Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया का पंचांग सोम 4 जून 2007
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC+5 में
व्रत
संकष्टी चतुर्थी
संकष्टी चतुर्थी सोम 4 जून को है: उस रात चंद्रोदय पर चतुर्थी है। सोम 4 जून क्यों?
संकष्टी चतुर्थी: Sevan में हर तारीख़4 जून का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, सोम 4 जून
- 05:18–05:54ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:30 से
- 06:30–08:22अमृत चौघड़िया
- 10:14–12:06शुभ चौघड़िया
- 13:58–14:28अभिजीत मुहूर्तयमगण्ड छोड़कर
- 18:26–19:34लाभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 19:34–21:26अमृत चौघड़िया
- सूर्यास्त 21:26 के बाद
- 00:50–01:58 मंगललाभ चौघड़िया
- 03:06–04:14 मंगलशुभ चौघड़िया
- 04:14–05:22 मंगलअमृत चौघड़िया
-
04:57–06:36 मंगलअमृत कालउत्तराषाढा में
- 05:17–05:54 मंगलअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:30–08:22अमृतशुभ
- 08:22–10:14कालअशुभ
- 10:14–12:06शुभ
- 12:06–13:58रोगअशुभ
- 13:58–15:50उद्वेगअशुभ
- 15:50–17:42चरसामान्य
- 17:42–19:34लाभशुभ
- 19:34–21:26अमृतशुभ
रात का चौघड़िया
- 21:26–22:34चरसामान्य
- 22:34–23:42रोगअशुभ
- 23:42–00:50 मंगलकालअशुभ
- 00:50–01:58 मंगललाभशुभ
- 01:58–03:06 मंगलउद्वेगअशुभ
- 03:06–04:14 मंगलशुभ
- 04:14–05:22 मंगलअमृतशुभ
- 05:22–06:30 मंगलचरसामान्य
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, सोम 4 जून: ब्रह्म मुहूर्त, 05:18–05:54, शुभ
- अमृत, शुभ, 06:30–08:22
- काल, अशुभ, 08:22–10:14
- शुभ, 10:14–12:06
- रोग, अशुभ, 12:06–13:58
- उद्वेग, अशुभ, 13:58–15:50
- चर, सामान्य, 15:50–17:42
- लाभ, शुभ, 17:42–19:34
- अमृत, शुभ, 19:34–21:26
- चर, सामान्य, 21:26–22:34
- रोग, अशुभ, 22:34–23:42
- काल, अशुभ, 23:42–00:50 मंगल
- लाभ, शुभ, 00:50–01:58 मंगल
- उद्वेग, अशुभ, 01:58–03:06 मंगल
- शुभ, 03:06–04:14 मंगल
- अमृत, शुभ, 04:14–05:22 मंगल
- चर, सामान्य, 05:22–06:30 मंगल
- राहु काल, 08:22–10:14, अशुभ
- यमगण्ड, 12:06–13:58, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 13:28–14:28, शुभ
- दुर्मुहूर्त, 14:28–15:27, अशुभ
- गुलिक काल, 15:50–17:42, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 17:27–18:26, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 05:17–05:54 मंगल
हर मान कैसे निकलता है
Sevan में संकष्टी चतुर्थी सोम 4 जून को क्यों है?
संकष्टी चतुर्थी सोम 4 जून को है: उस रात चंद्रोदय पर चतुर्थी है।
संकष्टी का व्रत चंद्रोदय पर खोला जाता है। चतुर्थी सोम 4 जून को 08:11 से मंगल 5 जून को 08:07 तक है, इसलिए चंद्रोदय पर वह केवल सोम 4 जून को है, 00:41 मंगल पर। संकष्टी चतुर्थी का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; चंद्रोदय Tithika की परिपाटी है।
सोम 4 जून को कौन सी तिथि है? कृष्ण तृतीया
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 215.2° आगे था: कृष्ण तृतीया।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 204°–216° अठारहवीं है, कृष्ण तृतीया। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:30। द्वितीया उससे पहले 07:52 रवि पर समाप्त हुई। तृतीया 08:11 को समाप्त होगी, जब बढ़त 216° होगी। बढ़त 1 जून की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
सोम 4 जून को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 05:18–05:54
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 05:18–05:54।
रवि 3 जून की रात सूर्यास्त 21:25 रवि से सूर्योदय 06:30 तक थी, 9 घं 5 मि। इसे 36 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
सोम 4 जून को अभिजीत मुहूर्त कब है? 13:28–14:28
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 13:28–14:28।
सोम 4 जून को दुर्मुहूर्त कब है? 14:28–15:27
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से नौवाँ और बारहवाँ है: 14:28–15:27 और 17:27–18:26।
सोम 4 जून को दुर्मुहूर्त कब है? 17:27–18:26
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से नौवाँ और बारहवाँ है: 14:28–15:27 और 17:27–18:26।
यहाँ दिन, 06:30 से 21:26, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 59 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। सोमवार को दुर्मुहूर्त नौवाँ और बारहवाँ है, 14:28–15:27 और 17:27–18:26।
