Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया का पंचांग गुरु 23 अक्टूबर 2014
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC+4 में
त्योहार
दीवाली · लक्ष्मी पूजा
दीवाली · लक्ष्मी पूजा गुरु 23 अक्टूबर को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में अमावस्या है, और किसी शाम नहीं। गुरु 23 अक्टूबर क्यों?
दीवाली: Sevan में हर तारीख़व्रत
अमावस्या
अमावस्या गुरु 23 अक्टूबर को है: उस दिन सूर्योदय पर अमावस्या है। गुरु 23 अक्टूबर क्यों?
अमावस्या: Sevan में हर तारीख़23 अक्टूबर का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, गुरु 23 अक्टूबर
- 05:34–06:26ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 07:19 से
- 07:19–08:40शुभ चौघड़ियायमगण्ड में
- 12:22–13:05अभिजीत मुहूर्त
- 12:44–14:05लाभ चौघड़िया
- 14:05–15:26अमृत चौघड़ियाराहु काल में
- 16:47–18:08शुभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 18:08 के बाद
- 18:08–19:47अमृत चौघड़िया
-
19:45–21:27अमृत कालचित्रा में
- 00:44–02:23 शुक्रलाभ चौघड़िया
- 04:02–05:41 शुक्रशुभ चौघड़िया
- 05:41–07:20 शुक्रअमृत चौघड़िया
- 05:34–06:27 शुक्रअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 07:19–08:40शुभयमगण्ड में
- 08:40–10:01रोगअशुभ
- 10:01–11:22उद्वेगअशुभ
- 11:22–12:44चरसामान्य
- 12:44–14:05लाभशुभ
- 14:05–15:26अमृतराहु काल में
- 15:26–16:47कालअशुभ
- 16:47–18:08शुभ
रात का चौघड़िया
- 18:08–19:47अमृतशुभ
- 19:47–21:26चरसामान्य
- 21:26–23:05रोगअशुभ
- 23:05–00:44 शुक्रकालअशुभ
- 00:44–02:23 शुक्रलाभशुभ
- 02:23–04:02 शुक्रउद्वेगअशुभ
- 04:02–05:41 शुक्रशुभ
- 05:41–07:20 शुक्रअमृतशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, गुरु 23 अक्टूबर: ब्रह्म मुहूर्त, 05:34–06:26, शुभ
- शुभ, 07:19–08:40
- रोग, अशुभ, 08:40–10:01
- उद्वेग, अशुभ, 10:01–11:22
- चर, सामान्य, 11:22–12:44
- लाभ, शुभ, 12:44–14:05
- अमृत, शुभ, 14:05–15:26
- काल, अशुभ, 15:26–16:47
- शुभ, 16:47–18:08
- अमृत, शुभ, 18:08–19:47
- चर, सामान्य, 19:47–21:26
- रोग, अशुभ, 21:26–23:05
- काल, अशुभ, 23:05–00:44 शुक्र
- लाभ, शुभ, 00:44–02:23 शुक्र
- उद्वेग, अशुभ, 02:23–04:02 शुक्र
- शुभ, 04:02–05:41 शुक्र
- अमृत, शुभ, 05:41–07:20 शुक्र
- यमगण्ड, 07:19–08:40, अशुभ
- गुलिक काल, 10:01–11:22, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 10:55–11:39, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 12:22–13:05, शुभ
- राहु काल, 14:05–15:26, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 15:15–15:58, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 05:34–06:27 शुक्र
हर मान कैसे निकलता है
Sevan में दीवाली गुरु 23 अक्टूबर को क्यों है?
दीवाली · लक्ष्मी पूजा गुरु 23 अक्टूबर को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में अमावस्या है, और किसी शाम नहीं।
लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। अमावस्या गुरु 23 अक्टूबर को 01:05 से शुक्र 24 अक्टूबर को 01:56 तक है, इसलिए केवल गुरुवार का प्रदोष काल (18:08–20:47) उसके भीतर है। हर मत यही दिन लेता है।
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: प्रदोष काल, 18:08–20:47। इसमें स्थिर लग्न वृषभ पूर्व में 19:11 से 20:47 तक उदित रहता है।
Sevan में अमावस्या गुरु 23 अक्टूबर को क्यों है?
