tithika
English

Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया का पंचांग शनि 18 अक्टूबर 2003

सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC+5 में

अष्टमी

कृष्ण पक्ष · 06:02 रवि तक

फिर नवमी · 06:28 सोम तक

त्योहार

अहोई अष्टमी

अहोई अष्टमी पूजा मुहूर्त
19:16⁠–⁠21:52
प्रदोष काल 19:16⁠–⁠21:52
व्रत
08:13⁠–⁠19:16
तारा दर्शन
19:16

अहोई अष्टमी शनि 18 अक्टूबर को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में अष्टमी है, और किसी शाम नहीं। शनि 18 अक्टूबर क्यों?

अहोई अष्टमी: Sevan में हर तारीख़

सूर्योदय और सूर्यास्त

06:30 08:13 19:16अगला सूर्योदय 08:14 रवि

पंचांग

चौघड़िया

दिन का चौघड़िया

  • 08:13–09:36कालअशुभ
  • 09:36–10:59शुभ
  • 10:59–12:22रोगअशुभ
  • 12:22–13:44उद्वेगअशुभ
  • 13:44–15:07चरसामान्य
  • 15:07–16:30लाभयमगण्ड में
  • 16:30–17:53अमृतशुभ
  • 17:53–19:16कालअशुभ

रात का चौघड़िया

  • 19:16–20:53लाभशुभ
  • 20:53–22:31उद्वेगअशुभ
  • 22:31–00:08 रविशुभ
  • 00:08–01:45 रविअमृतशुभ
  • 01:45–03:22 रविचरसामान्य
  • 03:22–05:00 रविरोगअशुभ
  • 05:00–06:37 रविकालअशुभ
  • 06:37–08:14 रविलाभशुभ

दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक

समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।

  • सूर्योदय से पहले, शनि 18 अक्टूबर: ब्रह्म मुहूर्त, 06:30–07:21, शुभ
  • काल, अशुभ, 08:13–09:36
  • शुभ, 09:36–10:59
  • रोग, अशुभ, 10:59–12:22
  • उद्वेग, अशुभ, 12:22–13:44
  • चर, सामान्य, 13:44–15:07
  • लाभ, शुभ, 15:07–16:30
  • अमृत, शुभ, 16:30–17:53
  • काल, अशुभ, 17:53–19:16
  • लाभ, शुभ, 19:16–20:53
  • उद्वेग, अशुभ, 20:53–22:31
  • शुभ, 22:31–00:08 रवि
  • अमृत, शुभ, 00:08–01:45 रवि
  • चर, सामान्य, 01:45–03:22 रवि
  • रोग, अशुभ, 03:22–05:00 रवि
  • काल, अशुभ, 05:00–06:37 रवि
  • लाभ, शुभ, 06:37–08:14 रवि
  • गुलिक काल, 08:13–09:36, अशुभ
  • दुर्मुहूर्त, 08:13–08:57, अशुभ
  • दुर्मुहूर्त, 08:57–09:41, अशुभ
  • राहु काल, 10:59–12:22, अशुभ
  • अभिजीत मुहूर्त, 13:22–14:07, शुभ
  • यमगण्ड, 15:07–16:30, अशुभ
  • अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 06:30–07:22 रवि

हर मान कैसे निकलता है

Sevan में अहोई अष्टमी शनि 18 अक्टूबर को क्यों है?

अहोई अष्टमी शनि 18 अक्टूबर को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में अष्टमी है, और किसी शाम नहीं।

सप्तमी 18:00 19:00 20:00 21:00 22:00 23:00 शुक्र 17 अक्टूबर प्रदोष काल 19:17–21:53
सप्तमी 18:00 20:00 22:00 शुक्र 17 अक्टूबर प्रदोष काल 19:17–21:53
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+5)। पट्टी: तिथि। खाना: प्रदोष काल। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात।

