Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया का पंचांग शुक्र 14 सितंबर 2012
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC+4 में
व्रत
मासिक शिवरात्रि
मासिक शिवरात्रि शुक्र 14 सितंबर को है: उस रात पूरे निशीथ काल में चतुर्दशी है, और किसी रात नहीं। शुक्र 14 सितंबर क्यों?
मासिक शिवरात्रि: Sevan में हर तारीख़14 सितंबर का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, शुक्र 14 सितंबर
- 05:08–05:54ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:39 से
- 08:13–09:47लाभ चौघड़ियागुलिक काल में
- 09:59–11:21अमृत चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 12:55–13:20अभिजीत मुहूर्तराहु काल छोड़कर
- 12:55–13:20शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 14:10–14:28शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- सूर्यास्त 19:10 के बाद
- 22:02–23:29लाभ चौघड़िया
-
00:02–01:35 शनिअमृत कालमघा में
- 00:55–02:21 शनिशुभ चौघड़िया
- 02:21–03:48 शनिअमृत चौघड़िया
- 05:08–05:54 शनिअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:39–08:13चरसामान्य
- 08:13–09:47लाभगुलिक काल में
- 09:47–11:21अमृतशुभ
- 11:21–12:55कालअशुभ
- 12:55–14:28शुभ
- 14:28–16:02रोगअशुभ
- 16:02–17:36उद्वेगअशुभ
- 17:36–19:10चरसामान्य
रात का चौघड़िया
- 19:10–20:36रोगअशुभ
- 20:36–22:02कालअशुभ
- 22:02–23:29लाभशुभ
- 23:29–00:55 शनिउद्वेगअशुभ
- 00:55–02:21 शनिशुभ
- 02:21–03:48 शनिअमृतशुभ
- 03:48–05:14 शनिचरसामान्य
- 05:14–06:40 शनिरोगअशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, शुक्र 14 सितंबर: ब्रह्म मुहूर्त, 05:08–05:54, शुभ
- चर, सामान्य, 06:39–08:13
- लाभ, शुभ, 08:13–09:47
- अमृत, शुभ, 09:47–11:21
- काल, अशुभ, 11:21–12:55
- शुभ, 12:55–14:28
- रोग, अशुभ, 14:28–16:02
- उद्वेग, अशुभ, 16:02–17:36
- चर, सामान्य, 17:36–19:10
- रोग, अशुभ, 19:10–20:36
- काल, अशुभ, 20:36–22:02
- लाभ, शुभ, 22:02–23:29
- उद्वेग, अशुभ, 23:29–00:55 शनि
- शुभ, 00:55–02:21 शनि
- अमृत, शुभ, 02:21–03:48 शनि
- चर, सामान्य, 03:48–05:14 शनि
- रोग, अशुभ, 05:14–06:40 शनि
- गुलिक काल, 08:13–09:47, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 09:09–09:59, अशुभ
- राहु काल, 11:21–12:55, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 12:30–13:20, शुभ
- दुर्मुहूर्त, 13:20–14:10, अशुभ
- यमगण्ड, 16:02–17:36, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 05:08–05:54 शनि
हर मान कैसे निकलता है
Sevan में मासिक शिवरात्रि शुक्र 14 सितंबर को क्यों है?
मासिक शिवरात्रि शुक्र 14 सितंबर को है: उस रात पूरे निशीथ काल में चतुर्दशी है, और किसी रात नहीं।
शिव पूजा निशीथ काल में होती है, आधी रात का मुहूर्त। चतुर्दशी शुक्र 14 सितंबर को 09:39 से शनि 15 सितंबर को 08:10 तक है, इसलिए केवल शुक्रवार की रात का निशीथ काल (00:32 शनि–01:18 शनि) उसके भीतर है। मासिक शिवरात्रि का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; निशीथ काल Tithika की परिपाटी है।
शुक्र 14 सितंबर को कौन सी तिथि है? कृष्ण त्रयोदशी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 334.4° आगे था: कृष्ण त्रयोदशी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 324°–336° अट्ठाईसवीं है, कृष्ण त्रयोदशी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:39। द्वादशी उससे पहले 10:29 गुरु पर समाप्त हुई। त्रयोदशी 09:39 को समाप्त होगी, जब बढ़त 336° होगी। बढ़त 31 अगस्त की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
शुक्र 14 सितंबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 05:08–05:54
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 05:08–05:54।
गुरु 13 सितंबर की रात सूर्यास्त 19:12 गुरु से सूर्योदय 06:39 तक थी, 11 घं 27 मि। इसे 45 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
शुक्र 14 सितंबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:30–13:20
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:30–13:20।
शुक्र 14 सितंबर को दुर्मुहूर्त कब है? 09:09–09:59
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा और नौवाँ है: 09:09–09:59 और 13:20–14:10।
शुक्र 14 सितंबर को दुर्मुहूर्त कब है? 13:20–14:10
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा और नौवाँ है: 09:09–09:59 और 13:20–14:10।
यहाँ दिन, 06:39 से 19:10, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 50 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। शुक्रवार को दुर्मुहूर्त चौथा और नौवाँ है, 09:09–09:59 और 13:20–14:10।
