Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया का पंचांग मंगल 31 मार्च 2020
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC+4 में
31 मार्च का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, मंगल 31 मार्च
- 05:14–05:59ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:45 से
-
07:54–09:16अमृत कालदुर्मुहूर्त छोड़कर · मृगशिरा में
- 11:29–13:04लाभ चौघड़िया
- 12:39–13:04अभिजीत मुहूर्तगुलिक काल छोड़कर
- 13:04–14:39अमृत चौघड़ियागुलिक काल में
- 16:14–17:48शुभ चौघड़ियाराहु काल में
- सूर्यास्त 19:23 के बाद
- 20:48–22:13लाभ चौघड़िया
- 23:38–23:55शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 00:40–01:03 बुधशुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 01:03–02:28 बुधअमृत चौघड़िया
- 05:12–05:58 बुधअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:45–08:19रोगअशुभ
- 08:19–09:54उद्वेगअशुभ
- 09:54–11:29चरसामान्य
- 11:29–13:04लाभशुभ
- 13:04–14:39अमृतगुलिक काल में
- 14:39–16:14कालअशुभ
- 16:14–17:48शुभराहु काल में
- 17:48–19:23रोगअशुभ
रात का चौघड़िया
- 19:23–20:48कालअशुभ
- 20:48–22:13लाभशुभ
- 22:13–23:38उद्वेगअशुभ
- 23:38–01:03 बुधशुभ
- 01:03–02:28 बुधअमृतशुभ
- 02:28–03:53 बुधचरसामान्य
- 03:53–05:18 बुधरोगअशुभ
- 05:18–06:43 बुधकालअशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, मंगल 31 मार्च: ब्रह्म मुहूर्त, 05:14–05:59, शुभ
- रोग, अशुभ, 06:45–08:19
- उद्वेग, अशुभ, 08:19–09:54
- चर, सामान्य, 09:54–11:29
- लाभ, शुभ, 11:29–13:04
- अमृत, शुभ, 13:04–14:39
- काल, अशुभ, 14:39–16:14
- शुभ, 16:14–17:48
- रोग, अशुभ, 17:48–19:23
- काल, अशुभ, 19:23–20:48
- लाभ, शुभ, 20:48–22:13
- उद्वेग, अशुभ, 22:13–23:38
- शुभ, 23:38–01:03 बुध
- अमृत, शुभ, 01:03–02:28 बुध
- चर, सामान्य, 02:28–03:53 बुध
- रोग, अशुभ, 03:53–05:18 बुध
- काल, अशुभ, 05:18–06:43 बुध
- दुर्मुहूर्त, 09:16–10:07, अशुभ
- यमगण्ड, 09:54–11:29, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 12:39–13:29, शुभ
- गुलिक काल, 13:04–14:39, अशुभ
- राहु काल, 16:14–17:48, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 23:55–00:40 बुध, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 05:12–05:58 बुध
हर मान कैसे निकलता है
मंगल 31 मार्च को कौन सी तिथि है? शुक्ल सप्तमी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 74.4° आगे था: शुक्ल सप्तमी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 72°–84° सातवीं है, शुक्ल सप्तमी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:45। षष्ठी उससे पहले 01:45 पर समाप्त हुई। सप्तमी 02:20 बुध को समाप्त होगी, जब बढ़त 84° होगी। बढ़त 24 मार्च की अमावस्या पर 0° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा बढ़ रहा है: शुक्ल पक्ष।
मंगल 31 मार्च को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 05:14–05:59
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 05:14–05:59।
सोम 30 मार्च की रात सूर्यास्त 19:22 सोम से सूर्योदय 06:45 तक थी, 11 घं 23 मि। इसे 45 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
मंगल 31 मार्च को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:39–13:29
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:39–13:29।
मंगल 31 मार्च को दुर्मुहूर्त कब है? 09:16–10:07
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा है, 09:16–10:07, और रात के 15 में से सातवाँ, 23:55–00:40 बुध।
मंगल 31 मार्च को दुर्मुहूर्त कब है? 23:55–00:40 बुध
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा है, 09:16–10:07, और रात के 15 में से सातवाँ, 23:55–00:40 बुध।
यहाँ दिन, 06:45 से 19:23, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 50 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। मंगलवार को दुर्मुहूर्त चौथा और रात का सातवाँ है, 09:16–10:07 और 23:55–00:40 बुध।
मंगल 31 मार्च का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:45–08:19 रोग है, जिसके स्वामी मंगल हैं, मंगलवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:45 से 19:23, 1 घं 34 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 19:23 से 06:43 बुध, 1 घं 25 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
