँ दिन: सूर्योदय 06:43, सूर्यास्त 19:24, 12 घं 41 मि का दिन।

रवि 1 अप्रैल को सूर्यास्त कितने बजे है? 19:24

यहाँ दिन: सूर्योदय 06:43, सूर्यास्त 19:24, 12 घं 41 मि का दिन।

सूर्योदय 06:43 सूर्यास्त 19:24 सूर्योदय 06:42 सोम समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 07:39 चंद्रोदय 22:45
सूर्योदय 06:43 सूर्यास्त 19:24 सूर्योदय 06:42 सोम समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 07:39 चंद्रोदय 22:45
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त · भीतरी चाप: क्षितिज के ऊपर चंद्रमा, दो बार

सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 41 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 18 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।

सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 41 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 18 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।

रवि 1 अप्रैल को कौन सा नक्षत्र है? स्वाती

सूर्योदय पर चंद्रमा 196.1° पर था: स्वाती, पद 3।

चंद्रमा सूर्य 0° स्वाती चंद्रमा 196.1° अगला: विशाखा पृथ्वी
चंद्रमा सूर्य 0° स्वाती चंद्रमा 196.1° अगला: विशाखा पृथ्वी
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · 0° ऊपर, वामावर्त

स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। स्वाती 186°40′–200°00′ तक है; चंद्रमा 193°20′ पर उसके पद 3 में आया। वह 12:56 को निकलेगा, विशाखा में।

रवि 1 अप्रैल को कौन सा योग है? हर्षण

सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 543.5° थे, एक चक्कर और 183.5°: हर्षण।

सूर्य 347.4° + चंद्रमा 196.1° = 543.5° एक चक्कर + 183.5° हर्षण 173°20′–186°40′ चंद्रमा सूर्य 0°
सूर्य 347.4° + चंद्रमा 196.1° = 543.5° एक चक्कर + 183.5° हर्षण 173°20′–186°40′ चंद्रमा सूर्य 0°
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · 0° ऊपर, वामावर्त

तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 347.4° + 196.1° = 543.5°, एक पूरा चक्कर और 183.5°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 173°20′–186°40′ चौदहवाँ है, हर्षण। यह 11:28 को समाप्त होता है, फिर वज्र।

रवि 1 अप्रैल को कौन सा करण है? वणिज

सूर्योदय पर बढ़त 208.7° थी: तृतीया का पहला आधा, वणिज।

सूर्य अमावस्या 0° 208.7° चंद्रमा की बढ़त कृष्ण शुक्ल तृतीया 204°–216° वणिज 204°–210° पूर्णिमा 180°
सूर्य अमावस्या 0° 208.7° चंद्रमा की बढ़त कृष्ण शुक्ल तृतीया 204°–216° वणिज 204°–210° पूर्णिमा 180°
केंद्र में पृथ्वी · सूर्य ऊपर स्थिर · चंद्रमा वामावर्त चलता है · हर 12° की तिथि दो करणों में · पैमाने पर नहीं

करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए तृतीया का पहला आधा वणिज है और दूसरा विष्टि। वणिज 08:54 तक है, जब बढ़त 210° होगी; विष्टि 19:14 तक।

रवि 1 अप्रैल को कौन सा वार है, और कब से? रविवार

यह दिन रविवार को सूर्योदय, 06:43, पर शुरू हुआ: रविवार।

रविवार सूर्योदय 06:43 सूर्यास्त 19:24 सूर्योदय 06:42 सोम समय, ऊँचाई नहीं 00:00 सोम अब भी रविवार
रविवार सूर्योदय 06:43 सूर्यास्त 19:24 सूर्योदय 06:42 सोम समय, ऊँचाई नहीं 00:00 सोम अब भी रविवार
पहिये का एक चक्कर एक वार है, सूर्योदय से सूर्योदय · दक्षिणावर्त

हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:43 से 06:42 सोम तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी रविवार के हैं।

रवि 1 अप्रैल को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? चैत्र (अधिक)

15 मार्च और 14 अप्रैल की अमावस्याओं के बीच कोई संक्रांति नहीं: अधिक चैत्र।

मेष 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 मीन 0° पृथ्वी
मेष 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 मीन 0° पृथ्वी
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · वलय: सूर्य का वार्षिक पथ, 30° की 12 राशियाँ, 0° से गिनी · अमावस्या से अमावस्या तक सूर्य का पथ · धारीदार: अगली संक्रांति, मास के बाद

सामान्यतः एक मास में एक संक्रांति होती है, सूर्य का नई राशि में प्रवेश। 15 मार्च 08:19 गुरु से 14 अप्रैल 01:40 शनि तक सूर्य मीन में रहा; मेष में वह अमावस्या के बाद 14 अप्रैल 02:24 शनि को गया। बिना संक्रांति का मास अधिक चैत्र है, जो चैत्र से पहले आता है।

रवि 1 अप्रैल को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? चैत्र (अधिक)

पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष चैत्र (अधिक) का है।

अमान्त चैत्र (अधिक) पूर्णिमान्त चैत्र (अधिक) कृष्ण शुक्ल रवि 1 अप्रैल अमावस्या 15 मार्च पूर्णिमा 30 मार्च अमावस्या 14 अप्रैल पूर्णिमा 28 अप्रैल
अमान्त चैत्र (अधिक) पूर्णिमान्त चैत्र (अधिक) कृष्ण शुक्ल रवि 1 अप्रैल अमावस्या 15 मार्च पूर्णिमा 30 मार्च अमावस्या 14 अप्रैल पूर्णिमा 28 अप्रैल
समय बाएँ से दाएँ · अमान्त: अमावस्या से अमावस्या · पूर्णिमान्त: पूर्णिमा से पूर्णिमा

पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 14 अप्रैल की अमावस्या, सूर्य मीन में, चैत्र (अधिक) शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ चैत्र (अधिक) है, और अमान्त गणना में चैत्र (अधिक)।

रवि 1 अप्रैल को कौन सा संवत है? विक्रम 2086 · शक 1951

विक्रम संवत 2086 15 मार्च 2029 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।

1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 मीन 0° पृथ्वी चैत्र अमावस्या 15 मार्च 2029 08:19 · सूर्य मीन में सूर्योदय, रवि 1 अप्रैल सूर्य 347.4° पर
1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 मीन 0° पृथ्वी चैत्र अमावस्या 15 मार्च 2029 08:19 · सूर्य मीन में सूर्योदय, रवि 1 अप्रैल सूर्य 347.4° पर
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · वलय: सूर्य का वार्षिक पथ, 30° की 12 राशियाँ, 0° से गिनी · वर्ष के आरंभ से सूर्य का पथ

संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 15 मार्च 2029, 08:19 गुरु। तब से सूर्य तारों के बीच 16.8° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2086 गिनता है; शक संवत 1951।

चंद्रोदय और चंद्रास्त

रवि 1 अप्रैल को चंद्रोदय कितने बजे है? 22:45

चंद्रमा यहाँ 22:45 पर उदय होता है।

रवि 1 अप्रैल को चंद्रास्त कितने बजे है? 07:39

सूर्योदय 06:43 सूर्यास्त 19:24 सूर्योदय 06:42 सोम समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 07:39 चंद्रोदय 22:45
सूर्योदय 06:43 सूर्यास्त 19:24 सूर्योदय 06:42 सोम समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 07:39 चंद्रोदय 22:45
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त · भीतरी चाप: क्षितिज के ऊपर चंद्रमा, दो बार

चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 07:39 पर अस्त हुआ; वह फिर 22:45 पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।

चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 07:39 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 22:45 पर उदय होगा।