अमावस्या गुरु 23 अक्टूबर को है: उस दिन सूर्योदय पर अमावस्या है।
अमावस्या सूर्योदय की तिथि से मानी जाती है। अमावस्या गुरु 23 अक्टूबर को 01:05 से शुक्र 24 अक्टूबर को 01:56 तक है, इसलिए वह केवल गुरु 23 अक्टूबर के सूर्योदय (07:19) पर है। अमावस्या का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्योदय Tithika की परिपाटी है।
गुरु 23 अक्टूबर को कौन सी तिथि है? कृष्ण अमावस्या
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 351° आगे था: कृष्ण अमावस्या।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 348°–360° तीसवीं है, कृष्ण अमावस्या। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 07:19। चतुर्दशी उससे पहले 01:05 पर समाप्त हुई। अमावस्या 01:56 शुक्र को समाप्त होगी, जब बढ़त 360° होगी। बढ़त 8 अक्टूबर की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
गुरु 23 अक्टूबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 05:34–06:26
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 05:34–06:26।
बुध 22 अक्टूबर की रात सूर्यास्त 18:10 बुध से सूर्योदय 07:19 तक थी, 13 घं 9 मि। इसे 52 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
गुरु 23 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:22–13:05
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:22–13:05।
गुरु 23 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 10:55–11:39
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:55–11:39 और 15:15–15:58।
गुरु 23 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 15:15–15:58
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:55–11:39 और 15:15–15:58।
यहाँ दिन, 07:19 से 18:08, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 43 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। गुरुवार को दुर्मुहूर्त छठा और बारहवाँ है, 10:55–11:39 और 15:15–15:58।
गुरु 23 अक्टूबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
07:19–08:40 शुभ है, जिसके स्वामी गुरु (बृहस्पति) हैं, गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 07:19 से 18:08, 1 घं 21 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 18:08 से 07:20 शुक्र, 1 घं 39 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
गुरु 23 अक्टूबर को राहुकाल कब है? 14:05–15:26
राहु काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 14:05–15:26।
गुरु 23 अक्टूबर को यमगंड कब है? 07:19–08:40
यमगण्ड गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 07:19–08:40।
गुरु 23 अक्टूबर को गुलिक काल कब है? 10:01–11:22
गुलिक काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 10:01–11:22।
यहाँ दिन 07:19 से 18:08 तक है, 10 घं 49 मि। इसे 1 घं 21 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: गुरुवार को राहु काल छठा भाग है, यमगण्ड पहला और गुलिक काल तीसरा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
गुरु 23 अक्टूबर को सूर्योदय कितने बजे है? 07:19
यहाँ दिन: सूर्योदय 07:19, सूर्यास्त 18:08, 10 घं 49 मि का दिन।
गुरु 23 अक्टूबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:08
यहाँ दिन: सूर्योदय 07:19, सूर्यास्त 18:08, 10 घं 49 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 10 घं 49 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 13 घं 12 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 10 घं 49 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 13 घं 12 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
गुरु 23 अक्टूबर को कौन सा नक्षत्र है? चित्रा
सूर्योदय पर चंद्रमा 176.6° पर था: चित्रा, पद 1।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। चित्रा 173°20′–186°40′ तक है; चंद्रमा 173°20′ पर उसके पद 1 में आया। वह 02:32 शुक्र को निकलेगा, स्वाती में।
गुरु 23 अक्टूबर को कौन सा योग है? विष्कम्भ
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 362.2° थे, एक चक्कर और 2.2°: विष्कम्भ।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 185.6° + 176.6° = 362.2°, एक पूरा चक्कर और 2.2°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 0°00′–13°20′ पहला है, विष्कम्भ। यह 03:03 शुक्र को समाप्त होता है, फिर प्रीति।
गुरु 23 अक्टूबर को कौन सा करण है? चतुष्पाद
सूर्योदय पर बढ़त 351° थी: अमावस्या का पहला आधा, चतुष्पाद।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए अमावस्या का पहला आधा चतुष्पाद है और दूसरा नाग। चतुष्पाद 13:34 तक है, जब बढ़त 354° होगी; नाग 01:56 शुक्र तक।
गुरु 23 अक्टूबर को कौन सा वार है, और कब से? गुरुवार
यह दिन गुरुवार को सूर्योदय, 07:19, पर शुरू हुआ: गुरुवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 07:19 से 07:20 शुक्र तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी गुरुवार के हैं।
गुरु 23 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? आश्विन
यह मास 24 सितंबर की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य कन्या में था: आश्विन।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: कन्या से आश्विन। सूर्य 17 अक्टूबर को, मास के भीतर, तुला में जाता है। अगली अमावस्या, 24 अक्टूबर, उसे तुला में पाती है और कार्तिक शुरू करती है।
गुरु 23 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? कार्तिक
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष कार्तिक का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 24 अक्टूबर की अमावस्या, सूर्य तुला में, कार्तिक शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ कार्तिक है, और अमान्त गणना में आश्विन।
गुरु 23 अक्टूबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2071 · शक 1936
विक्रम संवत 2071 30 मार्च 2014 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 30 मार्च 2014, 22:44 रवि। तब से सूर्य तारों के बीच 199.7° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2071 गिनता है; शक संवत 1936।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
गुरु 23 अक्टूबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 17:56
चंद्रमा यहाँ 17:56 पर अस्त होता है।
चंद्रमा इस सूर्योदय और अगले के बीच उदय नहीं होता।
चंद्रमा 17:56 पर, दिन में, अस्त होता है और अगले सूर्योदय से पहले उदय नहीं होता।