मंगल 31 मार्च को राहुकाल कब है? 16:14–17:48
राहु काल मंगलवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 16:14–17:48।
मंगल 31 मार्च को यमगंड कब है? 09:54–11:29
यमगण्ड मंगलवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 09:54–11:29।
मंगल 31 मार्च को गुलिक काल कब है? 13:04–14:39
गुलिक काल मंगलवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पाँचवाँ है: 13:04–14:39।
यहाँ दिन 06:45 से 19:23 तक है, 12 घं 38 मि। इसे 1 घं 34 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: मंगलवार को राहु काल सातवाँ भाग है, यमगण्ड तीसरा और गुलिक काल पाँचवाँ।
सूर्योदय और सूर्यास्त
मंगल 31 मार्च को सूर्योदय कितने बजे है? 06:45
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:45, सूर्यास्त 19:23, 12 घं 38 मि का दिन।
मंगल 31 मार्च को सूर्यास्त कितने बजे है? 19:23
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:45, सूर्यास्त 19:23, 12 घं 38 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 38 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 20 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 38 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 20 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
मंगल 31 मार्च को कौन सा नक्षत्र है? मृगशिरा
सूर्योदय पर चंद्रमा 61.1° पर था: मृगशिरा, पद 3।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। मृगशिरा 53°20′–66°40′ तक है; चंद्रमा 60° पर उसके पद 3 में आया। वह 17:13 को निकलेगा, आर्द्रा में।
मंगल 31 मार्च को कौन सा योग है? सौभाग्य
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 407.8° थे, एक चक्कर और 47.8°: सौभाग्य।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 346.7° + 61.1° = 407.8°, एक पूरा चक्कर और 47.8°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 40°00′–53°20′ चौथा है, सौभाग्य। यह 16:23 को समाप्त होता है, फिर शोभन।
मंगल 31 मार्च को कौन सा करण है? गर
सूर्योदय पर बढ़त 74.4° थी: सप्तमी का पहला आधा, गर।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए सप्तमी का पहला आधा गर है और दूसरा वणिज। गर 14:07 तक है, जब बढ़त 78° होगी; वणिज 02:20 बुध तक।
मंगल 31 मार्च को कौन सा वार है, और कब से? मंगलवार
यह दिन मंगलवार को सूर्योदय, 06:45, पर शुरू हुआ: मंगलवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:45 से 06:43 बुध तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी मंगलवार के हैं।
मंगल 31 मार्च को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? चैत्र
यह मास 24 मार्च की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य मीन में था: चैत्र।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: मीन से चैत्र। सूर्य 13 अप्रैल को, मास के भीतर, मेष में जाता है। अगली अमावस्या, 23 अप्रैल, उसे मेष में पाती है और वैशाख शुरू करती है।
मंगल 31 मार्च को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? चैत्र
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह शुक्ल पक्ष चैत्र का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 24 मार्च की अमावस्या ने, सूर्य मीन में, चैत्र शुरू किया। यह शुक्ल पक्ष दोनों गणनाओं में चैत्र है।
मंगल 31 मार्च को कौन सा संवत है? विक्रम 2077 · शक 1942
विक्रम संवत 2077 24 मार्च 2020 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 24 मार्च 2020, 13:28 मंगल। तब से सूर्य तारों के बीच 6.6° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2077 गिनता है; शक संवत 1942।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
मंगल 31 मार्च को चंद्रोदय कितने बजे है? 10:48
चंद्रमा यहाँ 10:48 पर उदय होता है।
मंगल 31 मार्च को चंद्रास्त कितने बजे है? 02:12 बुध
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 10:48 पर, दिन में, उदय होता है; वह फिर 02:12 बुध पर अस्त होगा।
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 10:48 पर उदय हुआ; वह फिर 02:12 बुध पर अस्त होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रास्त रात में पड़ता है।