अहोई अष्टमी की पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। अष्टमी शनि 18 अक्टूबर को 04:49 से रवि 19 अक्टूबर को 06:02 तक है, इसलिए केवल शनिवार का प्रदोष काल (19:16–21:52) उसके भीतर है। अहोई अष्टमी का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; प्रदोष काल Tithika की परिपाटी है।

अहोई अष्टमी: Sevan में हर तारीख़

शनि 18 अक्टूबर को कौन सी तिथि है? कृष्ण अष्टमी

सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 265.6° आगे था: कृष्ण अष्टमी।

सूर्य अमावस्या 0° 265.6° चंद्रमा की बढ़त कृष्ण शुक्ल अष्टमी 264°–276° पूर्णिमा 180°
सूर्य अमावस्या 0° 265.6° चंद्रमा की बढ़त कृष्ण शुक्ल अष्टमी 264°–276° पूर्णिमा 180°
केंद्र में पृथ्वी · सूर्य ऊपर स्थिर · चंद्रमा वामावर्त चलता है · पैमाने पर नहीं

चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 264°–276° तेईसवीं है, कृष्ण अष्टमी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 08:13। सप्तमी उससे पहले 04:49 पर समाप्त हुई। अष्टमी 06:02 रवि को समाप्त होगी, जब बढ़त 276° होगी। बढ़त 10 अक्टूबर की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।

शनि 18 अक्टूबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 06:30–07:21

ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 06:30–07:21।

सूर्यास्त 19:17 शुक्र सूर्योदय 08:13 शनि समय, ऊँचाई नहीं शुक्र 17 अक्टूबर का दिन 14 1
सूर्यास्त 19:17 शुक्र सूर्योदय 08:13 शनि समय, ऊँचाई नहीं शुक्र 17 अक्टूबर का दिन 1
रेखा के नीचे रात, 15 मुहूर्तों में, सूर्यास्त से दक्षिणावर्त · शुक्रवार का दिन धुँधला

शुक्र 17 अक्टूबर की रात सूर्यास्त 19:17 शुक्र से सूर्योदय 08:13 तक थी, 12 घं 56 मि। इसे 51 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।

दिन के 15 मुहूर्त

शनि 18 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 13:22–14:07

अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 13:22–14:07।

शनि 18 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 08:13–08:57

दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से पहला और दूसरा है: 08:13–08:57 और 08:57–09:41।

शनि 18 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 08:57–09:41

दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से पहला और दूसरा है: 08:13–08:57 और 08:57–09:41।

सूर्योदय 08:13 सूर्यास्त 19:16 सूर्योदय 08:14 रवि समय, ऊँचाई नहीं 8 1 2
सूर्योदय 08:13 सूर्यास्त 19:16 सूर्योदय 08:14 रवि समय, ऊँचाई नहीं 8 1 2
रेखा के ऊपर दिन, 15 मुहूर्तों में · धारीदार: दुर्मुहूर्त 1, 2

यहाँ दिन, 08:13 से 19:16, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 44 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। शनिवार को दुर्मुहूर्त पहला और दूसरा है, 08:13–08:57 और 08:57–09:41।

शनि 18 अक्टूबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?

08:13–09:36 काल है, जिसके स्वामी शनि हैं, शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।

सूर्योदय 08:13 सूर्यास्त 19:16 सूर्योदय 08:14 रवि समय, ऊँचाई नहीं काल
सूर्योदय 08:13 सूर्यास्त 19:16 सूर्योदय 08:14 रवि समय, ऊँचाई नहीं काल
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त

यहाँ दिन, 08:13 से 19:16, 1 घं 22 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।

यहाँ रात, 19:16 से 08:14 रवि, 1 घं 37 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।

दिन के 8 भाग

शनि 18 अक्टूबर को राहुकाल कब है? 10:59–12:22

राहु काल शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 10:59–12:22।

शनि 18 अक्टूबर को यमगंड कब है? 15:07–16:30

यमगण्ड शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 15:07–16:30।

शनि 18 अक्टूबर को गुलिक काल कब है? 08:13–09:36

गुलिक काल शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 08:13–09:36।

सूर्योदय 08:13 सूर्यास्त 19:16 सूर्योदय 08:14 रवि समय, ऊँचाई नहीं 1 2 3 4 5 6 7 8
सूर्योदय 08:13 सूर्यास्त 19:16 सूर्योदय 08:14 रवि समय, ऊँचाई नहीं 1 2 3 4 5 6 7 8
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त · धारीदार: गुलिक काल 1, यमगण्ड 6