सोम 4 जून का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:30–08:22 अमृत है, जिसके स्वामी चंद्र हैं, सोमवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:30 से 21:26, 1 घं 52 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 21:26 से 06:30 मंगल, 1 घं 8 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
सोम 4 जून को राहुकाल कब है? 08:22–10:14
राहु काल सोमवार के दिन के 8 बराबर भागों में से दूसरा है: 08:22–10:14।
सोम 4 जून को यमगंड कब है? 12:06–13:58
यमगण्ड सोमवार के दिन के 8 बराबर भागों में से चौथा है: 12:06–13:58।
सोम 4 जून को गुलिक काल कब है? 15:50–17:42
गुलिक काल सोमवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 15:50–17:42।
यहाँ दिन 06:30 से 21:26 तक है, 14 घं 56 मि। इसे 1 घं 52 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: सोमवार को राहु काल दूसरा भाग है, यमगण्ड चौथा और गुलिक काल छठा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
सोम 4 जून को सूर्योदय कितने बजे है? 06:30
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:30, सूर्यास्त 21:26, 14 घं 56 मि का दिन।
सोम 4 जून को सूर्यास्त कितने बजे है? 21:26
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:30, सूर्यास्त 21:26, 14 घं 56 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 14 घं 56 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 9 घं 4 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 14 घं 56 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 9 घं 4 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सोम 4 जून को कौन सा नक्षत्र है? पूर्वाषाढा
सूर्योदय पर चंद्रमा 264.3° पर था: पूर्वाषाढा, पद 4।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। पूर्वाषाढा 253°20′–266°40′ तक है; चंद्रमा 263°20′ पर उसके पद 4 में आया। वह 10:56 को निकलेगा, उत्तराषाढा में।
सोम 4 जून को कौन सा योग है? शुक्ल
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 313.4° थे: शुक्ल।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 49.1° + 264.3° = 313.4°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 306°40′–320°00′ चौबीसवाँ है, शुक्ल। यह 17:53 को समाप्त होता है, फिर ब्रह्म।
सोम 4 जून को कौन सा करण है? विष्टि
सूर्योदय पर बढ़त 215.2° थी: तृतीया का दूसरा आधा, विष्टि।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए तृतीया का पहला आधा वणिज है और दूसरा विष्टि। वणिज 20:04 रवि पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 210° हुई; विष्टि 08:11 तक है।
सोम 4 जून को कौन सा वार है, और कब से? सोमवार
यह दिन सोमवार को सूर्योदय, 06:30, पर शुरू हुआ: सोमवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:30 से 06:30 मंगल तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी सोमवार के हैं।
सोम 4 जून को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? ज्येष्ठ (अधिक)
17 मई और 15 जून की अमावस्याओं के बीच कोई संक्रांति नहीं: अधिक ज्येष्ठ।
सामान्यतः एक मास में एक संक्रांति होती है, सूर्य का नई राशि में प्रवेश। 17 मई 00:27 गुरु से 15 जून 08:13 शुक्र तक सूर्य वृषभ में रहा; मिथुन में वह अमावस्या के बाद 15 जून 15:22 शुक्र को गया। बिना संक्रांति का मास अधिक ज्येष्ठ है, जो ज्येष्ठ से पहले आता है।
सोम 4 जून को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? ज्येष्ठ (अधिक)
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष ज्येष्ठ (अधिक) का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 15 जून की अमावस्या, सूर्य वृषभ में, ज्येष्ठ (अधिक) शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ ज्येष्ठ (अधिक) है, और अमान्त गणना में ज्येष्ठ (अधिक)।
सोम 4 जून को कौन सा संवत है? विक्रम 2064 · शक 1929
विक्रम संवत 2064 19 मार्च 2007 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 19 मार्च 2007, 06:42 सोम। तब से सूर्य तारों के बीच 74.9° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2064 गिनता है; शक संवत 1929।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
सोम 4 जून को चंद्रोदय कितने बजे है? 00:41 मंगल
चंद्रमा यहाँ 00:41 मंगल पर उदय होता है।
सोम 4 जून को चंद्रास्त कितने बजे है? 08:59
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 08:59 पर अस्त हुआ; वह फिर 00:41 मंगल पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 08:59 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 00:41 मंगल पर उदय होगा।