शुक्र 14 सितंबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:39–08:13 चर है, जिसके स्वामी शुक्र हैं, शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, सामान्य माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:39 से 19:10, 1 घं 33 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 19:10 से 06:40 शनि, 1 घं 26 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
शुक्र 14 सितंबर को राहुकाल कब है? 11:21–12:55
राहु काल शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से चौथा है: 11:21–12:55।
शुक्र 14 सितंबर को यमगंड कब है? 16:02–17:36
यमगण्ड शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 16:02–17:36।
शुक्र 14 सितंबर को गुलिक काल कब है? 08:13–09:47
गुलिक काल शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से दूसरा है: 08:13–09:47।
यहाँ दिन 06:39 से 19:10 तक है, 12 घं 31 मि। इसे 1 घं 33 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: शुक्रवार को राहु काल चौथा भाग है, यमगण्ड सातवाँ और गुलिक काल दूसरा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
शुक्र 14 सितंबर को सूर्योदय कितने बजे है? 06:39
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:39, सूर्यास्त 19:10, 12 घं 31 मि का दिन।
शुक्र 14 सितंबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 19:10
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:39, सूर्यास्त 19:10, 12 घं 31 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 31 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 30 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 31 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 30 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
शुक्र 14 सितंबर को कौन सा नक्षत्र है? मघा
सूर्योदय पर चंद्रमा 122.1° पर था: मघा, पद 1।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। मघा 120°00′–133°20′ तक है; चंद्रमा 120° पर उसके पद 1 में आया। वह 02:22 शनि को निकलेगा, पूर्वाफाल्गुनी में।
शुक्र 14 सितंबर को कौन सा योग है? सिद्ध
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 269.8° थे: सिद्ध।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 147.7° + 122.1° = 269.8°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 266°40′–280°00′ इक्कीसवाँ है, सिद्ध। यह 23:28 को समाप्त होता है, फिर साध्य।
शुक्र 14 सितंबर को कौन सा करण है? वणिज
सूर्योदय पर बढ़त 334.4° थी: त्रयोदशी का दूसरा आधा, वणिज।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए त्रयोदशी का पहला आधा गर है और दूसरा वणिज। गर 22:09 गुरु पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 330° हुई; वणिज 09:39 तक है।
शुक्र 14 सितंबर को कौन सा वार है, और कब से? शुक्रवार
यह दिन शुक्रवार को सूर्योदय, 06:39, पर शुरू हुआ: शुक्रवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:39 से 06:40 शनि तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी शुक्रवार के हैं।
शुक्र 14 सितंबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? भाद्रपद (अधिक)
17 अगस्त और 16 सितंबर की अमावस्याओं के बीच कोई संक्रांति नहीं: अधिक भाद्रपद।
सामान्यतः एक मास में एक संक्रांति होती है, सूर्य का नई राशि में प्रवेश। 17 अगस्त 19:54 शुक्र से 16 सितंबर 06:10 रवि तक सूर्य सिंह में रहा; कन्या में वह अमावस्या के बाद 16 सितंबर 16:24 रवि को गया। बिना संक्रांति का मास अधिक भाद्रपद है, जो भाद्रपद से पहले आता है।
शुक्र 14 सितंबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? भाद्रपद (अधिक)
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष भाद्रपद (अधिक) का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 16 सितंबर की अमावस्या, सूर्य सिंह में, भाद्रपद (अधिक) शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ भाद्रपद (अधिक) है, और अमान्त गणना में भाद्रपद (अधिक)।
शुक्र 14 सितंबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2069 · शक 1934
विक्रम संवत 2069 22 मार्च 2012 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 22 मार्च 2012, 18:37 गुरु। तब से सूर्य तारों के बीच 169.4° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2069 गिनता है; शक संवत 1934।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
शुक्र 14 सितंबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 05:47 शनि
चंद्रमा यहाँ 05:47 शनि पर उदय होता है।
शुक्र 14 सितंबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 17:54
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 17:54 पर अस्त हुआ; वह फिर 05:47 शनि पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 17:54 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 05:47 शनि पर उदय होगा।