यहाँ दिन 08:13 से 19:16 तक है, 11 घं 3 मि। इसे 1 घं 22 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: शनिवार को राहु काल तीसरा भाग है, यमगण्ड छठा और गुलिक काल पहला।

सूर्योदय और सूर्यास्त

शनि 18 अक्टूबर को सूर्योदय कितने बजे है? 08:13

यहाँ दिन: सूर्योदय 08:13, सूर्यास्त 19:16, 11 घं 3 मि का दिन।

शनि 18 अक्टूबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 19:16

यहाँ दिन: सूर्योदय 08:13, सूर्यास्त 19:16, 11 घं 3 मि का दिन।

सूर्योदय 08:13 सूर्यास्त 19:16 सूर्योदय 08:14 रवि समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 15:37 चंद्रोदय 00:44 रवि
सूर्योदय 08:13 सूर्यास्त 19:16 सूर्योदय 08:14 रवि समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 15:37 चंद्रोदय 00:44 रवि
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त · भीतरी चाप: क्षितिज के ऊपर चंद्रमा, दो बार

सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 3 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 58 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।

सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 3 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 58 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।

शनि 18 अक्टूबर को कौन सा नक्षत्र है? पुनर्वसु

सूर्योदय पर चंद्रमा 86° पर था: पुनर्वसु, पद 2।

चंद्रमा सूर्य 0° पुनर्वसु चंद्रमा 86.0° अगला: पुष्य पृथ्वी
चंद्रमा सूर्य 0° पुनर्वसु चंद्रमा 86.0° अगला: पुष्य पृथ्वी
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · 0° ऊपर, वामावर्त

स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। पुनर्वसु 80°00′–93°20′ तक है; चंद्रमा 83°20′ पर उसके पद 2 में आया। वह 22:23 को निकलेगा, पुष्य में।

शनि 18 अक्टूबर को कौन सा योग है? शिव

सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 266.4° थे: शिव।

सूर्य 180.4° + चंद्रमा 86.0° = 266.4° शिव 253°20′–266°40′ चंद्रमा सूर्य 0°
सूर्य 180.4° + चंद्रमा 86.0° = 266.4° शिव 253°20′–266°40′ चंद्रमा सूर्य 0°
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · 0° ऊपर, वामावर्त

तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 180.4° + 86° = 266.4°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 253°20′–266°40′ बीसवाँ है, शिव। यह 08:37 को समाप्त होता है, फिर सिद्ध।

शनि 18 अक्टूबर को कौन सा करण है? बालव

सूर्योदय पर बढ़त 265.6° थी: अष्टमी का पहला आधा, बालव।

सूर्य अमावस्या 0° 265.6° चंद्रमा की बढ़त कृष्ण शुक्ल अष्टमी 264°–276° बालव 264°–270° पूर्णिमा 180°
सूर्य अमावस्या 0° 265.6° चंद्रमा की बढ़त कृष्ण शुक्ल अष्टमी 264°–276° बालव 264°–270° पूर्णिमा 180°
केंद्र में पृथ्वी · सूर्य ऊपर स्थिर · चंद्रमा वामावर्त चलता है · हर 12° की तिथि दो करणों में · पैमाने पर नहीं

करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए अष्टमी का पहला आधा बालव है और दूसरा कौलव। बालव 17:31 तक है, जब बढ़त 270° होगी; कौलव 06:02 रवि तक।

शनि 18 अक्टूबर को कौन सा वार है, और कब से? शनिवार

यह दिन शनिवार को सूर्योदय, 08:13, पर शुरू हुआ: शनिवार।

शनिवार सूर्योदय 08:13 सूर्यास्त 19:16 सूर्योदय 08:14 रवि समय, ऊँचाई नहीं 00:00 रवि अब भी शनिवार
शनिवार सूर्योदय 08:13 सूर्यास्त 19:16 सूर्योदय 08:14 रवि समय, ऊँचाई नहीं 00:00 रवि अब भी शनिवार
पहिये का एक चक्कर एक वार है, सूर्योदय से सूर्योदय · दक्षिणावर्त

हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 08:13 से 08:14 रवि तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी शनिवार के हैं।

शनि 18 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? आश्विन

यह मास 26 सितंबर की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य कन्या में था: आश्विन।

1 2 3 4 5 कन्या तुला 8 9 10 11 12 0° पृथ्वी
1 2 3 4 5 कन्या तुला 8 9 10 11 12 0° पृथ्वी
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · वलय: सूर्य का वार्षिक पथ, 30° की 12 राशियाँ, 0° से गिनी · अमावस्या से अमावस्या तक सूर्य का पथ

अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: कन्या से आश्विन। सूर्य 17 अक्टूबर को, मास के भीतर, तुला में जाता है। अगली अमावस्या, 25 अक्टूबर, उसे तुला में पाती है और कार्तिक शुरू करती है।

शनि 18 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? कार्तिक

पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष कार्तिक का है।

अमान्त कार्तिक पूर्णिमान्त आश्विन कृष्ण शुक्ल शनि 18 अक्टूबर अमावस्या 26 सित॰ पूर्णिमा 10 अक्टू॰ अमावस्या 25 अक्टू॰ पूर्णिमा 9 नव॰
अमान्त कार्तिक पूर्णिमान्त आश्विन कृष्ण शुक्ल शनि 18 अक्टूबर अमावस्या 26 सित॰ पूर्णिमा 10 अक्टू॰ अमावस्या 25 अक्टू॰ पूर्णिमा 9 नव॰
समय बाएँ से दाएँ · अमान्त: अमावस्या से अमावस्या · पूर्णिमान्त: पूर्णिमा से पूर्णिमा

पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 25 अक्टूबर की अमावस्या, सूर्य तुला में, कार्तिक शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ कार्तिक है, और अमान्त गणना में आश्विन।

शनि 18 अक्टूबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2060 · शक 1925

विक्रम संवत 2060 2 अप्रैल 2003 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।

1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 मीन 0° पृथ्वी चैत्र अमावस्या 2 अप्रैल 2003 00:18 · सूर्य मीन में सूर्योदय, शनि 18 अक्टूबर सूर्य 180.4° पर
1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 मीन 0° पृथ्वी चैत्र अमावस्या 2 अप्रैल 2003 00:18 · सूर्य मीन में सूर्योदय, शनि 18 अक्टूबर सूर्य 180.4° पर
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · वलय: सूर्य का वार्षिक पथ, 30° की 12 राशियाँ, 0° से गिनी · वर्ष के आरंभ से सूर्य का पथ

संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 2 अप्रैल 2003, 00:18 बुध। तब से सूर्य तारों के बीच 192.6° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2060 गिनता है; शक संवत 1925।

चंद्रोदय और चंद्रास्त

शनि 18 अक्टूबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 00:44 रवि

चंद्रमा यहाँ 00:44 रवि पर उदय होता है।

शनि 18 अक्टूबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 15:37

सूर्योदय 08:13 सूर्यास्त 19:16 सूर्योदय 08:14 रवि समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 15:37 चंद्रोदय 00:44 रवि
सूर्योदय 08:13 सूर्यास्त 19:16 सूर्योदय 08:14 रवि समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 15:37 चंद्रोदय 00:44 रवि
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त · भीतरी चाप: क्षितिज के ऊपर चंद्रमा, दो बार

चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 15:37 पर अस्त हुआ; वह फिर 00:44 रवि पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।

चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 15:37 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 00:44 रवि पर उदय होगा।